प्रत्यक्षं किं प्रमाणं….. 26 लोगों की आतंकवादी द्वारा की गई हत्या का 26 दिन बाद क्या रहा क्लाइमैक्स. (त्रिलोकी नाथ)

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प्रत्यक्षं किं प्रमाणं….. 26 लोगों की आतंकवादी द्वारा की गई हत्या का 26 दिन बाद क्या रहा क्लाइमैक्स…

  कश्मीर में पर्यटकों पर आतंकी हमला,26 की मौत - Navsatta  पूर्व सेवा प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने शीज फायर पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत की थी कि “युद्ध ना तो रोमांटिक होता है ना ही बॉलीवुड की कोई फिल्म है..”.किंतु पूरी फिल्मी अंदाज में युद्ध के बाद घटनाएं राजनीति में दिख रही थी… की किस प्रकार से जस्टिस, न्याय के लिए संघर्षरत है और सत्ताधारी नेता अपराधी को बचाने के लिए संघर्षरत हैं ।
बात यहां तक होती तो ठीक है चाटुकारता और जी हुजूरी की राजनीतिक संस्कार अनुशासन वध नेताओं की श्रेणी में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री देवड़ा भी नशे में बेवड़े की तरह भाषा का इस्तेमाल कर बैठे। जो मध्य प्रदेश की राजनीतिक संस्कार में सोने में सुहागा लगाती दिखाई दे रही थी, कह सकते हैं की कोढ़ में खाज की तरह तकलीफ देने वाली साबित हो रही थी।पहलगाम में 22 फरवरी को 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या कथित चार आतंकवादियों द्वारा बड़े फिल्मी अंदाज में चुन चुन कर कर दी गई। 26 दिन बीत गए हैं इस आतंकवादी हत्याकांड को चारों आतंकवादी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं। इसके बाद इंडियन पॉलिटिक्स में तूफान आता है प्रधानमंत्री अपनी यात्रा छोड़कर कुछ देर के लिए दिल्ली आते हैं और इसके बाद वे बिहार में अपनी राजनीतिक सभा के लिए चले जाते हैं। वहां वह बिहार के मुख्यमंत्री के साथ हंसते खिलखिलाते वीडियो में वायरल हो जाते हैं। भारत की यह तस्वीर विरोधाभास और आक्रोश के संघर्ष की एक झलक है।                                                                 
(त्रिलोकी नाथ)
26 नागरिकों की हत्या के बाद ऐसी भी आवाज़ें भी हमारे नेताओं द्वारा कही सुनाई दी गई की, मिट्टी में मिला देंगे….. चुन चुन कर उन्हें मारेंगे…. जिन्होंने इस आतंकवादी घटना को अंजाम दिया है आदि आदि ….चुन चुन कर मारने के लिए एक सर्वदलीय राजनीतिक बैठक भी होती है। जिसमें प्रधानमंत्री उपस्थित नहीं रहते।विपक्ष इस आतंकवादी घटना के लिए बदला लेने हेतु जिम्मेदार आतंकवादी और उनके संरक्षकों आतंकवादी आकाओं जो पाकिस्तान में अथवा पीओके में रहते हैं के खिलाफ फ्री हैंड सेना कार्यवाही के लिए भारत सरकार को अपना बिना शर्त समर्थन दिया।भारत सरकार ने सेना को कार्यवाही के लिए फ्री हैंड कर दिया । बनाई गई रणनीति के हिसाब से 7 मई से हमारे सेना अपनी गुणवत्ता, कार्य कुशलता और योग्यता का परिचय देते हुए पाकिस्तान के उन चिन्हित अड्डों को नष्ट किया जहां आतंकवादी ट्रेनिंग देने की गतिविधियां होती थी। पाकिस्तान ने हिमाकत की, इसे युद्ध के रूप में बदलने का काम किया। तो पाकिस्तान को भी मिसाल तौर पर उसके महत्वपूर्ण सेना ठिकानों और उड़ान केन्द्र को निशाना बनाया गया।
माहौल तड़ातड़ परिणाम मूलक कार्यवाही की तरफ बढ़ ही रहा था तभी अचानक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सूचना जारी की, कि उसने “सीजफायर” करवा भारत और पाकिस्तान के युद्ध में शांति के लिए काम किया है। और सीजफायर हो गया है…  भारत और पाकिस्तान में कुछ युद्ध में ठंडक दिखाई। बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से नहीं माना, कुछ जगह उछल कूद कर रहा था जिसका जवाब भारतीय सेना उसकी भाषा में दे रही थी।

