जलगंगाअभियान से पुनर्जीवित  हुई बावड़ी और शहडोल में बाजार के अंदर बावड़ी की कर दी गई हत्या

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जलगंगाअभियान से पुनर्जीवित  बावड़ी’

भोपाल/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रारंभ किए गए जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत, भोपाल की ऐतिहासिक धरोहर ‘बड़े बाग़ की बावड़ी’ को एक नया जीवन मिला है। यह सफलता केवल जल 

संरचना के पुनरुद्धार की नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पर्यावरण संरक्षण दृष्टिकोण और जल संरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध नेतृत्व ने इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया है।नवाब वज़ीर मोहम्मद खान द्वारा करीब 200 वर्ष पूर्व निर्मित यह बावड़ी आकार में भोपाल की सबसे बड़ी बावड़ी है, जिसका कुल क्षेत्रफल 32 एकड़ और गहराई 60 फीट है। यह बावड़ी नवाब वज़ीर मोहम्मद खान और नवाब कुदसिया बेगम के मकबरों के मध्य स्थित है और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है।प्रशासन एवं नगर निगम भोपाल द्वारा इस बावड़ी की सफाई, सिल्ट हटाने, खरपतवार उन्मूलन, दीवारों और सीढ़ियों की मरम्मत, रंगाई-पुताई तथा सुरक्षा जाली लगाने जैसे कार्य तेज़ी से किए गए। लगभग 40 क्यूबिक मीटर सिल्ट हटाने और जल ग्रहण क्षमता को 2000 लीटर प्रति घंटा तक पहुँचाने के बाद, यह संरचना फिर से उपयोग में लाई जा रही है।

और शहडोल में बाजार के अंदर बावड़ी की कर दी गई हत्या

    भोपाल की बावड़ी को राज्य स्तर पर सजा करके शान वाहवाही लूट रही है अच्छी चीज है लेकिन शहडोल में जहां 84 दिन हो गए हैं एक जन आंदोलन को प्राचीन बावड़ी को बचाने के लिए वहां पर एक कुदाल भी नहीं चला… बल्कि देखा यह गया की बावड़ी को नष्ट करने वालों को कहीं ना कहीं संरक्षण मिला कानून के रूप में उन्हें बचाया गया. पूरा जल गंगा अभियान 3 महीने का खत्म हो गया और 3 महीने पहले से चल रही जन आंदोलन आज भी इस बावड़ी को बचाने के लिए आंदोलन रत है तो क्या माना जाए की “अंधा बांटे रेवड़ी चिन्ह-चिन्ह कर देय” के अंदाज में सरकारी संरक्षण बावड़ी के लिए चिन्हित किया जा रहा है। अन्यथा कोई कारण नहीं जब तहसीलदार सोहागपुर ने भी मोहर लगा दिया है। की बावड़ी के पास अतिक्रमण किया गया है तो स्वाभाविक है की बावड़ी को ढकने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होना चाहिए था और बेहतर होता आपकी जिन्होंने इस अतिक्रमण के लिए भाठ दिया है उन्हें पर दबाव डालकर इस बावड़ी को जिंदा किया जाता यह बड़ी बात होती और अच्छा संदेश होता लेकिन यहां तो उल्टा है आज भी आंदोलन करने वाले आंदोलन कर रहे हैं और जल गंगा अभियान बिना किरण टॉकीज की बावड़ी को संरक्षित किया खत्म हो गया है…. तो क्या सब खाना पूर्ति हुआ है ऐसा क्यों न समझा जाए. शहडोल के जल गंगा अभियान में। आज की धरना  के लोगों ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति जारी की है व कहा गया किरन टॉकीज शहडोल स्थित दुर्गा पूजा सामाजिक सार्वजनिक उपयोग उपभोग की शासकीय भूमि जमीन के अतिक्रमण को हटाने चल रहे 84 दिन आंदोलन संघर्ष  के आज पूरे हुए। अनशन के आज 84 दिन में आंदोलन संघर्ष को समर्थन देने शीतल जी आज मौजूद थीं .उन्होंने आज अनशन कर रहे हैं नौजवान धनेश कोल ,वीरेंद्र बैगा को तिलक लगाकर अनशन की प्रतिज्ञा के साथ बैठाया । प्रतिदिन की तरह आज भी ईश्वर से प्रार्थना के लिए भक्ति संगीत का सभी ने एकाग्र मन से श्रवण किया। 


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