
फिल्म “सरफरोश” में गजल कार गुलफाम नसीरुद्दीन शाह से पाकिस्तानी दूत एक पार्टी में मिलता है और संदेश देता है की आतंक का काम लोकप्रिय गजल का गुलफाम सही नहीं कर रहा गुलफाम इसका विरोध करते हैं तो वह अपने शब्दों को सुधार कर कहता है नहीं गुलफान साहब ऐसा मत कहिए अगर विश्वास नहीं होता तो एक मुहाजिर पर इतना यकीन हमारे आर्मी चीफ की नहीं करते, इस परमुहाजिर शब्द की व्याख्या करते हुए नसरुद्दीन शाह कहते हैं की जो पाकिस्तान चले गए उन्हें आज भी पाकिस्तान ने नहीं अपनाया और उन पर शक सुबहा करते हैं यानी उन पर विश्वास नहीं करते इसीलिए उन्हें यानी पाकिस्तान गए भारतीयों को आज भी मुहाजिर कहा जाता है।
कुछ इस अंदाज में कांग्रेस से भाजपा में गए विजयराघवगढ़ के विधायक संजय पाठक के साथ देखने में दुर्गति हो रही है और इस तरह उन्हें अब सतर्कता के साथ रहना पड़ रहा है कलेक्टर को लेकर चिट्ठी इसी को प्रकट करती है अन्यथा विधायक अपने मुख्यमंत्री से का के सीधे दोषी को दंडित कर सकता था लेकिन उन्हें यकीन है कि मुख्यमंत्री उनके कहने पर कोई काम नहीं करेंगे….? डालते हैं एक नजर भाजपाई-मुहाजिर के परिस्थितियों पर…
… (त्रिलोकी नाथ)
संजय सत्येंद्र पाठक: राजनीतिक सफर, आर्थिक विवाद और सियासी हलचल
मध्य प्रदेश की सियासत में संजय सत्येंद्र पाठक एक ऐसा नाम है, जो अपनी संपत्ति, प्रभाव और विवादों के कारण हमेशा चर्चा में रहा है। कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक और पूर्व मंत्री संजय पाठक मध्य प्रदेश के सबसे धनाढ्य नेताओं में से एक हैं। हाल ही में उनके द्वारा कलेक्टर को लिखी गई चिट्ठी और उनके खिलाफ चल रही आर्थिक अपराधों की जांच ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
राजनीतिक सफर: कांग्रेस से भाजपा तक
संजय सत्येंद्र पाठक का राजनीतिक करियर एक लंबी और उतार-चढ़ाव भरी यात्रा रहा है। 1991 में जिला युवक कांग्रेस, जबलपुर के महामंत्री के रूप में शुरूआत करने वाले पाठक ने 1996 में जिला कांग्रेस कमेटी, कटनी के महामंत्री का पद संभाला। 2000-2005 तक वे मध्य प्रदेश युवक कांग्रेस के उपाध्यक्ष रहे और 2008 में पहली बार विजयराघवगढ़ से विधायक चुने गए। शुरुआत में कांग्रेस के प्रति उनकी निष्ठा थी, लेकिन 2018 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। यह बदलाव उनके लिए सियासी रूप से फायदेमंद रहा, क्योंकि उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनावों में फिर से जीत हासिल की और विजयराघवगढ़ को अपनी अजेय सीट बनाए रखा।
हालांकि, यह बदलाव उनके लिए पूरी तरह से सहज नहीं रहा। “दूध की जली बिल्ली” की तरह सतर्क रहने की उनकी छवि और “पाकिस्तान मुहाजिर” की तरह संघर्ष की तुलना उनके उस सतर्क और सशंकित रवैये को दर्शाती है, जो उन्होंने भाजपा में शामिल होने के बाद अपनाया। यह तुलना इस बात की ओर इशारा करती है कि कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद भी पाठक को अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए लगातार सियासी और कानूनी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।
आर्थिक अपराधों की जांच: 520 करोड़ की वसूली…?