इसके पहले हमारे सेना अधिकारी जो पहलगाम हमले में मृत् हो गए थे उधकी पत्नी हिमांशी एक सांप्रदायिकता के विरुद्ध शांतिपूर्णअपील और आतंकवादियों को पकड़ने की कार्यवाही के कथन पर सीजफायर से हताश भारत में “गुप्त रहने वाली डिजिटल ट्रोल आर्मी ने हिमांशी को बहुत ही अपमानजनक तरीके से पीड़ा पहुंचाते हुए उन्हें देश का गद्दार बताने में लग गए। जिस पर कोई कार्यवाही शासन स्तर पर नहीं हुई। अपनी शादी के 1 हफ्ते बाद पति के मृत्यु होने के शोक से पीड़ित इस महिला पर “डिजिटल ट्रोल आर्मी” का हमला पाकिस्तान के ऊपर किए गए हमले से “व्यक्तिगत जीवन में” बड़ा प्रहार था। शायद सीजफायर से उत्पन्न स्थितियों को डाइवर्ट करने के लिए इस संरक्षित “डिजिटल टोल आर्मी” ने धड़ाधड़ मिसाइल चला दी थी. उनकी मिसाइल सोशल मीडिया में उस भारतीय अधिकारी मिसरी पर भी चल रही थी जो सैन्य गतिविधियों की सूचनाओं देने के औपचारिक कर्तव्य से यह कह बैठे की सीजफायर हो गयाहै।
“डिजिटल ट्रोल आर्मी” को मालूम था कि सीजफायर परिणाम दायक सफलता की असफलता का प्रमाण पत्र है। इस अधिकारी पर सूचना देने के लिए उनकी लड़की और परिवार पर भी गाली गलौज जैसे अपमानजनक भाषा के साथ मिसाइल भरा सोशल मीडिया पर हमला कर दिया गया।इन गतिविधियों को देखते हुए पब्लिक के मानसिकता को परखने और शीज-फायर का एक पक्ष रखते हुए पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने के फैसले पर उठ रहे सवालों की आलोचना करते हुए कहा कि ‘‘युद्ध न तो रोमांटिक होता है और न ही यह बॉलीवुड की कोई फिल्म है।’’उन्होंने रविवार को पुणे में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यदि आदेश मिलेगा तो वह युद्ध के लिए तैयार रहेंगे, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता हमेशा कूटनीति रहेगी।उन्होंने कहा, “फिर भी लोग पूछ रहे हैं कि हमने अब तक पूरी ताकत से युद्ध क्यों नहीं किया। एक सैनिक के रूप में यदि आदेश दिया जाएगा तो मैं युद्ध में जाऊंगा, लेकिन वह मेरी पहली पसंद नहीं होगी।”जनरल नरवणे ने कहा कि उनके विकल्प कूटनीति, संवाद के माध्यम से मतभेदों को सुलझाना और सशस्त्र संघर्ष की नौबत न आने देना होंगे..

इसी दौर में कांग्रेस पार्टी सर्वदलीय बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप के दावों पर स्पष्टीकरण चाहती थी। ताकि राष्ट्रपति को सही जवाब दिया जा सके या इस विषय का निराकरण किया जा सके किंतु कांग्रेस और विपक्ष की नहीं सुनी गई। किंतु यह विवाद अपने परिणामों पर आता कि प्रधानमंत्री ने आम जनता के संबोधन में कुछ बातें साफ की.. उन्होंने कहा। भारत पर आतंकी हमला हुआ तो मुंह तोड़ जवाब देंगे कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा और तीसरी बात उन्होंने कही हम आतंक के सर परस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे।इसके साथ ही सीज फायर के बाद तिरंगा यात्रा आदि की तैयारी होने लगी ताकि उसमें “पॉलिटिक-आर्मी मिक्स वेज” पब्लिक को परोसा जा सके.. सेना के गौरव के नाम पर।
