मणिपुर मुख्यमंत्री को पश्चिम बंगाल पर टिप्पणी करने का उन्हें कोई ‘‘नैतिक अधिकार’’ नहीं-सागरिका//महिला हिंसा को ‘लक्षणात्मक रोग’ कहे जाने की निंदा-धनखड़

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नयी दिल्ली: 30 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार से कहा कि वह जाने-माने यूट्यूबर सावुक्कू शंकर को कई आपराधिक मामलों के सिलसिले में रिहा किए जाने के तुरंत बाद हिरासत में लिए जाने के पीछे के कारणों से दो सितंबर को अवगत कराए।हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर घटनाएं अलग-अलग हैं तो वह प्राथमिकी को एक साथ नहीं जोड़ सकती।

नयी दिल्ली: 20 अगस्त (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की नेता सागरिका घोष ने कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में एक डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के खिलाफ प्रदर्शनों से निपटने के पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तरीके पर मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की टिप्पणियों को लेकर उनकी आलोचना की।घोष ने कहा कि मणिपुर की स्थिति के मद्देनजर पश्चिम बंगाल पर टिप्पणी करने का उन्हें कोई ‘‘नैतिक अधिकार’’ नहीं है।

नई दिल्ली: कांग्रेस ने शुक्रवार को आश्चर्य जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंसा प्रभावित मणिपुर का दौरा करके शांति स्थापित करने में क्यों सफल नहीं हो सकते, जबकि वह “पूरी दुनिया” में जाकर यह भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने यह भी कहा कि मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह “सारी विश्वसनीयता खो चुके हैं” और उनके रहते हालात नहीं सुधर सकते। रमेश की यह टिप्पणी बीरेन सिंह के पीटीआई को दिए गए साक्षात्कार के जवाब में आई है, जिसमें मुख्यमंत्री ने केंद्र की मदद से छह महीने में राज्य में पूरी तरह शांति बहाल करने का वादा किया है और पद छोड़ने से भी इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने न तो कोई अपराध किया है और न ही कोई घोटाला किया है।

दिल्ली उपराष्ट्रपति  जगदीप धनखड़ ने आज महिलाओं के खिलाफ हिंसा को ‘लक्षणात्मक रोग’ कहे जाने की निंदा की। दिल्ली विश्वविद्यालय के भारती कॉलेज में ‘विकसित भारत में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर छात्रों और फैकल्टी के सदस्यों को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा, “मैं आश्चर्यचकित हूं; मैं दुखी हूं और कुछ हद तक चकित हूं कि सर्वोच्च न्यायालय के बार के एक सदस्य और संसद का  एक सदस्य ऐसा कहते हैं? लक्षणात्मक रोग और यह सुझाव देते हैं कि ऐसी घटनाएं सामान्य हैं? शर्मनाक! ऐसी स्थिति की निंदा करने के लिए शब्द भी कम हैं। यह उस उच्च पद के साथ सबसे बड़ा अन्याय है।”उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से राष्ट्रपति के “बस बहुत हुआ” के आह्वान को दोहराने की अपील की और कहा, “राष्ट्रपति ने कहा, बस बहुत हुआ!” आइए, इसे राष्ट्रीय आह्वान बनाएं। मैं चाहता हूं कि यह आह्वान सभी के लिए हो। चलिए संकल्प लें कि हम एक ऐसा सिस्टम बनाएंगे जिसमें कोई भी लड़की या महिला पीड़ित न हो। आप हमारी सभ्यता को नुकसान पहुंचा रहे हैं, आप अति क्रूरता का प्रदर्शन कर रहे हैं। किसी भी चीज को बीच में न आने दें और मैं चाहता हूं कि देश के हर नागरिक इस समय की सटीक चेतावनी को सुने।”उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारी बेटियों और महिलाओं के मन में डर एक राष्ट्रीय चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, “जहां महिलाएं और लड़कियां सुरक्षित नहीं महसूस करतीं, वह समाज सभ्य नहीं है। वह लोकतंत्र भी धूमिल हो जाता है; यह हमारे विकास के लिए सबसे बड़ी बाधा है।”

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनता दल (यूनाइटेड) के एक पूर्व नेता की पार्टी में संगठनात्मक चुनावों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता गोविंद यादव द्वारा मांगी गई किसी भी राहत को देने या हस्तक्षेप करने के लिए कोई बाध्यकारी कारण नहीं है।न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कौरव ने कहा, “न्यायालय को वर्तमान रिट याचिका में हस्तक्षेप करने या याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत को देने के लिए कोई बाध्यकारी कारण नहीं मिला। याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अधिकार क्षेत्र का अभाव है और यह उसके दायरे से बाहर है। नतीजतन, रिट याचिका खारिज की जाती है।”

 

 

 

 

 

 


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