संविधान;किरण टॉकीज का दफन हो चुका जल स्रोत..? (त्रिलोकी नाथ)

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विक्रमादित्य का न्याय; किरण टॉकीज का दफन हो चुका जल स्रोत..? (त्रिलोकी नाथ)

पेसे से वकील रहे और वर्तमान में भारत के उपराष्ट्रपति हैं जगदीप धनकड़ जी भोपाल में कह रहे थे विक्रमादित्य का युग आ रहा है तो हमें यकीन करना पड़ा कि वह सच ही बोल रहे होंगे लेकिन जब शहडोल में हम देखते हैं की उन भाजपा सरकार जोर-जोर से जल गंगा संवर्धन अभियान का ढिंढोरा पीट रही है और काम जमीनी धरातल पर कुछ इस प्रकार से है की शहडोल के मोहन राम मंदिर वक्फ प्रॉपर्टी गत 12 वर्षों से सिर्फ इस बात के लिए लटक रहा है क्योंकि भारत के उच्च न्यायालय जबलपुर का आदेश का क्रियान्वयन करने में प्रशासन हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है ।                                                                                              (त्रिलोकी नाथ)

     ऐसा नहीं है की इस मंदिर कमेटी के लिए जो स्वतंत्र समिति बनाई गई है उसमें कोई दोयम दर्जे के लोग सदस्य बनाए गए थे, अच्छा खासा प्रशासनिक तहसीलदार सोहागपुर अमला इसमें सदस्य है जो रोज बरोज कई न्याय करता रहता है। यही नहीं भाजपा के दो दो जिला अध्यक्ष एक दबंग दिखने वाले तत्काललीन जिला अध्यक्ष मार्तंड त्रिपाठी और एक पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव भी इसके सदस्य रहे। किंतु इन लोगो की मिला करके भी इतनी क्षमता या ताकत नहीं थी कि वह विभिन्न धार्मिक माफियाओं से जो हिंदू भी थे, मुस्लिम भी थे और सिंधी भी थे उनसे मुकाबला करने के लिए हाई कोर्ट के आदेश को क्रियान्वयन करवा पाते और समय साल बीतता चला गया। इस तरह एक प्रकार से कह सकते हैं दोनों भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष इतने कमजोर थे कि वह अपना जीवन कॉल में उच्च न्यायालय का आदेश का पालन नहीं करवा पाए और जीवन समाप्त हो गया। दोनों जिला अध्यक्ष अब इस दुनिया में नहींहै। किंतु हाई कोर्ट के आदेश पालन न होने से भगवान राम को समर्पित स्वर्गीय मोहन राम पांडे की वक्फआराजी को भी नहीं बचा पाए। तो कह सकते हैं दोनों जिला अध्यक्ष धार्मिक माफिया के सामने सरेंडर हो गए..? या फिर कर्तव्य निष्ठ नहीं थे।
अगर इतनी पावरफुल लोग मिलकर भी हाई कोर्ट के आदेश का पालन कर नहीं सके तब इस वक्फसुदा आराजी में निर्मित तालाबों को रक्षा कर पाना असंभव दिखता है, एक तालाब तो करोड़ों की भ्रष्टाचार का अवसर बनता हुआ किसी तरह अपने अस्तित्व को बचाया है। किंतु मूल तालाब जो दूसरे तालाब का आधार है उसे तालाब को अतिक्रमणकारियों को लूटने के लिए छोड़ दिया गया। यह अलग बात है कि सदस्यों को ऐसा करने के लिए भ्रष्टाचार का क्या मूल्य मिला…? ऐसे ही शहडोल की कई तालाब और जल स्रोत इस नगर को शानदार नगर बनाते थे।

