
गणेश मंदिर ट्रस्ट में भी हो सकती है क्योंकि जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभाष गुप्ता वगैरह को हटा करके मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अन्य कमेटी वहां गठित कर दी है जब तक की वहां का मामला न्यायालय से निराकृत नहीं हो जाता है। वैसे तो भारत के संविधान में शहडोल विशेष आदिवासी क्षेत्र का दर्जा प्राप्त करता है किंतु गहराई से देखें तो पूरा शहडोल क्षेत्र धार्मिक और आध्यात्मिक अनुसंधान का बड़ा केंद्र रहा है। इसीलिए यहां का पुरातात्विक संपदा जगह-जगह हर 10- 20 किलोमीटर में देखने को मिलती है । यह एक अलग बात है कि यह पुरातात्विक संपदा किस बात को प्रमाणित करती है इसके लिए ना तो यहां शासन ने कोई प्रयास किए हैं और ना ही प्रशासन ने, इस क्षेत्र में स्थापित विश्वविद्यालय चाहे वह समूह ना विश्वविद्यालय हो अथवा अमरकंटक विश्वविद्यालय उसने कभी कोई रुचि लेकर कोई अनुसंधान पूर्ण कार्य नहीं किया है और ना ही उसे प्रमाणित किया है। कि आखिर अगर कथित तौर पर शहडोल महाभारत कालीन विराटनगर नहीं है तो यह वघेल खंड के पूर्व कौन सा प्राचीन क्षेत्र का नगर है और किसकी विरासत थी..?
और कहां से आई लेकिन जो भी हो जैसा भी हो विरासत आध्यात्मिक क्षेत्र के मामले में शहडोल क्षेत्र जिसमें अनूपपुर और शहडोल शामिल है भरपूर धनाड्य रहा है और आजादी के बाद कम से कम शहडोल नगर में यानी सोहागपुर स्टेट के मामले में हम पाते हैं कि यहां पर या तो आदिवासियों की जमीनी ज्यादा रही हैं अथवा ट्रस्ट धार्मिक न्यास के रूप में जबरदस्त स्थापित रहे हैं इसमें अमरकंटक चंदिया उमरिया पाली ब्योहारी जैतपुर के प्राचीन संस्थाओं के अलावा शहडोल नगर में प्रमुख रूप से स्वामी अभयानंद जी का पंचायती मंदिर ट्रस्ट मोहन राम पांडे जी का मोहन राम मंदिर ट्रस्ट ,शहंशाह आश्रम का ट्रस्ट और बुढार चौराहे स्थित गणेश मंदिर ट्रस्ट भी इसमें एक रहा है जो अपने बचे खुचे स्वरूप में स्थापित है। तब यह समिति के रूप में स्थानीय नागरिकों की मेंबरशिप में हुआ करता था। जो देश की आजादी के बाद धार्मिक न्यास के रूप में कन्वर्ट हुआ।
अभी शहडोल का प्रशासन श्री रघुनाथ जी राम जानकी शिव पार्वती मोहन राम मंदिर ट्रस्ट शहडोल के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश 2012 का पालन कर पाने में बुरी तरह से असफल है कि उसके सिर पर एक और सर दर्द के रूप में बुढार चौराहा स्थित गणेश मंदिर ट्रस्ट का आदेश भी आ टपका है। देखना होगा कि प्रशासन अपनी कितनी क्षमता का उपयोग करके इसके साथ न्याय कर पता है..? क्योंकि इसमें भी कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष सुभाष गुप्ता का एक प्रमुख पक्ष है। जैसे मोहन राम मंदिर के मामले में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोगों का मोहन राम मंदिर में कब्जा करने की दृष्टिकोण से इस पर उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने में प्रशासन को रोकते रहे है। ताकि इसमें अराजक आतताई गुंडागर्दी करके रहने वाले पंडित पुजारी की पोल ना खुल जाए। क्योंकि भाजपा से जुड़े लोगों को लगता है यह उसके राजनीति के हिसाब से