
स्वतत्रंता आंदोलन में गौरवमयी संघर्ष की याद दिलाती है कोल जनजाति: जनजातीय कार्य मंत्री
भोपाल : बुधवार, जून 11, 2025
जनजातीय कार्य मंत्री ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है। प्रदेश की प्रमुख पिछड़ी जनजाति में कोल जनजाति तीसरी प्रमुख पिछड़ी जनजाति है। उन्होंने कहा कि कोल जनजाति स्वतत्रंता आंदोलन में गौरवमयी संघर्ष की याद दिलाती है। संघर्षमयी इतिहास, उनकी शैली और संस्कृति स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान के लिये जानी जाती है। मध्यप्रदेश में 10 लाख से भी ज्यादा कोल जनजाति के लोग निवासरत है। रीवा, सीधी, सिंगरौली, सतना, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिण्डौरी में मुख्यत: निवासरत है। बढ़ी आबादी कोल जनजाति केवल मध्यप्रदेश ही नहीं देश के उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्य में भी निवास करती है। यह खरवार समूह की एक प्राचीन जनजाति है। ये स्वयं को शबरी माता का वंशज मानते है। कोल शब्द कुल से निकला है, जो समस्त का रूप है।
कोविड-19 का नया स्वरूप सार्स-सीओवी-2 के प्राकृतिक विकास का हिस्सा: आईसीएमआर के पूर्व प्रमुख नयी दिल्ली: 11 जून (भाषा) भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पूर्व महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा है कि कोविड-19 का कारण बनने वाले वायरस के नए एक्सएफजी स्वरूप का उभरना सार्स-सीओवी-2 के प्राकृतिक विकास का हिस्सा है।भारत में इस स्वरूप से जुड़े 200 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। डॉ. भार्गव देश में कोविड-19 महामारी से निपटने में अग्रणी टीम का हिस्सा थे। उन्होंने कहा, ‘‘एक्सएफजी स्वरूप का उभरना सार्स-सीओवी-2 वायरस के प्राकृतिक विकास का हिस्सा है।’’
दिल्ली में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार, ‘रेड अलर्ट’ जारी नयी दिल्ली: 11 जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी भीषण गर्मी की चपेट में है और कई इलाकों में तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जिसके मद्देनजर भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दिल्ली के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है।
प्रधानमंत्री के 11 साल विफलताओं और जन विरोधी नीतियों का शानदार स्मारक हैं : कांग्रेस नयी दिल्ली: 11 जून (भाषा) कांग्रेस ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर सभी मोर्चों पर विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि इस सरकार के पिछले 11 साल विफलताओं और जन विरोधी नीतियों का “शानदार स्मारक” हैं।
सम्मान बहाल करने के लिए हस्तक्षेप करने का साहस करता है संविधान: न्यायमूर्ति गवई
लंदन: 11 जुलाई (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई ने यहां ऑक्सफोर्ड यूनियन में अपने संबोधन में कहा कि भारत का संविधान एक सामाजिक दस्तावेज है, जो यह दिखावा नहीं करता कि सभी समान हैं, बल्कि सत्ता को पुन:संतुलित करने और सम्मान बहाल करने के लिए हस्तक्षेप करने का साहस भी करता है।न्यायमूर्ति गवई ने मंगलवार को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में स्थित इस ऐतिहासिक संस्थान में ‘प्रतिनिधित्व से कार्यान्वयन तक: संविधान के वादे को मूर्त रूप देना’ विषय पर अपने संबोधन में नगरपालिका के एक स्कूल से लेकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक अपनी यात्रा का उल्लेख किया।

