“घर के लड़का गोही खाएं, मामा खाए अमावट..” के तर्ज पर हो रहा है मध्य प्रदेश में निवेश….? ( त्रिलोकीनाथ )

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मध्य प्रदेश में निवेश और आदिवासी क्षेत्रों की उपेक्षा: एक चिंतनमध्य प्रदेश, अपनी प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, आज विकास की नई दिशाओं की ओर अग्रसर है। हाल ही में, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दुबई यात्रा ने राज्य में निवेश की संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। दुबई में आयोजित इंदौरी इंटरनेशनल बिजनेस नेटवर्क (IIBN) के कार्यक्रम में 1000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें सस्टेनेबल सिटी और शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह प्रयास निश्चित रूप से मध्य प्रदेश को वैश्विक निवेश के नक्शे पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इस चमक-दमक के बीच एक सवाल जोर पकड़ रहा है: क्या राज्य सरकार अपने स्थानीय संसाधनों और प्रतिभाओं का उपयोग करने में उतनी ही रुचि दिखा रही है, जितनी विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में?                   ( त्रिलोकीनाथ )

राजस्व वसूली में अनदेखी कर करोड़ों की कर्ज पर चल रही सरकार….

शहडोल के प्राकृतिक संसाधन और अनदेखी की कहानीशहडोल, मध्य प्रदेश का एक आदिवासी बहुल क्षेत्र, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। इस क्षेत्र में रिलायंस सीबीएम (कोल बेड मीथेन) गैस इंडस्ट्रीज, लालपुर की मौजूदगी न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए, बल्कि पूरे राज्य के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत हो सकती है। एक दावा किया है कि वे अपने अनुसंधान और प्रयासों से शहडोल के प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से 1000 करोड़ रुपये का राजस्व शासन को दिलाने की क्षमता रखते हैं। उनका यह भी कहना है कि पूर्व में ओरिएंट पेपर मिल, अमलई से 300 करोड़ रुपये के बकाया राजस्व और लाखों रुपये की नियमित वसूली का स्रोत उन्होंने शासन को प्रदान किया, लेकिन इसके बदले उन्हें न तो कोई मान्यता मिली और न ही मेहनताना। यहां सवाल उठता है कि जब स्थानीय स्तर पर इतनी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं, तो सरकार की प्राथमिकता विदेशी निवेश पर क्यों केंद्रित है? क्या यह स्थानीय प्रतिभाओं और संसाधनों की अनदेखी का परिणाम है, या फिर नीतिगत प्राथमिकताओं में कोई असंतुलन है?

आदिवासी क्षेत्रों का विकास: अवसर या उपेक्षा?शസआदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। शहडोल जैसे क्षेत्रों में कोयला, आयरन और अन्य खनिजों की प्रचुरता है, जैसा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं लुधियाना में एक इंटरैक्टिव सत्र में उल्लेख किया था। फिर भी, स्थानीय निवासियों की शिकायत है कि इन संसाधनों से होने वाले लाभ का एक बड़ा हिस्सा बड़े उद्योगपतियों तक सीमित रहता है, जबकि स्थानीय समुदायों को इसका उचित लाभ नहीं मिलता। शहडोल के एक निवासी का कहना है कि उनके द्वारा प्रस्तावित राजस्व वसूली के सुझावों को शासन द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया, और अनुबंध की कमी का हवाला देकर उनके प्रयासों को नजरअंदाज किया गया। यह स्थिति यह सवाल उठाती है कि क्या सरकार की नीतियां बड़े उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे आदिवासी क्षेत्रों के संसाधनों का लाभ स्थानीय समुदायों तक नहीं पहुंच पा रहा?

विदेशी निवेश बनाम स्थानीय संसाधन: एक तुलनात्मक विश्लेषणमुख्यमंत्री की दुबई यात्रा पर होने वाला खर्च और उससे प्राप्त 1000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव निश्चित रूप से स्वागत योग्य हैं। लेकिन जब स्थानीय स्तर पर समान राशि का राजस्व उत्पन्न करने की संभावना मौजूद हो, तो विदेशी निवेश के लिए इतना जोर देना और स्थानीय प्रतिभाओं को अनदेखा करना कई सवाल खड़े करता है। विदेशी निवेश से न केवल आर्थिक निर्भरता बढ़ती है, बल्कि कई बार यह स्थानीय समुदायों के हितों को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, सस्टेनेबल सिटी जैसे प्रस्तावों का लाभ शहरी क्षेत्रों तक सीमित रह सकता है, जबकि शहडोल जैसे आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बड़े उद्योगपतियों के लिए लाभकारी हो सकता है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए नहीं।बढ़ावा दे सकता है। सरकार को चाहिए कि वह स्थानीय और वैश्विक निवेश के बीच संतुलन बनाए, ताकि मध्य प्रदेश न केवल वैश्विक निवेश का केंद्र बने, बल्कि अपने नागरिकों के लिए एक समृद्ध और समावेशी राज्य भी बने।


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