भाजपा दिल्ली की 70 में से 48 सीट पर निर्णायक बहुमत की ओर..

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नयी दिल्ली: 8 फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए शनिवार को आम आदमी पार्टी (आप) को राष्ट्रीय राजधानी की सत्ता से बाहर कर 27 साल बाद धमाकेदार वापसी की।आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री सौरभ भारद्वाज सहित सत्तारूढ़ दल के कई अन्य प्रमुख नेता चुनाव हार गए हैं।Atishi हालांकि, मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना कालकाजी विधानसभा सीट से जीत गई हैंदिल्ली की मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (आप) की नेता आतिशी ने शनिवार को विधानसभा चुनाव के जनादेश को स्वीकार करते हुए चुनाव परिणामों को एक ‘‘झटके’’ की तरह बताया, लेकिन भाजपा के खिलाफ पार्टी का संघर्ष जारी रखने का संकल्प लियाआतिशी ने कहा- “मुझ पर भरोसा दिखाने के लिए मैं कालकाजी के लोगों को धन्यवाद देती हूं। मैं अपनी टीम को बधाई देती हूं जिन्होंने ‘बाहुबल’ गुंडागर्दी, मारपिटाई का सामना करते हुए जमीनी स्तर पर मेहनत की और जनता के पास पहुंचे। बाकी दिल्ली का जनता का जनादेश है और मैं जनादेश स्वीकार करती हूं।”।भाजपा ने राष्ट्रीय राजधानी में ‘आप’ को हराकर एक बड़ी जीत हासिल की है और वह 26 वर्षों से अधिक समय के बाद दिल्ली में सरकार बनाने के लिए तैयार है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक दोपहर एक बजे तक आए रुझानों में भाजपा दिल्ली की 70 में से 48 सीट पर निर्णायक बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है जबकि आप 22 सीट पर सिमटने के कगार पर है। एक बार फिर कांग्रेस राष्ट्रीय राजधानी में अपना खाता नहीं खोलती दिख रही है।अब तक के आंकड़ों के मुताबिक भाजपा को करीब 47 प्रतिशत जबकि आप को 43 प्रतिशत वोट मिले हैं।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव परिणमों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली की जनता ने झूठ, धोखे और भ्रष्टाचार के ‘शीशमहल’ को नेस्तनाबूत कर दिल्ली को ‘आप-दा’ मुक्त करने का काम किया है।

  जनादेश विनम्रता से स्वीकार, मैं भाजपा को उसकी जीत के लिए बधाई देता हूं : केजरीवाल नयी दिल्ली: (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार स्वीकार कर ली।दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा 47 सीट पर आगे चल रही है, जबकि आप को 23 सीट पर ही संतोष करना पड़ता दिख रहा है।‘आप’ प्रमुख केजरीवाल और पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया क्रमश: भाजपा के प्रवेश वर्मा और तरविंदर सिंह मारवाह से चुनाव हार गए।केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करता हूं और भाजपा को उसकी जीत के लिए बधाई देता हूं, उम्मीद करता हूं कि वह लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगी।’’पिछले दशक में आप सरकार द्वारा किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने कहा, ‘‘हमने दिल्लीवासियों को राहत देने के लिए शिक्षा, पानी, बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बहुत काम किया है।’’उन्होंने कहा, ‘‘अगले पांच साल में हम न केवल रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे बल्कि दिल्ली की जनता के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे।’’  केजरीवाल को हराने वाले BJP के Parvesh Verma के पास कितनी है धन-दौलत, यहां जानें  भाजपा के प्रवेश वर्मा  से कड़ी टक्कर मिली थी. केजरीवाल इस सीट से लगभग 4,000 वोटों से हार गए हैं और प्रवेश ने जीत हासिल कर ली है चुनाव नामांकन में बताया गया कि प्रवेश वर्मा की पत्नी स्वाति सिंह की कुल संपत्ति 24.4 करोड़ रुपये है, जिससे उनकी कुल घोषित संपत्ति 113 करोड़ रुपये है. साथ ही वित्तीय निवेशों में 52.75 करोड़ रुपये के शेयर और बॉन्ड शामिल हैं. वहीं प्रवेश वर्मा के पास टोयोटा फॉर्च्यूनर, टोयोटा इनोवा और महिंद्रा एक्सयूवी सहित लग्जरी कारें हैं. उनके पास 8.25 लाख रुपये मूल्य का 200 ग्राम सोना भी है.

दिल्ली में आप की हार पूरे विपक्ष के लिए झटका: योगेंद्र यादवYogendra Yadav नयी दिल्ली:  (भाषा) स्वराज इंडिया पार्टी के सह-संस्थापक और चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव ने शनिवार को कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) की हार न केवल पार्टी के लिए बल्कि पूरे विपक्ष के लिए झटका है। उन्होंने कहा कि नतीजों से पार्टी के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि अब यह केवल पंजाब तक ही सीमित रह गयी है।आप के संस्थापक सदस्यों में से एक यादव को 2015 में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। यादव ने कहा कि यह उन सभी लोगों के लिए भी झटका है जो देश में वैकल्पिक राजनीति का सपना देखते थे।

 ये दोनों पार्टियां साथ मिलकर लड़तीं तो क्या तस्वीर बदल जाती या नहीं बदलती. कांग्रेस और आप ने दोनों ने दिल्ली चुनावों में एक दूसरे के खिलाफ पूरी तल्खी दिखाई. पूरी दुश्मनी के साथ चुनाव लड़ा. पहले हरियाणा विधानसभा चुनावों में इन दोनों पार्टियों ने गठबंधन को तोड़कर अलग चुनाव लड़ा तो अब दिल्ली में भी यही दिखा.तो क्या ये गठबंधन तोड़ना दोनों के लिए फायदेमंद रहा या नुकसानदायक. अगर हम आंकड़ों और वोट शेयर की बात करें तो जाहिर है कि जो तस्वीर हरियाणा चुनावों में दोहराई गई वैसा ही दिल्ली में भी हुआ. यानि दोनों को अलग अलग लड़ने का नुकसान हुआ. अगर वो साथ मिलकर लड़ते तो हरियाणा में भी तस्वीर अलग होती .

कांग्रेस ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की पुष्टि नहीं बल्कि अरविंद केजरीवाल और आप पर जनमत संग्रह हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “आखिरकार, 2015 और 2020 में प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के चरम पर, आप ने दिल्ली में निर्णायक जीत हासिल की थी। यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री की नीतियों की पुष्टि होने के बजाय, यह वोट अरविंद केजरीवाल की छल, कपट और उपलब्धियों के अतिरंजित दावों की राजनीति को खारिज करता है।” अगर भारत ब्लॉक को वापस उछालना है, तो उसे व्यक्तिगत मतभेदों और महत्वाकांक्षाओं को अलग रखना होगा और लोकसभा चुनावों की दौड़ में दिखाई गई एकजुटता और समझ दिखानी होगी। जब तक वह ऐसा नहीं करता, तब तक भाजपा मजबूती से सत्ता में है।

 


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