
शहडोल में जब भी गणतंत्र दिवस की चर्चा होती है उसे वक्त भारत के संविधान निर्माता समिति के सदस्य और शहडोल के निर्माता कहे जाने वाले पंडित शंभू नाथ शुक्ला हमें हमेशा याद आते हैं क्योंकि उन्होंने भारत की संविधान सभा के सदस्य बनकर इस देश में संविधान निर्माण में अहम भूमिका अदा की थी। बता दें, 15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी, जिसे हर साल स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। हालांकि आजादी के बाद भी भारत एक गणतंत्र राष्ट नहीं था, बल्कि एक राष्ट्रमंडल देश था।
याद दिलाता है जब भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया गया था। संविधान सभा के अथक प्रयासों के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था। यह दिन हमें हमारे अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के साथ संविधान के महत्व को हमें हर साल याद दिलाता है कि हम आजाद भारत के नागरिक हैं और हमारे अधिकार हैं और यह बात भारत के हर नागरिक के हर भौगोलिक क्षेत्र में लागू होती है जितना दिल्ली में उतना ही शहडोल में भी शहडोल को संविधान ने पांचवीं अनुसूची में अनुसूचित क्षेत्रों में शामिल किया है अतः यहां पर कुछ विशेष अधिकार संविधान में प्रदत्त किए हैं 75 साल बीत जाने के बाद भी जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो महसूस होता है यहां की नागरिकों को संविधान में मिली हुई सुरक्षा सुरक्षा की गारंटी उतनी सार्थक नहीं हुई है जितना संविधान में हमसे वादा किया है उसका एकमात्र कार्य है कि हम अपने कर्तव्य और संविधान के अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है
क्योंकि यह क्षेत्र प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर है इसलिए इसके पर्यावरण और परिस्थित की की सुरक्षा के साथ स्थानीयता की सुरक्षा की गारंटी भी संविधान ने हमें दी है लेकिन जब हम इस सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं करवा सकते तो यह हमारी जागरूकता में पिछड़ापन का पहचान बन जाती है 76 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर हमारी यही कामना है की भारत के स्थानीय नागरिक अपने अधिकारियों के प्रति जागरूक रहे हैं ताकि स्वतंत्रता और सतत स्वतंत्रता का सुख हमारे वीर बलिदानों के बलिदान से जो संविधान निर्माता ने सुरक्षित किया है हम उसकी भी रक्षा करें और वह हमारी भी रक्षा करें गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

