
यह वीडियो फरीदाबाद (हरियाणा) के कोचिंग इंस्टिट्यूट की है जो यह उल्लास किसी राजनीतिक दल से प्रायोजित इवेंट का हिस्सा नहीं बल्कि शिक्षक और शिष्य के बीच के नए रिश्तों की समर्पण की पहचान है। पूर्ण स्वतंत्रता, पूर्ण अभिव्यक्ति के साथ ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने की एक कोशिश है। जब भी कभी गुरु और शिष्य के बीच में संबंधों के प्रदर्शन की बात आती थी तो अथवा गुरु द्रोणाचार्य और कौरव पुत्र के बीच या फिर गुरु द्रोणाचार्य और एकलव्य की कहानी हमें सुनने को मिलती थी। देश की आजादी के बाद इस परंपरा को राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के रूप में संजोया जाने लगा किंतु स्वतंत्रता के साथ नए संदर्भों में गुरु-शिष्य की परंपरा का उल्लास शिक्षक दिवस में जो “फिजिक्स वाला” कोचिंग इंस्टिट्यूट में देखने को मिला।
यह प्रकट में दिखता है गुरु (शिक्षक)-शिष्य के बीच संबंधों की पवित्र भूमिका का निर्वहन समाज में स्वतंत्रता का संदेश भी देता है पूर्ण निर्भरता के साथ संपूर्ण ज्ञान की स्वतंत्रता, न्याय, सत्य और धर्म के आधार पर प्रकट होता है। यही इस उल्लास में समाहित दिखा है। शिक्षक दिवस पर हुए इस कार्यक्रम पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। हमारे आदिवासी क्षेत्र के शहरी और ग्रामीण अंचल में भी शिक्षकों के प्रति शिष्यों का किसी प्रकार का समर्पण स्वतंत्र संबंधों की निष्ठा को हमेशा मजबूत कर सकता है। यदि प्रयास किया जाए तो।, अन्यथा सरकारी कार्यक्रमों में और वोट बैंक के धंधे में अब इस प्रकार के संबंध में भी संभावना देखना चालू कर ही दिया है…पुन:श्च शिक्षक दिवस पर सभी विद्यार्थियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं..

