12 साल से भटक रही है हाईकोर्ट आदेश की आत्मा…। मोहनराम मंदिर बक्फ प्रॉपर्टी भाजपा नेताओं के षड्यंत्र का शिकार..-( त्रिलोकीनाथ).

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न्याय के लिए 12 साल से भटक रही है हाईकोर्ट आदेश की आत्मा।

मोहन राम मंदिर बक्फ प्रॉपर्टी भाजपा नेताओं के षड्यंत्र का शिकार…

शहडोल।    जहां-जहां तानाशाह हिंदू समाज का दबदबा है वहां-वहां वक्फ बोर्ड कायम है यह अलग बात है कि हम अपनी कायरता को योग्यता के रूप में “जोर से बोलो जय श्री राम” के भीड़ भारी शोरगुल में उसे भुलाए रखते हैं।लेकिन खबर यह है कि अब इसमें सरकारी आदमी जो सदस्य हैं उनके ऊपर भी 8 से 10 लाख रुपए भ्रष्टाचार करने के आरोप लगे हैं लेकिन इसका निराकरण तभी संभव है जब कलेक्टर स्वयं ईमानदारी से के साथ इस पूरे प्रकरण की मॉनिटरिंग करें तो सवाल यह है कि क्या दो दशक से स्थापित कथित हिंदू राज्य के कलेक्टर में यह साहस है कि वह शहडोल के मोहन राम मंदिर को हिंदुओं का वक्फ बोर्ड बनने से रोक सके…                                                                                       ( त्रिलोकीनाथ)

हाल में शोषण व अन्याय का प्रतीक बताकर भारतीय संसद ने वक्फ बोर्ड में संशोधन कर उम्मीद की नई किरण को हवा दी है.. यह अलग बात है कि मुस्लिम समुदाय सहित सहित विपक्षी पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं। ऐसे में शहडोल के जिला न्यायालय के सामने एक मदरसा है बगल में कब्रिस्तान है कहते हैं यह वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी है चलो ठीक है। इसी तरह शहडोल में गांधी चौक से इंदिरा गांधी चौक ,बुढाररोड तक सतना जिले के ग्राम असरार के निवासी मोहन राम पांडे द्वारा करीब 125 साल पहले अपनी निजी संपत्ति दान ( वक्फ )की थी। शहर के मध्य में स्थित करीब 17 एकड़ के मंदिर समिति का नाम था रघुनाथ जी मंदिर। इसकी संपत्ति अंश भाग में स्थित तालाब पर पूर्वी किनारे में ईदगाह (कब्रिस्तान) बना, अब कहते हैं वह वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी है।तब इसके दक्षिणी किनारे में पाकिस्तान से आए शरणार्थी सिंधियों ने एक छोटी सी पाठशाला खोली जो अब डबल स्टोरी का बड़ा धर्मशाला बन गया। अब दोनों ने मिलकर मोहन राम मंदिर के अधिकार क्षेत्र की कब्जे दखल की तालाब के अंदर कब्ज़ा कर जमीन को हथिया लिया। वह अलग बात है कि वहां तालाब था तो पूरा कब्जा नहीं कर पाए। किंतु तालाब को जरूर अतिक्रमण कर उसे नष्ट करने का काम किया। जो शहडोल शहर का सर्वाधिक मल युक्त केंद्रहै।

