
उन्हें “एन एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर” भी कहा जाता गया.. क्योंकि ऐसा माना जाता था कि जब कांग्रेस बहुमत में आई तो श्रीमती सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया था। कुछ वैशधव कुटुंबकम का नारा जोर से बोलने वाले कट्टरपंथी श्रीमती सोनिया गांधी को विदेशी बहू बताकर उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहते थे । तब श्रीमती सोनिया गांधी की “आत्मा की आवाज आई ” कि उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनना है। और फिर प्रधानमंत्री कांग्रेस के अंदर ढूंढना चालू हुआ एक ही चेहरा नजर आया जो कि राजीव गांधी के वित्त मंत्री हुआ करते थे और भारत के रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉक्टर मनमोहन सिंह।हम शहडोलआदिवासी क्षेत्र के निवासी इस मिडिल क्लास के उच्च पद पर बल्कि उच्चतम अर्थशास्त्री के पद पर नियुक्त मनमोहन सिंह को इस रिश्ते से जानते हैं क्योंकि वह हमारे शहडोल के सांसद तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री दलबीर सिंह के वित्त मंत्री हुआ करते थे। स्वाभाविक है यह संदर्भ बताता है कि तब राजनीति इतनी ही लोचता पूर्ण थी। आज के कारपोरेट कल्चर की तरह भयानक नहीं थी।आदिवासी क्षेत्र के दलबीर सिंह को वित्त राज्य मंत्री जैसा मंत्रालय मिलना वह भी तब जबकि दुनिया में नाम कमाने वाले वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह के अधीन उन्हें देश की अर्थव्यवस्था को समझना हो, निश्चित रूप से दलबीर सिंह ने काफी कुछ समझा था।
इस संदर्भ को इसलिए याद करना जरूरी है कि अगर उच्च पद पर कोई व्यक्ति जब बैठता है और उसका तत्कालीन संबंध भी जमीनी धरातल से होता है तो वह जमीन की बात ही हमेशा सोचता रहता है ।डॉक्टर मनमोहन सिंह ऐसे ही प्राइम मिनिस्टर थे । कहते हैं कि उनके पास एक मारुति गाड़ी थी जो उनकी खुद की थी। जैसे प्राइम मिनिस्टर लाल बहादुर शास्त्री के पास अपनी फिएट थी जो आज भी उनके बंगले में खड़ी है। उस पीरियड से श्री शास्त्री जितना प्रेम रखते थे उतना ही प्रेम मनमोहन सिंह को अपने मारुति से था। यह उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी थी जीवन को देखने की।
देश दुनिया के वैभवता उनके नजदीक थी किंतु उनका अपनी मारुति से उसके प्रति संवेदना दर्शाना यह बताता है कि वे की अपनी जमीन को हमेशा अपने दिल में रखते थे। ऐसे ही उनका परिवार उनकी धर्मपत्नी की जीवन शैली इतनी ही सहज थी वे पूर्णतया भारतीय महिला हैं यही कारण है की जमीनी हकीकत को डॉक्टर मनमोहन सिंह हमेशा अपनी दृष्टिकोण के लक्ष्य में रखते थे । उनका अर्थशास्त्र इसी के इर्द-गिर्द घूमता रहता था। जो दुनिया की गरीबी को समाधान की दृष्टिकोण से देखा था। उनकी इसी शैली ने उन्हें भारत का ही नहीं दुनिया का बेहतरीन अर्थशास्त्री बनाया ।
यह हमारा सौभाग्य था कि डॉ मनमोहन सिंह हमारे प्रधानमंत्री रहे। इसीलिए उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण क्रांतिकारी विधेयक पास हो सकेक सूचना का अधिकार, आम आदमी को रोजगार मिल सके ऐसा महात्मा गांधी रोजगार गारंटी मनरेगा उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि थी जिसने कोविड महामारी के दौरान भारत को जिंदा रखने में मदद की।
यह दुर्भाग्य भी उनके साथ जुड़ा की पतित हो चुकी राजनीति जब आर्थिक साम्राज्यवाद के नक्शे कदम पर अपना भविष्य देख रही है तब उनके बारे में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही यह कहा था कि जैसे-जैसे रुपए की कीमत घटती जाती है डॉलर के मुकाबले वैसे-वैसे देश की इज्जत भी घटती चली जाती है.. कुछ इसी प्रकार की भावना का इजहार विरोध करने के लिए वर्तमान नरेंद्र मोदी डॉ मनमोहन सिंह का उपहास उड़ाने का काम किया था आज वक्त इतना गंदा आ चुका है कि डोनाल्ड ट्रंप जो अमेरिका के राष्ट्रपति होने वाले हैं और कभी नरेंद्र मोदी के दोस्त हुआ करते थे..उसी ट्रंप के डर की धमक से एक डॉलर की कीमत पचासी रुपए पार कर गया है। नरेंद्र मोदी ने यह बात तब कही थी जब 60 रुपए प्रति डॉलर के आसपास घूम रहा था। कोई बड़ी बात नहीं है अभी हफ्ता भर समय है 2024 खत्म होने के लिए नए साल में रुपया ₹100 प्रति डॉलर जंप कर जाए। ट्रंप के डर से.. क्योंकि दौर आर्थिक साम्राज्यवाद का है…।
डॉ मनमोहन सिंह इसी आर्थिक साम्राज्यवाद के राक्षश से भारत को बचाकर रखते थे। उनके दौर में भी विश्व में आर्थिक मंदी का दौर आया किंतु भारतीयों को तब उसे आर्थिक मंदी का एहसास नहीं हुआ था। शायद इसीलिए क्योंकि उन्हें अपनी “मारुति कार” अपने घर में हमेशा भारतीयों को जिंदा रखने की ताकत देती थी।
डॉ मनमोहन सिंह ऐसे ही प्राइम मिनिस्टर थे बेहद सहज, सरल और संवेदनशील किंतु उच्चतम अर्थशास्त्री जो प्राचीन अर्थशास्त्रियों चाणक्य की तरह विद्वान थे… किंतु कूटनीतिज्ञ का ज्ञान उन्होंने हासिल नहीं किया था क्योंकि वह आम आदमी थे। डॉक्टर मनमोहन सिंह हमारे दिल में इस तरह हमेशा बने रहेंगे जैसे लाल बहादुर शास्त्री तत्कालीन कार्यकाल में बेहतरीन प्रधानमंत्री रहे। विजयआश्रम परिवार उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है——(त्रिलोकी नाथ)—-