फायदेमंद है। ऐसा प्रशासनिक पक्ष का मानना है कि कहीं ना कहीं भाजपा के लोग हस्तक्षेप करते हैं इसलिए प्रभार नहीं हो पा रहा है और इसीलिए 12 वर्ष बाद भी अभी तक उसका प्रभार मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश में गठित स्वतंत्र समिति को प्रशासन दिला पाने में असफल रहा है। परिणाम स्वरूप मंदिर ट्रस्ट में लगातार अराजकता बनी हुई है हालात इतने गंदे हैं की हाल में हुए लक्ष्मी नारायण यज्ञ के लिए भाजपा के संरक्षित पंडित-पुजारी ने अनुविभागीय अधिकारी सोहागपुर से अनुमति लेना भी उचित नहीं समझा और करीब 10 दिन चले महायज्ञ के नाम पर संग्रहीत लाखों रुपए का हेर फेर कर दिया। जिसका कोई हिसाब आयोजन समिति के पास नहीं है। ऐसा सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी से ज्ञात होता है। यह सुखद है की लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में कोई अनहोनी नहीं हुई अन्यथा किसकी जिम्मेदारी होती यह प्रशासन स्पष्ट तौर पर नहीं बता पाता। क्योंकि शहडोल प्रशासन को आयोजन समिति ने कोई तवज्जो ही नहीं दी। सब ऊपर ही ऊपर खेल हो गया आयोजन समिति और पंडित पुजारी ने जमकर हेरा फेरी की कह सकते हैं। क्योंकि भाजपा के लोग इस खेल को खेल रहे थे। जो गैर कानूनी था ।
अब यही समस्या गणेश मंदिर ट्रस्ट में भी हो सकती है क्योंकि जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभाष गुप्ता वगैरह को हटा करके मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अन्य कमेटी वहां गठित कर दी है जब तक की वहां का मामला न्यायालय से निराकृत नहीं हो जाता है। यानी गणेश मंदिर ट्रस्ट भी इस बर्बादी में जा सकता है अगर सुभाष गुप्ता प्रभावशाली है तो..। क्योंकि उनके साथ नगर पालिका उपाध्यक्ष प्रवीण शर्मा उस तथाकथित कमेटी में सहयोगी हैं जिसे उच्च न्यायालय से अपदस्थ किया गया है ।जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के प्रकरण क्रमांक wp/ 8377/ 2020 में पारित आदेश दिनांक 16 जनवरी 2025 में न्यायालय के निराकरण तक न्यायालय के निर्देश में एक कमेटी गठित की गई है. अनुविभागीय अधिकारी सोहागपुर द्वारा जारी आदेश दिनांक 28 जनवरी 2025 के अनुसार गणेश मंदिर बुढार रोड के प्रबंधन के लिए एसडीओ लोक निर्माण विभाग शहडोल, थाना प्रभारी कोतवाली शहडोल, राजस्व निरीक्षक सोहागपुर नंबर 1, सदस्य के रूप में काम करेंगे जबकि तहसीलदार सोहागपुर इस कमेटी की अध्यक्षता करेंगे।
अब देखना यही होगा की नई कमेटी पुरानी कमेटी से कोई प्रभार लेती है अथवा प्रभार को नजरअंदाज करके वर्तमान हालात में समस्त अधिकार के साथ गणेश मंदिर ट्रस्ट में अपना प्रबंधन चालू कर देती है। ज्ञातव्य है कि बुढार रोड शहडोल स्थित इंदिरा गांधी चौक के पास प्राचीन गणेश मंदिर समिति के रूप में स्थापित रहा किंतु इसमें संपत्ति संबंधी विवाद होने के कारण मामला उच्च न्यायालय में गया और वर्तमान समिति को अपदस्त मामले के निराकरण तक कर दिया गया है।स्मरणीय है कि इस मामले में विश्व हिंदू परिषद से जुड़े के शक्ति सिंह कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष सुभाष गुप्ता के विरुद्ध मोर्चा खोल रखे थे

