
श्रीनगर: 16 अक्टूबर (भाषा) नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में यह पहली चुनी हुई सरकार है।जून में लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने से लेकर विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद चार महीने बाद केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में इतिहास रचने तक, उमर अब्दुल्ला के लिए यह सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 54 वर्षीय अब्दुल्ला ने बुधवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जो उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत और उनके दादा शेख अब्दुल्ला और पिता फारूक अब्दुल्ला के बाद प्रभावशाली अब्दुल्ला परिवार की तीसरी पीढ़ी की सत्ता में शुरुआत है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के उपाध्यक्ष ने 2009-14 तक पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
PIB Delhi सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कोल इंडिया की छत्तीसगढ़ स्थित सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल)
ने देश की 216वीं अमृत (उपचार के लिए सस्ती दवाइयाँ और विश्वसनीय प्रत्यारोपण) फार्मेसी का उद्घाटन किया। बिलासपुर में एसईसीएल की इंदिरा विहार कॉलोनी केस्वास्थ्य केंद्र में यह नई सुविधा एसईसीएल को चार अमृत फार्मेसियों का संचालन करने वाली पहली कोयला कंपनी है।अमृत फार्मेसियाँ, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2015 में शुरू की गई एक प्रमुख पहल का हिस्सा हैं, जो अत्यधिक रियायती दरों पर जेनेरिक और जीवन रक्षक ब्रांडेड दवाओं, प्रत्यारोपण और शल्य चिकित्सा में उपयोग आने वाली सामग्रियों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करती हैं। एसईसीएल की इस पहल से एसईसीएल कर्मचारियों, आम जनता और विशेष रूप से कोयला क्षेत्र के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों सहित वहां काम करने वाले और बाह्य मरीजों दोनों को लाभ होगा। इन फार्मेसियों के विस्तार से कुछ सबसे वंचित क्षेत्रों में समुदायों के लिए सस्ती दवाओं तक आसान पहुँच सुनिश्चित होगी।एसईसीएल के सीएमडी डॉ. प्रेम सागर मिश्रा ने समावेशी विकास के लिए कंपनी की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी चौथी अमृत फार्मेसी के उद्घाटन के साथ, हमें न केवल अपने कर्मचारियों के लिए बल्कि बड़े समुदाय विशेषकर कोयला क्षेत्र के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी स्वास्थ्य सेवा की पहुँच बढ़ाने पर गर्व है।यह पहल समावेशिता को बढ़ावा देने के साथ भी जुड़ी हुई है जो इस साल के विशेष अभियान 4.0 के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है।फार्मेसी का निर्माण स्वास्थ्य केंद्र के साथ खाली स्थान की सफाई और उपयोग करके किया गया है, जो विशेष अभियान 4.0 के तहत सर्वोत्तम प्रथाओं का एक उदाहरण बनकर उभरा है।यह फार्मेसी, कोरबा जिले के गेवरा, शहडोल जिले के सोहागपुर, और मनेन्द्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के चिरमिरी के परिचालन क्षेत्रों में स्थित केंद्रीय अस्पतालों में स्थित है, जो यह सुनिश्चित करती है कि कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियों जैसी सामान्य और गंभीर बीमारियों के लिए दवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला एक ही स्थान पर उपलब्ध हो।
सुमित मेडिकल ;3 वर्ष का सश्रम कारावास, 1 लाख अर्थदण्ड,
