माफियाओं के चलते पोंडा नाला के रूद्र रूप में बह गई कार, बच गये 4 यात्री….

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शहडोल में  20वीं सदी का तो याद नहीं, हां 21वीं सदी में कम से कम यह तो कहा जा सकता है की शहडोल में पोंडा नाला में कभी इतनी बाढ़ नहीं आई की कोई कार उसे बाढ़ में बह जाए। कल रात यह कसर भी पूरी हो गई… शहडोल नगर अब बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के दायरे में आ सकता है बड़ी बात नहीं है. कहीं कोई भी बाढ़ में बह सकता है हालांकि शहडोल कटनी मार्ग में बूढ़ी देवी के पास मुड़ना नदी के पुल में भी वर्षों बाद पुल के ऊपर से पानी बहता देखा गया है।
 बीती रात बरसों बाद बरसात जमकर हुई। शहडोल जिले में अन्य अन्य जगह भी कुछ ऐसी खबरें आ रही हैं जिसकी तैयारी के लिए प्रशासन ने अपने हिसाब से काफी प्रयास किए थे। किंतु पोंडा नाला के पास प्रशासन ने कोई भी प्रयास नहीं किया यह कहने में कोई झिज़क नहीं होना चाहिए। यहां पर जो कार बही है उसके सभी यात्री सब कुशल बच गए हैं। कार कुछ दूर आप जाकर अटक भी गई है। किंतु बड़ा प्रश्न है कि पोंडा नाला में ऐसा क्या हुआ है कि वहां पर शहडोल नगर का सर्वाधिक बाढ़ ग्रस्त एरिया बनने का गौरव प्राप्त हो गया है। लंबे समय से पोंडा नाला रेलवे संपत्ति की आराजीहै। यह एक प्रकार की बरसाती नाला है किंतु भूमाफियाओं ने यहां पर अपना कब्जा पूरी ताकत से कर लिया है। उसका चौड़ा नाले का आकार एक कॉलोनी का भी निर्माण नगर पालिका और प्रशासनिक अधिकारियों की सहयोग से अवैध रूप से कर दिया गया है। इस कॉलोनी के निर्माण के लिए नाला की वास्तविक स्वरूप को खत्म करके नाले के ऊपर कॉलोनी बना दी गई है। स्वाभाविक है दूसरी तरफ रेलवे लाइन है तो यह अपने आप बांध का स्वरूप ले लेता है। जहां का जल भराव इतना ज्यादा हो जाता है कि उसकी ताकत बाढ़ की बन जाती है यहां से निकलने वाला पानी इतनी फोर्स से निकलता है जैसे कोई बांध टूट गया हो… लेकिन यह प्रशासकीय अधिकारियों और नगर पालिका के सहयोग से भू माफिया बन चुके कॉलोनाइजर ने पूरी सफलता के साथ कर दिखाया है. अब प्रशासन का यह मानना है कि वह तो रेलवे क्षेत्र की आराजी है जब रेलवे को जरूरत होगी वह पूर्ण नाला भू क्षेत्र को खाली कर लेगा, रेलवे के अधिकारियों का कहना है की स्पष्ट तौर पर पोंडा नाला का क्षेत्र रेलवे का है लेकिन अभी इस जरूरत नहीं है इसलिए वह उसे तरफ ध्यान नहीं देता है।

किंतु शहडोल से नागपुर रायपुर जाने वाले इस सड़क मार्ग के यात्रियों और पास पड़ोस के सभी निवासियों के लिए यह तब तक माफिया गिरी का अभिशाप बना रहेगा ऐसा प्रतीत होता है। हो सकता है इस बार दुर्घटना में अपने भाग्य से यात्री बच गए अगली बार कॉलोनाइजर, भू माफिया और नगर पालिका तथा प्रशासनिक अधिकारियों की षड्यंत्र से निर्मित पोंडा नाला अतिक्रमण क्षेत्र मैं कुछ लोग बलिदान हो जाएं। अक्सर नागपुर जाने के लिए एंबुलेंस यहीं से जाती है कुल मिला करके बीती रात की बरसात में शहडोल नगर की बर्बाद हो चुकी पर्यावरण और परिस्थिति की पर स्पष्ट प्रमाण दिया है। जगह-जगह हालत खराब हो गए हैं देखना होगा की कर में अपने भाग्य से बच जाने के कारण जो प्रशासकी मदद मिली वह भविष्य में किसी के नसीब में है भी या नहीं;,

अथवाजिस तरह देवलोंद के पास सड़क माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के षड्यंत्र से सड़क बर्बाद होने के कारण एक बस नहर क्षेत्र में जा समय और 56 लोग मर गए हो सकता है यह खबर शहडोल नगर में इस पोंडा नाला में भी सुनने को मिले… कोई बड़ी बात नहीं है। जब जब घटनाएं घटती हैं तब तक थोड़ा सा चर्चा हो जाती है इसके बाद नेता, अधिकारी और माफिया अपनी माफिया गिरी में एकमत हो जाते हैं। यह भी अलग बात है कि पोंडा नाला क्षेत्र में कॉलोनी बनाकर जी ने बेच दिया गया है वह उनके नसीब में है कि जब कभी अतिक्रमण हटेगा तो वह उनका निजी मामला होगा। बहरहाल भगवान भरोसे चल रहे पर्यावरण और परिस्थिति की हालत जो शहडोल में दिख रही है वह इसी तरह गाहे बगाहे अपना रूद्र रूप दिखाई ही रहेगी। इसलिए इसकी आदत डाल लेनी चाहिए क्योंकि ना नेता ना अफसर इनका कोई लेना देना नहीं है कम से कम कई वर्षों से इस नाला की चर्चा के बाद भी कभी कुछ होता दिखाई नहीं दिया।


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