कांग्रेस का अहमदाबाद अधिवेशन पारित; भाजपा-आरएसएस का ‘छद्म राष्ट्रवाद’ विभाजनकारी

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  कांग्रेस ने अहमदाबाद अधिवेशन में सबको न्याय दिलाने के संकल्प वाला 'न्यायपथ  प्रस्ताव' किया पारित   अहमदाबाद में कांग्रेस पार्टी का अधिवेशन में जाप कर ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई वह कांग्रेस ने अहमदाबाद अधिवेशन में प्रस्ताव पारित करके कहा कि भाजपा आरएसएस का छद्म राष्ट्रवाद विभाजनकारी है इस पर सतर्कता जरूरी है। दैनिक जनसत्ता लिखता है कांग्रेस ने अपने अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में बुधवार को कहा कि उसका राष्ट्रवाद समाज को जोड़ने वाला है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का छद्म राष्ट्रवाद’ लोगों को विभाजित करना चाहता है।
पार्टी ने अहमदाबाद साबरमती नदी के तट पर आयोजित अधिवेशन में पारित प्रस्ताव ‘न्याय पथ’ में राष्ट्रवाद और कई अन्य
बिंदुओं को लेकर भाजपा और आरएसएस को घेरा है। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं, कार्य समिति के सदस्यों, कई वरिष्ट नेताओं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के 1700 से अधिक सदस्यों की उपस्थिति में दो महत्त्वपूर्ण प्रस्तावभी पारित किए गए, जिनमें एक राष्ट्रीय मुद्दों और दूसरा गुजरात पर केंद्रित रहा। प्रस्ताव में कहा गया है कि राष्ट्रवाद के मायने देश कीभू-भागीय अखंडता तो है ही, पर इस महान भूभाग में रहने वाले लोगों का सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक सशक्तीकरण भी है।
कांग्रेस ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रवाद का अर्थ सभी देशवासियों के लिए समान न्याय की अवधारणा है, वंचितों पीड़ितों-शोषितों के अधिकारों की रक्षा व उत्थान है, सद्भावना और भाईचारे की डोर में देश को बांधना है तथा भारत के बहुलतावादी और उदारवादी आचार, विचार और व्यवहार से हैं। कांग्रेस का राष्ट्रवाद समाज को जोड़ने का है। भाजपा-
आरएसएस का राष्ट्रवाद समाज को तोड़ने का है। कांग्रेस का राष्ट्रवाद भारत को अनेकता को एकता में पिरोने का है। भाजपा-आरएसएस का राष्ट्रवाद भारत की अनेकता को खत्म करने का है।’ कांग्रेस का राष्ट्रवाद देश की साझी विरासत में निहित है और भाजपा-आरएसएस का राष्ट्रवाद पूर्वाग्रह से ग्रसित है। कांग्रेस ने कहा कि जिन संगठनों ने ‘स्वतंत्रता संग्राम’, विशेषतः ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का विरोध किया, वही आज राष्ट्रवाद के प्रमाणपत्र बांटने का ठेका लिए हुए हैं। कांग्रेस के प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि भाजपा-आरएसएस का छद्म राष्ट्रवाद सिर्फ सत्ता का अवसरवाद है।
उनकी प्राथमिकता राष्ट्रीयता नहीं, सिर्फ सत्ताप्रियता है। वो सत्ता को हथियाने व बरकरार रखने के लिए देश को धर्म, जाति, क्षेत्रवाद, भाषा, पहनावा, तथा खान-पान में बांट रहे हैं। दैनिक जनसत्ता के अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वक्त संशोधन विधेयक धर्म की स्वतंत्रता पर हमला है और संविधान विरोधी है राहुल गांधी कहते हैं की रस से जुड़ी पत्रिका ऑर्गेनाइजर में ईसाइयों की भूमि पर भूमि को निशाना बनाने की बात की गई है। आगे सिखों के समुदाय के साथ भी ऐसा होगा उन्होंने कहा है भाजपा नफरत की दुकान चलती है हम मोहब्बत की दुकान खोलकर न्याय का हिंदुस्तान बनाएंगे जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट कहा है की सट्टा रोड दल ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है जिससे चुनाव में उसे फायदा और विपक्ष को नुकसान हो रहा है उन्होंने कहा मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जो लोग पार्टी में काम में मदद नहीं करते उन्हें आराम करने की जरूरत है उन्हें सेवानिवृत हो जाना चाहिए अमेरिका के 26% टैरिफ शुल्क के संबंध में उन्होंने कहा सरकार ने इस विषय को संसद में उठाने नहीं दिया।


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