प्रधानमंत्री के सीज फायर के निर्णय को महान व्यक्ति बताने के चक्कर में मध्य प्रदेश के एक मंत्री और उपमुख्यमंत्री ने तो सारी हदें पार कर दी, उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी के नेता भी अपने हिसाब से वोट बैंक को तलाश में लगे।सब कुछ युद्ध के बाद आफ्टर साक की तरह अपने पॉलिटिकल इवेंट क्रिएट करने में लगे थे। इस सीजफायर के राजनीतिक निर्णय को विजय उत्सव में तब्दील करने के चक्कर में मंत्री विजय ने सभी मर्यादा तोड़ते हुए उन्होंने अपने ही संस्कार पूर्ण भाजपाई अंदाज में एक पब्लिक मीटिंग में भाजपा की कभी कथित तौर पर संस्कारिक प्रकोष्ठ की उषा ठाकुर की उपस्थिति में कह डाला कि, आतंकवादियों को उनके ही समाज के उनके बहन से जवाब दिलवाया गया है हमारे प्रधानमंत्री द्वारा.. उन्होंने बेहद गंदे तरीके से कहा कि आतंकवादियों ने कपड़े उतार कर लोगों की हत्या की है तो हमारे प्रधानमंत्री कपड़े तो उतर नहीं सकते आदि आदि…. कुल मिलाकर वह जो कह रहे थे वह भारतीय सेना में सैन्य कार्यवाही की संवाद कर रही दो प्रमुख महिलाओं में एक कर्नल सोफिया कुरैशी पर इशारा कर रहे थे कि वह आतंकवादियों की बहन थी।
इसे लेकर अच्छी खासी किरकिरी हुई, आक्रोश पूरे भारत में बढ़ता ही जा रहा था राजनीतिक निर्णय लेने में वोट बैंक आडे़ आ रहा था। परिणाम स्वरूप मध्य प्रदेश की हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश ही नहीं भारत के आम आदमियों और सभ्य समाज के नागरिकों की इज्जत बचाते हुए स्वतंत्र भारत के संवैधानिक भावनाओं का सम्मान किया और डबल बेंच ने ऑर्डर पास किया। मंत्री विजय शाह की टिप्पणियां अनुचित है इसलिए इनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही के लिए पुलिस चार घंटे के अंदर पुलिस प्राथमिक की दर्ज करें। किंतु मंत्री और सत्ता का दबाव इतना बड़ा था कि वह फिल्मी ड्रामा के अंदाज में रोमांटिक हो गया और उसका क्लाइमैक्स चलता रहा। हाई कोर्ट का और सत्ताधारी दल का कशमकश और कशिश के बाद रात के 11:00 बजे इंदौर के एक थाने ने में पुलिस ने मन मारकर अपराध आरोपी मंत्री जी के खिलाफ “श्री” संबोधित करते हुए पुलिस प्राथमिक की दर्ज की गई और दूसरे दिन न्यायालय में जब जानकारी दी गई हाई कोर्ट और सख्त हो गया तथा दर्ज की गई पुलिस प्राथमिक पर पुलिस को सख्त लहजे में कार्यवाही करने की ताकीद दी गई।
पूर्व सेवा प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने शीज फायर पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत की थी कि “युद्ध ना तो रोमांटिक होता है ना ही बॉलीवुड की कोई फिल्म है..”.किंतु पूरी फिल्मी अंदाज में युद्ध के बाद घटनाएं राजनीति में दिख रही थी… की किस प्रकार से जस्टिस, न्याय के लिए संघर्षरत है और सत्ताधारी नेता अपराधी को बचाने के लिए संघर्षरत हैं ।
बात यहां तक होती तो ठीक है चाटुकारता और जी हुजूरी की राजनीतिक संस्कार अनुशासन वध नेताओं की श्रेणी में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री देवड़ा भी नशे में बेवड़े की तरह भाषा का इस्तेमाल कर बैठे। जो मध्य प्रदेश की राजनीतिक संस्कार में सोने में सुहागा लगाती दिखाई दे रही थी, कह सकते हैं की कोढ़ में खाज की तरह तकलीफ देने वाली साबित हो रही थी।
MP के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के विवादित बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया. जबलपुर में सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवड़ा ने कहा, “पूरा देश, देश की सेना और सैनिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चरणों में नतमस्तक हैं.”हंगामा तो होना ही था क्योंकि सब फिल्मी ड्रामा की तरह किसी स्क्रिप्ट को रोल प्ले कर रहे थे या फिर कह सकते हैं कि वह अनुशासन वध संस्कार वादी राजनीतिक दल का मंचन कर रहे थे
