
विजयराघवगढ़ (कटनी)।
विजयराघवगढ़ क्षेत्र के वयोवृद्ध नागरिक संत हृदय स्वरूप जगदीश प्रसाद जी, “राजा जी”का निधन 17 अप्रैल को हो गया। उनका योगदान संकट मोचन मंदिर विजयराघवगढ़ की स्थापना और विस्तार में अहम भूमिका रही। लंबे समय से वे संकट मोचन मंदिर के नदी पार स्थित अपने गृह ग्राम बंजारी में निवासरत स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। 27 तारीख को राजा जी की दशगात्र एवं 30 तारीख को अक्षय तृतीया में त्रयोदशाह है। क्षेत्र में उनके निधन से उनके अपने लोगों के बीच में शोक की लहर है।
अपने हंसमुख एवं दयालु स्वभाव के कारण वह आमजन में लोकप्रिय थे। अपने संत रूप व्यक्तित्व के कारण उनकी आध्यात्मिकता लोगों को आकर्षित करती रहती थी। राजा जी के समस्त दाह संस्कार संबंधी कार्य उनके पुत्रवत अरुण मिश्र व उनकी पुत्री सरस्वती तथा नाती के द्वारा संपन्न कराया गया।

