
शीर्ष अदालत ने दीवानी न्यायाधीश के आचरण को ‘घृणित’ बताया,
उच्च न्यायालय के आदेश पर लगाई रोक
नयी दिल्ली: 12 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 2018 में ट्रेन में एक महिला सहयात्री की बर्थ के सामने पेशाब करने और उपद्रव मचाने के आरोप में एक न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया गया था।न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दीवानी न्यायाधीश के इस आचरण को ‘घृणित’ बताते हुए कहा कि यह एक ‘चौंकाने वाला’ मामला था और उन्हें बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था।उच्चतम न्यायालय ने न्यायिक अधिकारी और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करके पिछले साल मई में उच्च न्यायालय की खंडपीठ के एक आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय के प्रशासनिक पक्ष द्वारा दायर की गई याचिका पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी है। खंडपीठ ने अपने आदेश में सितंबर 2019 के बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया था और न्यायिक अधिकारी को 15 दिनों के भीतर बहाल करने का निर्देश दिया था।
उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा, ‘‘आपको बर्खास्त किया जाना चाहिए था।’’ शीर्ष न्यायालय ने कहा, ‘‘नोटिस जारी करें, जिसका जवाब चार सप्ताह के भीतर देना होगा। इस बीच, विवादित फैसले का प्रभाव और क्रियान्वयन स्थगित रहेगा।’’ मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी गई है।न्यायिक अधिकारी को मार्च 2011 में द्वितीय श्रेणी के दीवानी न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया गया था। आरोप है कि जून 2018 में, जब वह ट्रेन में यात्रा कर रहे थे, तो उन्होंने नशे की हालत में सहयात्रियों के साथ दुर्व्यवहार किया, उन्हें परेशान किया और कुछ अश्लील हरकतें कीं।यह भी आरोप लगाया गया कि नशे की हालत में आरोपी ने एक महिला सहयात्री के बर्थ के सामने पेशाब किया, जिससे असुविधा हुई और यात्रियों को चेन खींचनी पड़ी, जिसके कारण ट्रेन सेवा में विलंब हुआ।इस घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और चूंकि अपराध जमानती था, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।आरोपी ने अपना जवाब दाखिल किया और अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया।अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा था कि जांच अधिकारी ने न्यायिक अधिकारी को उन पर लगे आरोपों का दोषी पाया है।बाद में, प्रशासनिक समिति ने सेवा से बर्खास्तगी की सजा का प्रस्ताव रखा और सितंबर 2019 में उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने इसे मंजूरी दे दी।पूर्ण पीठ की सिफारिश के अनुपालन में, 28 सितंबर, 2019 के एक आदेश द्वारा उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।इसके बाद उन्होंने 28 सितंबर, 2019 के आदेश और प्रशासनिक समिति की सिफारिश के साथ-साथ पूर्ण पीठ के निर्णय को रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने यह गौर किया था कि विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट ने उन्हें बरी कर दिया था और यह दर्ज किया था कि शराब के सेवन की पुष्टि करने वाला कोई चिकित्सकीय साक्ष्य रिकॉर्ड में मौजूद नहीं था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने उनकी बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई।
एक पोस्ट में स्वामी विवेकानंद की अमर विरासत का स्मरण करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वामीजी के जीवन और शिक्षाओं में आंतरिक शक्ति, आत्म-अनुशासन और निस्वार्थ सेवा को सार्थक जीवन का स्तंभ बताया गया है। उन्होंने कहा कि भारत के सभ्यतागत ज्ञान को विश्व तक पहुंचाकर स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्रीय गौरव को एक नया आयाम दिया और युवाओं में राष्ट्र की प्रगति के लिए कार्य करने का आत्मविश्वास जगाया।
न्याय यात्रा इंदौर विरोध प्रदर्शन – जिम्मेदार लोग कातिल हैं हत्या का मुकदमा दर्ज हो –
इंदौरसमाचार एजेंसी ईएमएस के अनुसार भागीरथपुरा में गंदे पानी के कारण 21 लोगों की जान चली गई। कई लोग हॉस्पिटल्स में भर्ती है। ऐसे में कांग्रेस ने रविवार को बड़ा गणपति चौराहा से राजवाड़ा तक न्याय यात्रा निकाली।
इस दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महापौर और बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस ने मांग की, पीडि़त परिवारों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। साथ ही इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हो। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घंटा-मंत्री मुर्दाबाद के नारे भी लगाए है। न्याय यात्रा के समापन पर मंच से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बेहद तीखे और भावनात्मक शब्दों में भाजपा सरकार, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों को घेरा। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि आत्ममंथन का है। पिछले 20 साल से प्रदेश में, 22 साल से इंदौर नगर निगम में और 35 साल से सांसद के रूप में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है, फिर भी इंदौर शहर को एक गिलास ऐसा शुद्ध पानी नहीं मिल पाया, जिससे किसी की जान न जाए।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव पुरस्कार 2025 से सम्मानितस्वाति शांता कुमार
नई दिल्लीसमाचार एजेंसी ईएमएस के अनुसार
भारतीय सेना की अधिकारी मेजर स्वाति शांता कुमार को शांति स्थापना में उनके योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया है। मूल रूप से बेंगलुरु निवासी मेजर स्वाति वर्तमान में दक्षिण सूडान में यूएनएमआईएसएस (यूनाईड नेंशन मिशन साउथ सूडान) में तैनात हैं। उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उनके प्रोजेक्ट “समान भागीदारी, स्थायी शांति” के लिए दिया गया, इस संयुक्त राष्ट्र ने लैंगिक समानता और शांति स्थापना को बढ़ावा देने वाले उत्कृष्ट प्रयास के रूप में पहचाना। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मेजर स्वाति और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि उनका प्रोजेक्ट भविष्य के शांति स्थापना मिशनों के लिए एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
साइबर ठगों ने साल भर में दिल्ली में 1,250 करोड़ रुपये की ठगी की
पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती
नयी दिल्ली: 12 जनवरी (भाषा)
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को 10 जनवरी को दो बार बेहोश होने के बाद सोमवार को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया, जहां उनका एमआरआई किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी और कहा कि उनकी अन्य जांच मंगलवार को की जाएंगी।अधिकारियों ने बताया कि 10 जनवरी को तड़के साढ़े तीन बजे 74 वर्षीय धनखड़ पर स्नानघर में दो बार बेहोशी छा गयी थी।

