जहां वृंदावन में बाबा मचान में रहते थे, दिव्य आश्रम है..( त्रिलोकीनाथ )

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वृंदावन में यमुना पार करके  ब्रह्मर्षि देवहरा बाबा के समाधि स्थल में उनकी कृपा से जाने का अवसर मिला। इस स्थान को देखने को व्याकुल था जहां पर देवरिया उत्तर प्रदेश से बाबा वृंदावन में आकर अपनी देहत्याग कहते हैं 300 वर्ष बाद किए थे।तब की फोटो गूगल और यूट्यूब में देखने को मिली। आज वर्तमान का स्वरूप कुछ इस प्रकार का है। एक कहानी मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास भी सुना रहे थे जिसमें उन्होंने अपनी हाल की समाधि स्थल की यात्रा बाद सुनाया था कि किस प्रकार से बाबा तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने पर उनके मंत्री बूटा सिंह को बाबा जी के पास यह संदेश लेकर गए थे कि यमुना जी बहुत प्रदूषण हैं वृंदावन में अतः किसी प्रकार से उन्हें मना कर दिल्ली के ऊपर वाले भाग में जहां यमुना जी तुलनात्मक रूप से प्रदूषण रहित पवित्र है;    बाबा जी वहां पर अपना स्थान बना ले.. राजीव गांधी बाबा जी से बहुत श्रद्धा रखते थे। कहा तो यह भी जाता है की देवहरा बाबा के कहने पर ही राजीव गांधी ने अयोध्या में रामलला जी की मंदिर का ताला तुड़वाया था। अपनी देह यात्रा को 1990 में विराम दिया था वृंदावन धाम आकर के। राजीव गांधी को बाबा “प्यारी आत्मा” कहकर संबोधन करते थे।                  …..( त्रिलोकीनाथ )….

यह देवहरा बाबा के यूट्यूब में देखा जा सकता है। बहरहाल बूटा सिंह की हिम्मत बाबा जी से यह बात कहने की नहीं हुई तब उन्होंने वर्तमान में रह रहे “बड़े सरकार” नाम के उनके सानिध्य में शिष्य को अपनी राय सुझाई और चले आए। बड़े सरकार ने मौका लगते ही बाबा जी को सामने यह साहस करके अपनी बात रखी बड़े सरकार के अनुसार “तब बाबा जी बहुत क्रोधित हुए और वे मटका बड़े सरकार के सिर में फोड़ दिया और दिनभर “बड़े सरकार” से नाराज रहे.. क्योंकि बड़े सरकार ने यमुना जी को प्रदूषणयुक्त बताया था। शाम के वक्त जब लखनऊ की पुलिसउच्च अधिकारी उनसे मिलने आए थे तब बाबा जी ने बड़े सरकार की यह शिकायत गुस्से से कह रहे थे। कहते हैं पुलिस के उच्च अधिकारी ने बाबा जी से निवेदन किया यमुना जी में प्रदूषण हैं यह हम सांसारिक व्यक्ति देखते हैं बाबा जी और हम सांसारिक व्यक्तियों की यही क्षमता है।
बड़े सरकार के अनुसार उन्होंने बातों ही बातों में बड़े सरकार को भी और आए हुए पुलिस अधिकारियों को भी कहा चलो चल कर देखो यमुना जी कहां प्रदूषित हैं और उनके अनुसार जब उन्होंने यमुना जी को रात्रि के वक्त देखा तो यमुना जी का जल पूर्ण पवित्र और पारदर्शी रहा अंदर रेत स्पष्ट तौर पर दिख रही थी। बाबा राजेंद्र दास के अनुसार जल इतना पवित्र था की यमुनोत्री में भी वह इतनी साफ नहीं रही होगी उनकी आभा यमुना जी की नीलमणि के समान थी उसमें दिव्य कछुए तैर रहे थे। यह स्थिति देखकर बड़े सरकार और अधिकारी गण अचंभित रह गए। तब बाबा जी ने कहा देखते क्या हो गोता लगा लो और जिस स्थिति में लोग थे इस स्थिति में यमुना जी में गोता लगाया। बाबा राजेंद्र दास के अनुसार उन्होंने अपने संकल्प मात्र से यमुना जी को इतना पवित्र कर दिया था बाबा जी का यमुना जी के प्रेम अगाध था वह उनके खिलाफत नहीं सुन सकते थे। यह ब्रह्मर्षि देवरा बाबा के जीवन काल की एक घटना है और इसलिए वृंदावन धाम छोड़ने की बात खत्म हो गई।

     आज उसी स्थान पर जहां बाबा मचान में रहते थे दिव्य आश्रम है इसी आश्रम में मुझे और मेरी धर्मपत्नी को जाने का अवसर लगा। संयोग से जो हमारा ऑटो का ड्राइवर था वह भी साथ गया था मैं तो पहचानता नहीं था “बड़े सरकार” को वे अपने शिष्यों के साथ नवरात्रि में एक बड़े यज्ञ का आयोजन किए थे‌ उसी के बाद कन्या भोजन की तैयारी चल रही थी, जैसे ही ड्राइवर ने बताया कि “बड़े सरकार यही है” मैं एक स्वयं को रोक नहीं पाया और वहीं पर उनके चरण स्पर्श किए। एक असीम आनंद का अनुभव हुआ तभी उनके परिकर आए और हमें हटा दिए। बड़े सरकार ने भी कृपा दृष्टि हम पर डाली और इतना कहा चल रहे कार्य में सहयोग करें। हम काफी देर तक उसे आश्रम में रहे। भंडारे का प्रसाद भी लिया और लंबे समय से चल रही देवहरा बाबा के इस शरीर को छोड़ने के 34 साल बाद इस अनुभव को जी रहे थे जैसे वह आज भी वहां हम सब पर कृपा करते हैं। बड़े सरकार उन कृपा मूर्ति के आदेश पर सबको अपना सानिध्य देते हैं। वृंदावन धाम में ऐसे कितने संत ऋषि और महर्षि सहज रूप से आम मानव को उनकी कल्याण के लिए अपनी कृपा बरसाते रहते हैं। मैं राधारानी लाडली जू महाराज कि यदि कृपा ना होती तो शायद ही हम यहां जा पाते। उनकी दया हम पर बनी रहेगी इसके बावजूद कि हम बहुत अधम लोग हैं वास्तव में यह कृपा यह संतों का स्वभाव होता है।

शहडोल में भी ऐसे बहुत से प्राचीन पुरातात्विक महत्व के उपासना स्थल है, मां कंकाली देवी, मां बिरासिनी माता, माता भुवनेश्वरी (विचारपुर) माता साक्षात मां नर्मदा और सोन महानद विंध्याचल में प्रवाहित हैं उनके सानिध्य में अमरकंटक में भी निश्चित तौर पर ऐसे लोग सब पर कृपा बरसाते रहते हैं।


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