
चुनावीबांड के जरिए जबरन उगाही का आरोप वित्तमंत्री सीतारमण पर एफआइआर
नई दिल्ली, 28 सितंबर।
इस घटना का हमारे लोकतंत्र में बहुत जबरदस्त इंतजार था क्योंकि यह तो होना ही था अगर यह अवैध काम कानून बना कर किया गया है .तो यह घोषित अपराध है इसलिए वित्तमंत्री ही नहीं इसके लिए सभी जिम्मेदार संगठन और मंत्रियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं होना चाहिए..? कानून बनाकर हत्या करने का अपराध, कानून बनाकर बलात्कार करने का अपराध करने की छूट सिर्फ इसलिए क्यों मिलना चाहिए क्योंकि वह कानून बन गया है…. अगर यह अपराध है तो न सिर्फ इस अपराध के लिए संबंधित दोषी दंडित होने चाहिए बल्कि उनसे और उनके संगठन की पूरी प्रॉपर्टी नीलम करके यह राशि वापस करके सरकार के खजाने में जमा होना चाहिए तभी न्याय कहलायेगा …अन्यथा जो चल रहा है उसे रोकभी कौन रहा है…? इस मामले में अवैध कानून होने के बाद पहली बार न्यायपालिका ने एक सही कदम उठाया है..
अब समाप्त हो चुकी चुनावी बांड योजना से संबंधित एक शिकायत के बाद यहां की एक अदालत के निर्देश पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अन्य के खिलाफ शनिवार को मामला दर्ज किया गया है। उधर, इस खबर के सामने आने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने केंद्रीय वित्त मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
पुलिस के अनुसार, बंगलुरु की एक विशेष अदालत के आदेश के आधार पर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के पदाधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंडसंहिता की धाराओं 384 (जबरन वसूली के लिए सजा), 120 बी (आपराधिक साजिश) और 34 (सामान्य इरादे से कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कृत्य) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
यह शिकायत जनाधिकार संघर्ष परिषद के सह-अध्यक्ष आदर्श आर अय्यर ने दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया था किआरोपियों ने चुनावी बांड की आड़ में जबरन वसूली की और8,000 करोड़ रुपए से अधिक का फायदा उठाया।
बंगलुरु की विशेष अदालत के आदेश पर दर्ज हुआ मामला, जनाधिकार संघर्ष परिषद के सह-अध्यक्ष आदर्श आर अय्यर ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने चुनावी बांड की आड़ में जबरन वसूली की और 8,000 करोड़ रुपए से अधिक का फायदा उठाया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सीतारमण ने
ईडी अधिकारियों की गुप्त सहायता और समर्थन के की मांग की है। माध्यम से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दूसरों के
फायदे के लिए हजारों करोड़ रुपये की जबरन वसूली की। शिकायत में कहा गया है कि चुनावी बांडकी आड़ में जबरन वसूली का काम विभिन्न स्तरों पर भाजपा के पदाधिकारियों की मिलीभगत से चलाया जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में चुनावी बांड योजना को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि इससे संविधान के तहत सूचना के अधिकार
और भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है।
उधर, इस खबर के सामने आने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने केंद्रीय वित्त मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कर्नाटक भाजपा पर निशाना साधा और सवाल किया कि वे कथित घोटाले’ के सिलसिले में सीतारमण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कब शुरू करेंगे और उनसे इस्तीफा मांगेंगे।
वहीं, केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि निर्मला सीतारमण को इस्तीफा क्यों देना चाहिए? क्या चुनावी बांड का पैसा निर्मला सीतारमण के निजी खाते में गया है? क्या उन्होंने सत्ता का दुरुपयोग किया है और आप (सिद्धरमैया)
की तरह खुद को लाभ पहुंचाया है? (SABHAR-जनसत्ता)