अवैध: अनूपपुर में अडानी का औद्योगिक आतंक का साया पड़ा कोतमा में..?( त्रिलोकी नाथ)

Share

अवैध रूप से हो रहा काम;
गौतम अडानी का औद्योगिक आतंक का साया पड़ा अनूपपुर के कोतमा में..?( त्रिलोकी नाथ)

  अदाणी समूह की सभी कंपनियों के शेयरों में तेजी, अदाणी पावर 20 प्रतिशत चढ़ा |  Republic Bharat  शहडोल-अनूपपुर क्षेत्र में अदानी थर्मल पावर प्रोजेक्ट को लेकर उठे हालिया विवाद ने राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस को फिर से गरमा दिया है। मध्य प्रदेश के एक पूर्व कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया है कि अनूपपुर जिले के कोतमा क्षेत्र में अदानी की प्रस्तावित थर्मल कंपनी द्वारा केवई नदी पर बिना अनुमति के अवैध बैराज बनाया जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है और आसपास के किसानों, आदिवासियों की जमीनें प्रभावित हो रही हैं। आरोप है कि अनूपपुर के कलेक्टर को इसकी जानकारी होने के बावजूद फाइल दबा दी गई है और कार्य करने दिया जा रहा हैऐसे मे, और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
यह प्रोजेक्ट अदानी पावर की सहायक कंपनी अनूपपुर थर्मल एनर्जी (एमपी) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चलाया जा रहा है, जो मूल रूप से वेल्स्पन एनर्जी का था। यह 4×800 MW (कुल 3200 MW) का अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल कोल-बेस्ड थर्मल पावर प्लांट है, जो छतई, मझटोलिया और उमरदा गांवों में प्रस्तावित है। पर्यावरण मंत्रालय ने 2024 में नए टर्म्स ऑफ रेफरेंस दिए और 2025 में पर्यावरण क्लीयरेंस की प्रक्रिया चल रही है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे टाइगर कॉरिडोर और वन्यजीव क्षेत्रों के निकट होने के कारण चिंता जताई गई है, लेकिन जिस प्रकार से केवई नदी पर अवैध बैराज का स्पष्ट आरोप सामने आए हैं स्थानीय स्तर पर मामला चर्चा के केंद्र में आ गया है।
इसी तरह, शहडोल में रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा 2009 से कोल बेड मीथेन (CBM) गैस उत्खनन स्पष्ट रूप से प्रमाणित होने के बाद भी 15 वर्ष 20 जाने के पश्चात भी शिकायतों को दबाकर रखा गया है रिलायंस ने शहडोल में CBM ब्लॉक्स पर काम शुरू किया, और शहडोल-फूलपुर पाइपलाइन भी बनाई। हालांकि, तहसीलदार द्वारा पत्राचार कर जमीन हड़पने पर प्रश्न खड़े किए हैं इसके बावजूद भी दिल्ली से लेकर शहडोल तक इस अवैध गैस उत्खनन में कोई कार्यवाही नहीं की गई है पूरा ब्यूरोक्रेट्स इस मामले को अनदेखा कर रहा है क्योंकि मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र मुकेश अंबानी का है। संविधान की पांचवी अनुसूची में यह गैस प्रोजेक्ट अवैध रूप से चल रहा है कहां यह जाता है पाइपलाइन PNGRB द्वारा अधिकृत है। किंतु उत्खनन पर प्रश्न उठे हैं की खनिज विभाग से बिना अनुबंध किया और हजारों करोड़ों रुपए का राजस्व दिए बिना फैक्ट्री चलने दी जा रही है।प्रश्न उठता है कि क्या कांग्रेस पार्टी अदानी पर “नाजायज दबाव” बनाने के लिए पूर्व विधायक का इस्तेमाल कर रही है? या यह लोक हित में उठाया गया मुद्दा है?
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो अदानी ग्रुप पर अक्सर विपक्षी दल (खासकर कांग्रेस) द्वारा क्रोनी कैपिटलिज्म के आरोप लगते रहे हैं, विशेषकर केंद्र की भाजपा सरकार से कथित निकटता के कारण। विभिन्न राज्यों में अदानी प्रोजेक्ट्स पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जैसे झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में। लेकिन मध्य प्रदेश में यह स्थानीय मुद्दा ज्यादा लगता है, जहां आदिवासी क्षेत्रों में पर्यावरण, जल और जमीन के सवाल संवेदनशील होते हैं। यदि आरोप सत्य हैं, तो यह पर्यावरण नियमों का उल्लंघन और स्थानीय समुदायों के अधिकारों का मामला है, जिसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
दूसरी ओर, राजनीतिक दलों का इतिहास देखें तो बड़े उद्योगपतियों पर दबाव बनाने और बाद में समझौता करने के आरोप सभी पार्टियों पर लगते रहे हैं। कांग्रेस पर भी रिलायंस या अन्य ग्रुप्स के साथ ऐसे आरोप लगे हैं। लेकिन वर्तमान में अदानी पर हमले मुख्य रूप से राजनीतिक विपक्ष का हिस्सा लगते हैं, न कि कोई सिद्ध “नाजायज तवज्जो”।आदिवासी क्षेत्रों में पारदर्शिता की कमी एक वास्तविक समस्या है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी ऐसे मुद्दों पर मूकबधिर बनी हुई है।देखा गया है जब भी ऐसी औद्योगिक इकाई के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA), पब्लिक हियरिंग और ग्राम सभा की सहमति अक्सर विवादास्पद रहती है उसे वक्त प्रमुख विपक्षी कांग्रेस पार्टी मौन सहमति देती है क्योंकि ऐसा होता नहीं है कि उनके कोई कार्यकर्ता उसे क्षेत्र में रहे ना हो और अचानक कांग्रेस पूर्व विधायक अपना क्लेम करने पहुंच जाए कि वह अवैध काम कर रही है।

कहां जाता है अदानी अनूपपुर प्रोजेक्ट में टाइगर कॉरिडोर प्रभावित होने की चिंता वैध है, और यदि बैराज जैसा कोई निर्माण बिना अनुमति हो रहा है, तो बड़ी बात नहीं है शासन के नियमों को या करोड़ों रुपए राजस्व पटाए बिना यदि कार्य कर रही है तो NGT या पर्यावरण मंत्रालय को शिकायत करनी चाहिए।अनुभव में यह भी आया है की इन्हीं कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता यदि कोई क्रसर यूनिट डालते हैं और यदि उसका पर्यावरण क्लीयरेंस नहीं है तो बनी बनाई यूनिट को अवैधता कर सालों साल बंद कर दिया जाता है।
कुल मिलाकर, यह बड़ा प्रश्न है कि कांग्रेस अदानी पर दबाव बना रही है या नहीं—बल्कि यह है कि क्या प्रोजेक्ट पर्यावरणीय और सामाजिक नियमों का पूरी तरह पालन कर रहा है? लोक हित में सच्ची चिंता होनी चाहिए, न कि सिर्फ राजनीतिक स्कोरिंग। यदि पूर्व विधायक का आरोप सचमुच में तथ्यों पर आधारित है, तो जांच होनी चाहिए; यदि नहीं, तो यह राजनीतिक बयानबाजी है। क्षेत्र के आदिवासी और किसान ही अंतिम फैसला करेंगे कि क्या यह उनके हित में है या नहीं। पारदर्शी जांच और जन भागीदारी से ही सच्चाई सामने आएगी।


Share

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

राशिफल

- Advertisement -spot_img

Latest Articles