कटनी (15 अक्टूबर) – जनसम्पर्क 2019 में तत्कालीन औषधि निरीक्षक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, कटनी द्वारा कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त शिकायत एवं एस.डी.एम. मुड़वारा के पत्र के परिपालन में जांच दल के साथ जिला चिकित्सालय के सामने स्थित मेसर्स सुमित मेडिकल एंड जनरल स्टोर्स, प्रोपराइटर मुकेश कुमार सीतपाल की जांच की गई थी। जांच के दौरान प्रोपराइटर मुकेश कुमार सीतपाल द्वारा उक्त मेडिकल स्टोर्स की वैध औषधि अनुज्ञप्तियाँ प्रस्तुत नहीं की गई और न ही दुकान में संधारित औषधि के क्रय बीजक प्रस्तुत किये। औषधि निरीक्षक खाद्य एवं औषधि प्रशासन मनीषा धुर्वे ने बताया कि प्रोपराइटर द्वारा बिना वैध औषधि अनुज्ञप्तियों के मेडिकल स्टोर्स का संचालन करने पर मौके पर दुकान में संधारित समस्त एलोपेथिक औषधियों को नियमानुसार जब्त कर पंचनामा तैयार कर जप्ती की कार्यवाही की गई। विवेचना के दौरान मुकेश सीतपाल के पास मेडिकल स्टोर की वैध औषधि अनुज्ञप्तियां नहीं पाई गई और ना ही जप्त की गई औषधियों के क्रय बीजक पाये गए तथा उनके द्वारा उक्त दस्तावेज भी कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किये गये हैं। प्रकरण की विवेचना उपरांत उक्त प्रकरण मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जिला कटनी के समक्ष वर्ष 2021 में प्रस्तुत किया गया। वर्ष 2021 से 2024 तक उक्त केस न्यायालयीन कार्यवाही में प्रचलन में रहा, न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान भी प्रोपराइटर द्वारा मेडिकल स्टोर की वैध औषधि अनुज्ञप्तियां एवं जप्त की गई औषधियों के क्रय बीजक प्रस्तुत नहीं किये गये।लायसेंस वैधता अवधि 1998 तक कार्यालय में संधारित लायसेंस रजिस्टर का अवलोकन करने पर ज्ञात हुआ कि उक्त दुकान का लायसेंस वर्ष 1998 तक ही वैध था, इसके पश्चात् प्रोपराइटर द्वारा लायसेंस का नवीनीकरण समय-समय पर नहीं कराया गया। वर्ष 2013 में आवेदक द्वारा लायसेंसे के नवीनीकरण हेतु कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया जिसपर तत्कालीन औषधि निरीक्षक द्वारा उन्हें मौखिक रूप से 1998 के पश्चात् नवीनीकरण के चालान एवं समस्त दस्तावेज कार्यालय में प्रस्तुत करने हेतु कहा था परंतु प्रोपराइटर ने समस्त दस्तोवज प्रस्तुत नहीं किये। वर्ष 1998 से वर्ष 2013 तक नवीनीकरण हेतु कोई भी आवेदन कार्यालय में नहीं दिया गया।वर्ष 2017 मंे एमपी ऑनलाईन से किया आवेदन वर्ष 2017 में एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रोपराइटर द्वारा पुनः नवीनीकरण हेतु आवेदन दिया गया परंतु संलग्न दस्तावेजों में मूल औषधि अनुज्ञप्तियां एवं नवीनीकृत औषधि अनुज्ञप्तियों की प्रतिलिपि संलग्न नहीं की गई थी। तत्कालीन औषधि अनुज्ञप्ति प्राधिकारी द्वारा पत्र प्रोपराइटर को दिया गया परंतु मुकेश सीतपाल द्वारा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये गये। अतः नवीनीकरण की फाइल को ऑनलाइन निरस्त किया गया। वर्ष 2019 में शिकायत के आधार पर उक्त मेडिकल स्टोर की जांच की गई एवं वैध औषधि अनुज्ञप्तियां प्रस्तुत न करने पर दुकान में संधारित औषधियों को नियमानुसार जप्त किया गया तथा वर्ष 2021 में न्यायालय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिला कटनी म.प्र. के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सामग्री अधिनियम की धारा 18 (सी) एवं 18 (ए) के उल्लंघन में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 धरा 27 (बी) (पप) एवं धारा 28 के अपराध के आरोपों में दोषसिद्ध ठहराया गया है। शासन की तरफ से अपर लोक अभियोजक द्वारा पक्ष रखा गया। इस प्रकार नवम अपर सत्र न्यायाधीश जिला कटनी की न्यायालय में 30 सितंबर 2024 को मेसर्स सुमित मेडिकल एंड जनरल स्टोर्स के मालिक मुकेश कुमार सितपाल को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की धारा-18 (सी) के उल्लंघन में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की दंडनीय धारा 27 (बी) ( पप) के अंतर्गत 3 वर्ष का सश्रम कारावास, 1 लाख रूपये का अर्थदण्ड, अर्थदण्ड के व्यतिक्रम में 6 माह का अतिरिक्त कारावास एवं औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की धारा-18 (।) के उल्लंघन में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की दंडनीय धारा 28 के अंतर्गत 1 वर्ष का सश्रम कारावास, 20 हजार रूपये का अर्थदण्ड एवं अर्थदण्ड के व्यतिक्रम में 3 माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई।

