
कुंभ-निष्कर्ष- मुलायम-मूर्ति पर मुलायम हुए श्री शंकराचार्य;
कहे, भारत रत्न का सम्मान या अपमान…: शंकराचार्य
वैसे तो प्रयागराज में सच पूछो तो बहुतायत लोगों को मरने के बाद ही पहुंचाते हैं। जीते जी जिसकी इच्छा हो गई वह पर्यटन के दृष्टिकोण से वहां चला जाता है। लगे हाथ गंगा जी भी स्नान कर लेता है। किंतु जब कम भाता है तो वह अवश्य वहां तीर्थ भावना से स्नान करता है ।वर्तमान महाकुंभ भी पर्यटन को प्राथमिकता देकर के करोड़ों रुपए सरकार ने लगा दिए हैं, आम कल्प-वासी जो सैकड़ो साल से परंपरागत चले आ रहे हैं तीर्थराज के संरक्षण में पवित्र भाव से रहने के लिए जो हर साल पहुंचते हैं इस बार सरकार की असुविधा से प्रताड़ित हो रहे हैं…
इस बीच में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह मरणोपरांत प्रयागराज पहुंचे, तो हंगामा हो गया । उनके अपने अंधभक्त हैं उन्होंने अपने तरीके से उन्हें महाकुंभ में गंगा स्नान का लाभ दिया है। किंतु इस मूर्ति से कई लोगों को भारी परेशानी हो रही है। सोशल मीडिया सबसे ज्यादा परेशान है ।गुलाम मीडिया के आक्रामक और बचाव शैली में अपनी कर्तव्य निष्ठा का प्रदर्शन कर रहा है।
इसी प्रश्न को लेकर जब कुछ मीडिया-मैन श्री शंकराचार्य जी से उनका पक्ष जानना चाहा उन्होंने बड़े सहज अंदाज में अपना जवाब दिया
मुलायम सिंह की प्रतिमा पर राजनीति क्यों?’
श्री शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कुंभ क्षेत्र में लगाए गए मुलायम सिंह की प्रतिमा को लेकर बयान दिया है। उन्होंने पत्रिका समाचार पत्र से कहा, “पूरे मेले में हर 10-15 मीटर पर दो लोगों के फोटो लगे हैं। उससे राजनीति नहीं हो रही है, पूरे मेले क्षेत्र में एक जगह पर एक मूर्ति किसी ने रख दी है, तो वह राजनीति हो गई…? प्रति प्रश्न करते हुए शंकराचार्य ने कहा मेले के बाहर, शहर में, एयरपोर्ट पर और रेलवे स्टेशन तक जो फोटो लगाई गई है, वो राजनीति नहीं है। ये क्या है?”
मुलायम सिंह की आलोचना परश्री शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आगे कहा, “ये कहना कि राम जन्मभूमि के मामले में मुलायम सिंह दोषी हैं, क्योंकि उन्होंने कारसेवकों पर गोली चलवाई। तो उस समय जिस मुख्य सचिव ने गोली चलाई थी, वो आज अयोध्या के राम मंदिर का ट्रस्ट का हेड है। उस समय हम हिंदुओं को बुरा नहीं लगा था..? वो आपका आदमी है, इसलिए वो पाक साफ है और दूसरा दोषी है..?उन्होंने कहा, अगर मुलायम सिंह इतना बुरा था और आपको खटकता था तो उसे मरणोपरांत भारत रत्न क्यों दिया..?”एक अन्य मीडिया-मैन से कहाअरे भाई “चित् भी मेरी, पट भी मेरी,” आपने ही उन्हें भारत-रत्न दिया और आप ही अपमान करेंगे; सम्मानित भी आप करेंगे और अपमानित भी आप करेंगे…?

