देवलोंद थाना क्षेत्र में शराब माफिया के खिलाफ महिलाओं का मोर्चा: कानून-व्यवस्था पर सवाल

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देवलोंद थाना क्षेत्र में शराब माफिया के खिलाफ महिलाओं का मोर्चा: कानून-व्यवस्था पर सवाल

शहडोल। जिले के देवलोंद थाना क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ महिलाओं का आक्रोश एक बार फिर सुर्खियों में है। दो वर्ष पूर्व, 15 अगस्त के आसपास, ग्रामवासियों, विशेषकर महिलाओं ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर अवैध शराब की दुकानों को बंद करने की मांग की थी। तहसीलदार व्योहारी ने इसे गंभीर समस्या मानते हुए देवलोद थाना को तत्काल कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था। लेकिन, थाना प्रशासन ने इस पत्र को नजरअंदाज कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि शराब माफिया का प्रभाव पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर हावी है। दो साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, और अब महिलाओं ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। यह घटना न केवल शहडोल जिले की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब प्रशासन निष्क्रिय हो, तो आम नागरिक, खासकर महिलाएं, अपनी सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन के लिए कितने दृढ़ हो सकते हैं।

शराब माफिया का बोलबाला और प्रशासन की निष्क्रियता

देवलोद थाना क्षेत्र, जो सीधी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, लंबे समय से शराब माफिया के प्रभाव में है। कहा जाता है कि माफिया का दबाव न केवल स्थानीय पुलिस पर, बल्कि सीधी लोकसभा के कुछ नेताओं पर भी है। इस प्रभाव के चलते थाना प्रशासन माफिया के सामने नतमस्तक नजर आता है। माफिया के इस कारोबार से करोड़ों रुपये की कमाई होती है, जिसका बंटवारा कथित तौर पर ऊपरी स्तर तक पहुंचता है। यही कारण है कि चाहे कोई भी अधिकारी थाने में पदस्थ हो, वह माफिया के सामने अपनी स्वायत्तता खो देता है।
यह स्थिति केवल शराब माफिया तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र में रेत माफिया भी सक्रिय है, जिसने पहले एक पटवारी और बाद में एक पुलिस अधिकारी की हत्या कर दी। इन घटनाओं ने स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं, का पुलिस और प्रशासन पर से भरोसा पूरी तरह उठा दिया है। महिलाओं का मानना है कि जब कानून-व्यवस्था उनके साथ नहीं है, तो उन्हें स्वयं अपने परिवार और समाज की रक्षा के लिए आगे आना होगा।

महिलाओं का साहस और स्वयं संभाला मोर्चा

दो वर्ष पहले दी गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई न होने से निराश होकर, देवलोद की महिलाओं ने अब खुद ही शराब माफिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह न केवल उनके साहस का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जब प्रशासन नाकाम हो, तो समाज के सबसे कमजोर समझे जाने वाले वर्ग भी अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं। हाल ही में, महिलाओं ने थाना पहुंचकर अवैध शराब के कारोबार को बंद करने की मांग दोहराई। यह कदम न केवल शराब माफिया के खिलाफ एक चेतावनी है, बल्कि प्रशासन और पुलिस के लिए भी एक चुनौती है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

कानून-व्यवस्था पर सवाल और भविष्य की चुनौतियां

शहडोल जिले की यह घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है: क्या प्रशासन और पुलिस माफिया के दबाव में इतने लाचार हो चुके हैं कि वे आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असमर्थ हैं? जब महिलाओं को स्वयं सड़कों पर उतरना पड़ता है, तो यह स्पष्ट है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमराई हुई है। यह भी चिंता का विषय है कि माफिया का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक संरक्षण भी हो सकता है।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि नागरिकों में प्रशासन के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो लोग कानून को अपने हाथ में लेने के लिए मजबूर हो सकते हैं, जो एक खतरनाक स्थिति को जन्म दे सकता है। शहडोल जिला प्रशासन और सीधी लोकसभा क्षेत्र के नेताओं को इस मामले में गंभीरता से हस्तक्षेप करना होगा। शराब माफिया और रेत माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई, पारदर्शी जांच, और दोषियों को सजा दिलाना ही एकमात्र रास्ता है जिससे नागरिकों का विश्वास बहाल हो सकता है।

