एक भारतीय आत्मा की तरह  विजयआश्रम की ओर से स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत बधाई..

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     स्वतंत्रता दिवस का उत्सव हमारे जीवन में सभी स्मृतियों को याद करने का उत्सव भी है जिसमें हमारे हजारों साल की गुलामी की बात अंग्रेजी गुलामी में हमें स्वतंत्रता के पायदान पर पहुंचने का अवसर दिया। इस दौर में राजनीतिक जागरूकता के कारण भारत एक विचारधारा को लेकर आगे बढ़ा और हम परतंत्रता से स्वतंत्र भारत के निवासी हो गए। लेकिन वास्तव में स्वतंत्रता अभी हमारे हाथों से बहुत दूर है क्योंकि हम पूंजीवादी व्यवस्था के गुलाम होते जा रहे हैं। अस्तित्व सहज नियम के अनुरूप हम चल पाने में सत्य, न्याय और धर्म को काफी पीछे छोड़ रहे हैं। हम तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के चक्कर में अपनी मूल प्रकृति को तिलांजलि देते हुए जिस रफ्तार को पकड़ रहे हैं वह हमें अपनी मूल विचारधारा से अलग करती दिखाई देती है। स्वतंत्रता व्यक्ति की स्वतंत्रता ही नहीं संपूर्ण प्रकृति की जीवहित में समर्पित स्वतंत्रता को सुनिश्चित करती है। हम उसे स्वतंत्रता को महसूस तो जरूर करते हैं जिसमें आनंद ही अंतिम लक्ष्य होता है किंतु हम उसके लिए लक्ष्य तय नहीं कर पा रहे हैं। जिसका प्रमाण ओलंपियाड के खेल में हमें हमारी स्थिति को दर्शाता है।हालांकि यह निराशाजनक है किंतु आशा पर आकाश टिका है,हम उसे सिद्धांत पर अपनी स्वतंत्रता को सुनिश्चित करते हैं।
देश ने 7 दशक तक विकास कीजो धारा पड़ी है उसमें हमने जाति पात के छुआछूत के कई प्रथाओं को तोड़कर स्वतंत्र हुए हैं जो देश को सबसे ज्यादा झगड़े हुए थे आर्थिक असमानता भी उसमें एक हम कड़ी थी किंतु शिक्षा की जी गुणवत्ता को हमें जीवन मुक्त बनाने की चाहत होनी चाहिए, उससे हम वंचित हैं।
रोजगार परक वर्ण व्यवस्था में जो मौलिक अधिकार सुनिश्चित था उसे हमने कुछ सीखा नहीं वर्ण व्यवस्था को गाली देकर वोट बैंक इकट्ठा करना एक फैशन बन गया है जिससे जन्मजात रोजगार पर अधिकार की गुणवत्ता को हम लोकतांत्रिक तरीके से सुनिश्चित नहीं कर पाए। क्योंकि वर्ण व्यवस्था में जो आर्थिक असमानता पूंजीवाद शोषण और दमन से सुनिश्चित होता था लोकतंत्र में हमने वर्ण व्यवस्था की इस दोषपूर्ण व्यवस्था को अनजाने में ही आगे बढ़ा दिया है जबकि वर्ण व्यवस्था जनित रोजगार को लोकतांत्रिक पहलू पर आर्थिक असमानता को ठीक करते हुए हम आगे नहीं बढ़ा पाए । स्वतंत्रता दिवस में हमें आशा करनी चाहिए कि हम प्रकृति दत्त वस्तुओं का सम्मान करते हुए विकास की तीसरी नहीं पहलीअर्थव्यवस्था में आगे बढ़ सके।
स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं उन सभी बलिदानों को स्मरण करने का भी दिन है जिनकी वजह से आज हम एक भारतीय आत्मा की तरह जीवित रहने का प्रयास करते हैं विजय आश्रम की ओर से बहुत-बहुत बधाई..

 


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