वर्तमान में दो चीज पर्यायवाची रूप से चल रही है मध्य प्रदेश में मौसमी तरीके से पानी की समस्या को लेकर “जल गंगा संवर्धन योजना” चर्चा में भी है ।इसलिए आनंद के लिए कुछ देर के लिए सही हम मोहन राम मंदिर को मोहन राम मंदिर बक्फ बोर्ड कहेंगे और जिला न्यायालय के सामने जो मदरसा है उससे संबंधित बक्फ बोर्ड को मदरसा ट्रस्ट कहेंगे।इस संबंध दो विषयों पर चर्चा करना मुनासिब होगा। पहले मदरसा ट्रस्ट से कटनी-शहडोल मार्ग निकल सके और आसपास दोनों तरफ मदरसा ट्रस्ट की ही जमीन है। इसलिए मदरसा के पीछे एक जमीन जो नया गांधी चौक के प्रसिद्ध नागरिक गिरीश चंद्र घई है की बड़ी जमीन थी जो सड़क से लगी थी किंतु मदरसा ट्रस्ट ने कटनी-शहडोल सड़क का एप्रोच रास्ता बंद कर दिया। यह कह के कि यह जमीन मदरसा की है। उस जमीन केआसपास कोई जमीन नहीं थी जिससे वह अपना निकास का रास्ता किसी भी सड़क मार्ग तक पहुंच पाते हैं। जो बमुश्किल सड़क से 60-70 फीट दूरी पर है। इसलिए कहते हैं कि उस जमीन को औने-पौने दाम में मदरसा ट्रस्ट से संबंधित व्यक्तियों को दबाव में आकर, ब्लैकमेल होकर अथवा लाचार वृद्ध नागरिक होने के कारण भारतीय संविधान के स्वतंत्रता के अधिकार वहां खत्म हो जाने की स्थिति में महसूस कर अपनी जमीन कौड़ियों के दाम बेचनी पड़ी।
सामने जिला न्यायालय है किंतु उन्हें कोई न्यायालय से कोई ट्रस्ट नहीं था क्योंकि जिंदगी में उम्र कम है। कि मदरसा ट्रस्ट से न्याय दिला सके। कि आप स्वतंत्र देश के नागरिक हैं आप स्वतंत्रता से अपनी जमीन में रह सकते हैं अथवा बेच सकते हैं। यह पारदर्शी व्यवहार जिला न्यायालय के सामने होता रहा। जिसे पारदर्शी अन्याय की संज्ञा दी जा सकती है।
ऐसे में संसद में पारित वक्फ बोर्ड संशोधन उम्मीद का रास्ता दिखा सकती है इसमें कोई शक नहीं..। किंतु 20 साल से मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का शासन है बावजूद इसके 2012 में उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा आदेशित मोहन राम पांडे की करीब सवा सौ साल पहले वक्फ(दान)सुदा संपत्ति जो कटनी और शहडोल में मिलाकर करीब पौने दो सौ एकड़ की बताई जाती है।
स्वर्गीय मोहन राम पांडे ने तब कटनी और शहडोल के लोगों पर भरोसा करके 1911 में एक विलेख के जरिए अपने सनातन धर्म के तहत संपत्ति को वक्फ किया था। यह अलग बात है कि आजादी के पहले ही लोगों ने इस वक्फ सुदा आरजी पर सही प्रबंधन नहीं किया परिणाम स्वरुप आजादी के बाद जो भ्रष्टाचार की स्वतंत्रता मिली उसमें मुसलमानों ने, सिंधियों ने और हिंदुओं ने मिलकर इसे नष्ट करने का काम किया। तमाम न्यायालय विवादों से निकलकर वर्तमान में 2012 में हाई कोर्ट मध्य प्रदेश में इस सनातन की आराजी के प्रबंधन के लिए विवादित पक्षकारों को दूर करके एक स्वतंत्र कमेटी का गठन किया जिसे 2013 में संपूर्ण प्रभार लेकर के इसे व्यवस्थित करना था। तब तक हिंदुओं का रामराज्य भी आ गया था उसे यह राम मंदिर की संपत्ति भा गई थी जैसे मुसलमानों को भाई थी उसमें अपना भ्रष्टाचार और बंदर बांट के लिए मजहबी लोगों के साथ मिलकर एक षड्यंत्र करते हुए स्वतंत्र कमेटी को प्रभार नहीं देने दिया और जमकर भ्रष्टाचार का बंदरबांट किया । इस तरह स्वतंत्र कमेटी के सदस्य बन सतत युद्ध में भारतीय जनता पार्टी के दो जिला अध्यक्ष अपना जीवन न्योछावर कर चुके हैं और परिणाम स्वरूप आज 12 साल बाद भी हाई कोर्ट का आदेश अपने न्याय के लिए ठोकरे खा रहा है । क्योंकि न्याय व्यवस्था में रहते हैं आदेश तो हाई कोर्ट कर देती है लेकिन इसकी स्वयं संज्ञान लेकर मॉनिटरिंग नहीं करती बस यही योग्यता हिंदू मजहब के जुड़े लोगों को पारदर्शी तरीके से 12 साल से इस मोहन राम मंदिर में लूटपाट करने का जरिया बन गया।