किंतु समय बदल गया है इसलिए लगता है की जल गंगा संवर्धन अभियान मोहन राम तालाब में आकर आत्महत्या कर लेता है फिर भी उपराष्ट्रपति अगर भोपाल में यह आश्वासन देते हैं तो विश्वास करना ही चाहिए.. और उनके विश्वास को जिंदा बनाए रखने के लिए शहडोल के वर्तमान भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अमिता चपरा के परिवारवालों द्वारा किरण टॉकीज के पास स्थापित जल स्रोत को भाठ करके उस जमीन पर कब्जा कर लिया। जो वास्तव में उनकी नहीं थी। ऐसा शहडोल के कमिश्नर ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कहने को तो उन्होंने यह भी बहुत पहले कह दिया था कि इस शासकीय अभिलेख दर्ज कर दिया जाए लेकिन कमिश्नर कोई उपराष्ट्रपति श्री धनखड़ का विक्रमादित्य तो थे नहीं इसलिए उनका आदेश इस तरह इस किरण टॉकीज की बड़ा जल स्रोत बावड़ी में आत्महत्या कर लिया और दफन हो गया जैसे इस जल स्रोत की दफन कर दिया गया है बावजूद शहडोल के कुछ सिरफिरे नागरिक उपराष्ट्रपति की बातों को पूर्वानुमान लगाते हुए विश्वास कर रहे हैं कि बिक देते का न्याय जिंदा है और लोगों को मिलेगा इसलिए उन्होंने गांधीवादी रास्ते से जल गंगा संवर्धन अभियान के किरण टॉकीज से जल स्रोत निकालने के लिए कई दिनों से क्रमिक अनशन कर रहे हैं इसके पहले भी कलेक्टर शहडोल से मिलकर ज्ञापन देकर जल स्रोत और लोकहित की इस जमीन को सुरक्षित करने कीमांग कर रहे। यह अलग बात है कि प्रशासन की प्राथमिकता में किरण टॉकीज का बगल वाला जल स्रोत नहीं रहा जिससे उन्हें क्रमिक अनशन कर अपर कलेक्टर के आदेश का पालन करने के लिए आंदोलन होना पड़ा सामान्य तौर पर नागरिक समाज यह समझता है कि इस प्रकार के जल स्रोतों के उत्थान आदि का काम सरकारी सांसद विधायक मंत्री संत्री और अफसर का है इसलिए वह नजर अंदाज करते हैं यही कारण है कि चाहे अपर कमिश्नर का आदेश ऑन या फिर हाई कोर्ट जबलपुर का आदेश हो दोनों शहडोल में आकर आत्महत्या के लिए रास्ते तलाश में लगते हैं उनका पालन ना हो सके इसके लिए शासन और प्रशासन के लोग पूरी ताकत से उसे प्राथमिकता से हटाने का काम करते हैं इसलिए चाहे मोहन राम मंदिर का मूल तालाब हो जो आत्महत्या कर दफन होने हो जाने के लिए शहर का सर्वाधिक बड़ा माल जल का केंद्र बना हुआ है या फिर अतिक्रमणकारियों की पूरी निष्ठा के साथ रातों-रात किरण टॉकीज के बगल वाली बावली सफलता के साथ नष्ट कर दी गई हो इसलिए लगता है कि उपराष्ट्रपति कुछ ज्यादा बोल गए उन्हें शहडोल में आकर देखना चाहिए की विक्रमादित्य नाम की चिड़िया शहडोल में नहीं उड़ाती यहां उनका न्याय आता ही नहीं है हो सकता है भोपाल में और दिल्ली में बैठकर वकील साहब जो उपराष्ट्रपति बन गए हैं उन्हें संविधान जिंदा दिखाई देता हो शहडोल में ऐसा कुछ फिलहाल तो नहीं दिखता बावजूद इसके अपने स्वाभिमान और आजादी के लिए आंदोलित किरण टॉकीज के उन सभीनागरिकों का सम्मान इसलिए भी करना चाहिए क्योंकि वह उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ की बातों को की विक्रमादित्य का राज आएगा क्रियान्वयन करने के लिए क्रमिक अनशन कर रहे हैं।
खबर तो यह भी है की तहसीलदार सुहागपुर विद्या सिंह ने आश्वासन दिया है कि न्याय होगा उधर भोपाल में भी उपराष्ट्रपति ने भी आश्वासन दिया है की न्याय का राज आएगा तो हमें मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखने में क्यों कंजूसी करनी चाहिए हो सकता है धोखे से न्याय आ जाए जब औरंगज़ेब को जिंदा करके न्याय की आशा की जा रही हो, जब मस्जिदों के अंदर खुदाई करके खुद को ढूंढा जा रहा हो… तो शहडोल में अपर कलेक्टर के आदेश के बावजूद जल गंगा संवर्धन के लिए की खुदाई ना की जाए… थोड़ा आश्चर्य लगता है उम्मीद करना चाहिए जल्द विक्रमादित्य का न्याय शहडोल में देखने को मिलेगा और इसी आशा से आंदोलन हर आंदोलनकारी का मनोबल नागरिकों के लिए प्रेरणा का कारण बनेगा ऐसा समझना चाहिए..।


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