थाना देवलौद क्षेत्र के ग्राम जगमल में सोमवार की सुबह इतिहास बन गई।

ग्राम जगमल आदिवासी और हरिजन बहुल गांव है। यहां के हालात लंबे समय से बिगड़े हुए थे। पुरुष वर्ग शराब और गांजे की लत में इस कदर डूब गया था कि घर का पैसा, अनाज और सामान तक बेच डालते थे। महिलाओं का कहना है कि “रात-रात भर शराबी पुरुष हंगामा करते हैं, बच्चों को पढ़ाई-लिखाई का माहौल नहीं मिलता और घर का सुख-चैन पूरी तरह खत्म हो गया है।” कई महिलाएं रोजाना पति की मारपीट और गाली-गलौज सहते-सहते थक चुकी थीं।

इन्हीं हालातों से तंग आकर सुशमा साकेत ने गांव की महिलाओं को संगठित किया। पिछले दो वर्षों से वे महिलाओं की बैठकों में नशा मुक्ति का मुद्दा उठाती रहीं। धीरे-धीरे यह आवाज एक आंदोलन में बदल गई। और 18 अगस्त 2025 को इस आंदोलन ने निर्णायक रूप ले लिया।

थाना परिसर के बाहर ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी की – “अवैध शराब बंद करो – सप्लायर पर कार्रवाई करो।”

सुबह करीब 9 बजे खबर मिली कि राजीव साकेत के घर अवैध शराब की खेप पहुंची है। सुशमा साकेत ने तीन दर्जन महिलाओं को साथ लिया और सरपंच रामनारायण कोल के नेतृत्व में घर की घेराबंदी कर दी। तुरंत 100 डायल पर पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी की टीम मौके पर पहुंची। तलाशी में 42 सीसी देशी शराब (कीमत 3360 रुपये) और 08 सीसी अंग्रेजी शराब (कीमत 1600 रुपये), कुल 4960 रुपये की शराब जब्त हुई।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान अचानक हालात बिगड़ गए। आरोपी राजीव साकेत और उसकी पत्नी ने पीछे से आकर महिलाओं पर डंडों से हमला कर दिया। महिलाएं कुछ पल के लिए घबराईं लेकिन फिर और भी मजबूती से डटी रहीं। सुशमा साकेत ने कहा – “हम डरने वाले नहीं हैं, अपने बच्चों और परिवार की खातिर आखिरी दम तक लड़ेंगे।”महिलाओं की फरियाद पर थाना देवलौद पुलिस ने अपराध क्रमांक 143/25 दर्ज किया। आरोपियों पर बीएनएस की धारा 296, 115(2), 351(2), 3(5) के तहत प्रकरण कायम किया गया। वहीं शराब बरामदगी पर अपराध क्रमांक 144/25 आबकारी अधिनियम की धारा 34(ए) में भी मामला दर्ज किया गया।घटना के बाद सरपंच रामनारायण कोल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष थाना पहुंचे। उन्होंने थाना प्रभारी से चर्चा की और स्पष्ट कहा कि अब गांव में अवैध शराब का कारोबार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। थाना परिसर के बाहर ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी की – “अवैध शराब बंद करो – सप्लायर पर कार्रवाई करो।”

 

देवलोद की महिलाओं का यह साहसिक कदम एक मिसाल है। यह दर्शाता है कि जब प्रशासन निष्क्रिय हो, तो समाज स्वयं अपनी रक्षा के लिए उठ खड़ा होता है। लेकिन यह स्थिति आदर्श नहीं है। प्रशासन और पुलिस को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी। शहडोल जिले की यह घटना केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का प्रतीक है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस चुनौती का सामना कर पाएगा, या फिर माफिया का बोलबाला और नागरिकों का अविश्वास बढ़ता जाएगा। महिलाओं ने जो मोर्चा संभाला है, वह एक चेतावनी है—न्याय और शांति के लिए समाज अब और इंतजार नहीं करेगा।

कहने के लिए देवलोंद थाना शहडोल जिला संसदीय क्षेत्र महिला नेत्री हिमाद्री सिंह के नेतृत्व में है तथा संसदीय क्षेत्र सीधी लोकसभा के अंतर्गत आता है दो-दो सांसदों के नियंत्रण में जिस कानून व्यवस्था को सुदृढ़ होना चाहिए वह दम तोड़ चुका है क्षेत्रीय विधायक शरद को भी इन माफियाओं के सामने अपने को अक्षम पा रहे हैं और इसीलिए महिलाओं ने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए स्वयं मोर्चा खोल दिया है किंतु यह नेता और क्षेत्रीय अधिकारी इससे क्या सबक लेंगे यह देखना होगा वैसे आदिवासी विशेष क्षेत्र लूटने और खाने का स्वर्ग बना हुआ है उसी को देवलोद थाना क्षेत्र बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है


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