प्रशासन का कहना है हिंदुओं के ठेकेदार राजनीतिक दल प्रभार नहीं सौंपने दे रहे हैं क्योंकि उसमें तमाम भ्रष्टाचार के अलावा पारदर्शी तरीके से मुसलमान का और सिंधियों का अतिक्रमण हिंदुओं की वोट बैंक का रक्षा का कारण बनता है और अगर भगवान राम मंदिर को हाईकोर्ट न्याय दिलाता है प्रभार देकर तो कई हिंदू मजहब के लोग भ्रष्टाचार के समंदर में गोते लगाते नजर आएंगे इसमें कोई शक नहीं है इसलिए पारदर्शी तरीके से हाई कोर्ट के आदेश को पालन नहीं करने दिया जा रहा है और यही कारण है की इसे भी वक्फ सुधा प्रॉपर्टी के रूप में अखबार को अपने खोजी रिपोर्टिंग में एक आंकड़े के सहित बढ़ा देना चाहिए यह अलग बात है कि तमाम सनातन हिंदुओं की धार्मिक केन्द्रों में आतताई भ्रष्टाचारी हिंदू प्रशासन के साथ उसकी उदारवादी चेहरे को लेकर अपना कब्जा बनाए हुए हैं और उनका विकास लोकहित में शून्य के बराबर है यह तो हाईकोर्ट के संरक्षण में पारदर्शी भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण के रूप में मोहन राम मंदिर स्थापित हो गया है लेकिन वास्तव में जहां-जहां तानाशाह हिंदू समाज का दबदबा है वहां-वहां वक्फ बोर्ड कायम है यह अलग बात है कि हम अपनी कायरता को योग्यता के रूप में “जोर से बोलो जय श्री राम” के भीड़ भारी शोरगुल में उसे भुलाए रखते हैं।
लेकिन खबर यह है कि अब इसमें सरकारी आदमी जो सदस्य हैं उनके ऊपर भी 8 से 10 लाख रुपए भ्रष्टाचार करने के आरोप लगे हैं लेकिन इसका निराकरण तभी संभव है जब कलेक्टर स्वयं ईमानदारी से के साथ इस पूरे प्रकरण की मॉनिटरिंग करें तो सवाल यह है कि क्या दो दशक से स्थापित कथित हिंदू राज्य के कलेक्टर में यह साहस है कि वह शहडोल के मोहन राम मंदिर को हिंदुओं का वक्फ बोर्ड बनने से रोक सके, विगत 12वर्ष से तो यही प्रमाणित हुआ है कि प्रशासन उतना ही भ्रमित और दलित तथा कुचला हुआ है जितना की हिंदू समाज भ्रमित और दलित बनाया जा रहा है वैचारिक तौर पर तो चलो देखते हैं इस मोहन राम मंदिर की वक्फ प्रॉपर्टी को तथाकथित हिंदुओं के कब्जे से प्रशासन मुक्त कर पता है या नहीं….?
इसके पहले कि वह वक्फ संपत्तियों के आंकड़े जारी करें उन्हें हाई कोर्ट के आदेश जो 12 साल से न्याय की भीख मांग रहा है न्याय देना ही चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से मध्य प्रदेश शासन का जल गंगा संवर्धन योजना भी जमीन पर जीवित दिखाई देगी कम से कम मोहन राम पांडे की दोनों तालाबों को सुरक्षा मिलेगी साथ ही मोहन राम पांडे कि वक्त सजा आराजी,कटनी के तालाब भी आत्महत्या करने से बचाए जा सकते हैं। अगर बचे हो तो.. क्योंकि वहां भाजपा विधायक संजय पाठक अभी भी डांस की भाव-भंगिमा में नाचते दिखाई देते हैं तो डर भी लगता है कि यह भी कहीं “जोर से बोलो जय श्री राम.. जय श्री राम; का डांस बनकर न रह जाए…


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