अब बारी आई इस सब मामलों को कैसे डाइवर्ट किया जाए परिणाम स्वरूप तिरंगा यात्रा देश के अंदर लेकिन देश के बाहर दुनिया को समझने के लिए और समझाने के लिए भी एक सर्वदलीय सांसदों का दल 6-7 दलों के रूप में अलग-अलग राष्ट्र में जाकर अपनी बात रखेगा। इसके लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से उनके सांसदों की सूची मांगी गई। क्योंकि हमारे राजनेता भारत पाकिस्तान कि तनाव पूर्ण माहौल में थक गए थे, उन्हें रिलैक्स भी चाहिए था.. किंतु इसमें राजनीति भी होनी चाहिए थी इसलिए कांग्रेस ने भी अपनी जो सूची दी थी उससे हटकर भाजपा कि मोदी सरकार ने नया हंगामा खड़ा कर दिया। सब कुछ सूची समझी संयोजित मिसाइल की तरह था। उसने उन सांसदों को जोड़ा जिसकी सूची उन्हें नहीं दी गई थी. उसमें एक सांसद शशि थरूर ऐसे व्यक्ति थे जो जो कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष का चुनाव लड़े थे और चुनाव हार गए थे। लेकिन पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी के साथ केरल में एक मंच पर दिखे और उसे मंच को लेकर तब प्रधानमंत्री ने कहा था कि कुछ लोगों को तकलीफ हो सकती है..।
बता दें यह वही शशि थरूर है जिनकी कश्मीरी पत्नी के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तब कहा था कि वह “50 करोड़ की गर्लफ्रेंड है”.. और पत्नी की कथित हत्या की जांच आदि भी होती रही. केरल में शशि की उपस्थिति के बाद इस विदेश में सर्वदलीय सूची में नाम न होने के बाद भी शशि का नाम डाले जाने से विवाद खड़ा हो गया। यह पहलगाम हत्याकांड के शीज फायर का पहले पारदर्शी पॉलीटिकल मिसाइल कांग्रेस के ऊपर छोड़ा गया था।

शायद इसलिए मध्य प्रदेश के मंत्री और उपमुख्यमंत्री की सेना के ऊपर की गई अभद्र टिप्पणियों पर चर्चा कम हो। और इस पर चर्चा ज्यादा हो जबरदस्ती के इस विवाद ने पहलगाम आतंकवादी हत्याकांड और सीज फायर की बड़ी कार्यवाही के बाद भी हमलावर चार आतंकवादियों के ना तो हत्या किए जाने की खबर आई और ना ही उनकी गिरफ्तारी पर कोई चर्चा हुई। यही इस 26 लोगों की हत्या के बाद 26 दिन बाद रहस्य रोमांच और रोमांटिक बॉलीवुड फिल्म का क्लाइमैक्स बनकर उभरा है चाहे पूर्व सेवा प्रमुख जनरल नरवाने कितना भी कहें “युद्ध ना तो रोमांटिक होता है और ना ही बॉलीवुड की कोई फिल्म है” लेकिन भारतीय राजनीति अपने ही अंदाज में अपनी कार्यवाही को अंजाम देती है ‌ इसमें कोई शक नहीं। ठीक उसी तरह जैसे हमारे वीर सैनिकों की कार्यप्रणाली उनकी निर्भरता, उनकी गुणवत्ता और उनकी योग्यता उनकी आक्रामकता पर कोई संदेह नहीं वह बेहद गौरवशाली क्षण होते हैं जब भारतीय सेवा अपने हिसाब से अपनी कार्यवाही को अंजाम देती है।
लेकिन वर्तमान राजनीति जब अपनी कार्यवाही को अंजामदेती है तो कब “50 करोड़ की गर्लफ्रेंड का बॉयफ्रेंड साथ प्यारा लगने लगता है कहा नहीं जा सकता। शशि थरूर के प्रति भाजपा का प्यार, पहलगाम में आतंकवादी हमला में मारे गए 26 लोगों पर एक अपमानजनक समापन रहा। बावजूद इसके कि हमलावर आतंकवादी अब तक नहीं पकड़े गए…. और ऑपरेशन सिंदूर भी नहीं रोका गया ……..;देखते हैं, ऑपरेशन सिंदूर के जरिए हमारे राजनेता भारतीय महिलाओं के उजड़े हुए मांगों के सिंदूर पर अभी और क्या कार्यवाही और नीतिगत निर्णय लेते हैं… लेते भी हैं या नहीं… यह भी हमको देखना होगा, कि भारतीय राजनीति किस दिशा में काम कर रही है। 


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