संजय पाठक की सबसे बड़ी चुनौती उनके खिलाफ चल रही आर्थिक अपराधों की जांच है। मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी तीन कंपनियों—निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन और पेसिफिक एक्सपोर्ट—पर अवैध खनन और जीएसटी चोरी के आरोप में 520 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश जारी किया है। इसमें 440 करोड़ रुपये अवैध खनन और 80 करोड़ रुपये जीएसटी चोरी के जुर्माने के रूप में वसूले जाएंगे। यह कार्रवाई कटनी और जबलपुर में सैटेलाइट इमेजरी और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस (आईबीएम) के आंकड़ों के आधार पर की गई जांच के बाद हुई, जिसमें स्वीकृत सीमा से अधिक लौह अयस्क के खनन और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई।इसके अलावा, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने पाठक की कंपनियों द्वारा सहारा ग्रुप की 310 एकड़ जमीन को बाजार मूल्य से 70% कम दाम में खरीदने के मामले में भी जांच शुरू की है। आरोप है कि इस सौदे में भ्रष्टाचार हुआ और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए राशि को सेबी-सहारा रिफंड खाते में जमा नहीं किया गया। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और जमीन की रजिस्ट्रियां रद्द करने की मांग की है।
सियासी हलचल और भाजपा की स्थिति
संजय पाठक के खिलाफ चल रही इन जांचों ने मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। खास बात यह है कि यह कार्रवाई उनकी अपनी पार्टी की सरकार द्वारा की जा रही है, जो आम तौर पर भाजपा नेताओं के खिलाफ कम ही देखी जाती है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह और उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया, हालांकि, पाठक और उनकी कंपनियों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया है कि सारा काम नियमों के अनुसार हुआ और सभी टैक्स समय पर चुकाए गए। इसके बावजूद, यह मामला सियासी रूप से संवेदनशील हो गया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे सहारा ग्रुप के निवेशकों के साथ धोखाधड़ी से जोड़कर सरकार पर सवाल उठाए हैं।
” मुहाजिर” की तरह संघर्ष
मुहाजिर की तुलना संजय पाठक के उस संघर्ष को दर्शाती है, जो वे अपनी सियासी और व्यावसायिक पहचान को बनाए रखने के लिए कर रहे हैं। कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि उनकी स्थिति मजबूत होगी, लेकिन आर्थिक अपराधों की जांच और साइबर क्राइम जैसे मामलों ने उनकी राह को कठिन बना दिया है। यह तुलना उनके उस तनाव और असुरक्षा को भी उजागर करती है, जो एक नए सियासी माहौल में अपनी जगह बनाने की कोशिश में उत्पन्न होती है।”उल्टा झंडा” फहराने के आरोप में घिरे विधायक संजय पाठक में चिट्ठी लिखकर न सिर्फ अपनी सफाई देते हुए बल्कि प्रशासनिक कार्य प्रणाली को उजागर करते हुए कहा है संभवत: साजिश के तहत राष्ट्रीय ध्वज को गलत तरीके से उल्टा बांधा जो की झंडा फहराने के समय अत्यंत असंम्मानजनक स्थिति के रूप में सामने आया चु़कि झंडा ध्वजारोहण के पहले को लपेटा हुआ बांधा था और जैसे ही मैं ध्वजारोहण किया और मेरी नजर उल्टे झंडे में पड़ी मैं झंडे को तुरंत सही कराया और पुनः ध्वजारोहण किया किंतु यह घटना राष्ट्रीय ध्वज संहिता का उल्लंघन है जिससे जनता की भावनाएं आहत हुई है अतः इस गंभीरता जिसके लिए कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। देखना होगा भाजपा अपने विधायक के इस पत्र पर संबंधित दोसी कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही करती है या फिर उसे आई गई बातों में ले लेती है….

