
किसके मुख में बसेंगी बसंत पंचमी की देवी सरस्वती..??
सनातन के शंकराचार्य या फिर हिंदुत्व की राजनीति पर एकाधिकार का महाभारत की होगी घोषणा धर्म क्षेत्रे प्रयाग क्षेत्र में…?
त्रेता युग में तब राम-रावण का युद्ध सुनिश्चित किया जाना था तब कहते हैं अयोध्या की रानी कैकेय की दासी मंथरा के जीभ में सरस्वती ने अपना प्राकट्य किया था। और दासी अपनी रानी को भरत की राजतिलक दिलाने की जिद पर अड़ जाने पर सफलता पाई थी । इसबार राम को वनवास में जाने के लिए कौन जिद कर रहा है..? नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकइ केरि।अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि
(भावार्थ:-मन्थरा नाम की कैकेई की एक मंदबुद्धि दासी थी, उसे अपयश की पिटारी बनाकर सरस्वती उसकी बुद्धि को फेरकर चली गईं)
जब प्रयागराज में बड़ी दुर्घटना होती है उस वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के जुबान में ताले लग जाते हैं और फिर बड़ी योजना के साथ उनकी जुबान अपने झूठ को सत्ता के मंच से प्रस्तुत करते हैं। पिछली बार प्रयागराज के महाकुंभ में अराजकता व्यवस्था की स्थिति में सैकड़ो लोगों की मौत हो गई थी आदित्यनाथ काफी समय बाद अपना मुंह खोले और झूठ बोले की मरने वालों की संख्या कितनी है… इस बार 2026 के इसी प्रयागराज के माघ मेले में फिर बड़ी दुर्घटना हिंदू सनातन धर्म के इतिहास में हुई ।किसी हिंदू व्यक्ति के शासन में रहते सनातन हिंदू परंपरा के प्रवर्तक शंकराचार्य जी के अनुगामी पीठाधीशों के ऊपर दिल दहला देने वाली ऐसी घटना जो 18 तारीख को प्रायोजित तरीके से होती दिखाई दी।जैसा हमने तो इतिहास में न तो कहीं पढ़ा और ना कहीं देखा है। जब 18 जनवरी 26तारीख का दिन मौनी अमावस तीर्थराज क्षेत्र प्रयागराज में जैसे किसी अघोषित युद्ध की घोषणा हो गई हो…इस धर्म क्षेत्र में अधर्म का नंगा नाच हो जाने से यह हिंदू धर्म बनाम नकली हिंदू धर्म का युद्ध स्थल बन गया है।
( त्रिलोकी नाथ )
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और उनकी भगवा मंडली जिस हिंदू धर्म के फर्नीचर में सज कर सत्ता में पहुंची थी उसे हिंदू सनातन धर्म के प्रवर्तक जोशी मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच में गंगा स्नान के बहाने अमावस की काली रात जैसे ठहर गई हो। वह दिन का वक्त था जब कुछ 50-100 अपने शिष्यों के साथ पालकी से शंकराचार्य जी संगम में स्नान के लिए जा रहे थे वहां पर पदस्थ उत्तर प्रदेश के शीर्षक अधिकारी के सामने धर्म ध्वजाधारी शंकराचार्य से न सिर्फ अपमानजनक व्यवहार किया बल्कि शिष्यों के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया…। इससे कम से कम यह तो सिद्ध होता ही है कि जितने भी शीर्षक अधिकारी थे उन्हें ऐसे भीड़ के मौके पर परिस्थितियों को संभालने का कोई अनुभव नहीं रहा बल्कि वह परिस्थितियों को बिगड़ने के लिए भरसक प्रयास करते देखे गए। यह कहना कहीं से गलत नहीं होगा क्योंकि शंकराचार्य के कथनानुसार उन्हें अकेले अगवा करके उनकी पालकी सहित मेला में अलग-अलग स्थान पर अपमानजनक तरीके से पुलिस वाले घुमा रहे थे जबकि उनके शिष्यों में 14 वर्ष और 11 वर्ष बटुक वेदपाठी से लेकर 84 वर्ष तक के साधुओं को शिखा पकड़कर अपमान किया गया उन्हें बंद कमरे में ले जाकर जूते से भी मारा गया, घसीटा गया और मां बहन की गाली देते हुए शंकराचार्य जी से अलग कर दिया गया।इसके बाद शंकराचार्य जी ने यह आशंका जताई कि उन्हें पालकी से उतार कर भीड़ तंत्र के हवाले करते हुए उनकी हत्या करने की एक सुनियोजित योजना थी वह इसलिए असफल हो गई क्योंकि वे पालकी में आम आदमी की नजर में दिखते नजर में रहे अगर वह भीड़ का हिस्सा होते तो निश्चित ही उनके साथ अन्य कई लोगों के भी हत्या कर दी गई होती..। और कह दिया गया होता हादसे में शंकराचार्य सहित अन्य लोग मर गए। ऐसे लोकतंत्र में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार संविधान की गारंटी क्या निरर्थक साबित हुई यह भी प्रश्न खड़ा होता है..?
तो क्या 2026 “धर्म क्षेत्रे ,कुरु क्षेत्रे..” की जगह है प्रयाग क्षेत्रे…. लिखने का अवसर आ गया है।क्योंकि “प्रत्येक हिंदू से एक वोट गाय के लिए” लोकतंत्र में मत मांग कर गौ-रक्षा अभियान को आगे करने वाले वाले शंकराचार्य जी कि इस प्रयागराज में जो असभ्यता और अपमान और शिष्यों के साथ खून की होली खेली गई, शिखा का अपमान किया गया इसकी साक्षी प्रयागराज की गंगा जमुना और सरस्वती का यह संगम अगर सच में युगों से पुण्य का कारक बना तो क्या इस पाप का फलीभूत वह नहीं करेगा ऐसा कैसे संभव है….?
जब बोले तब हुआ-हुआ…
इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा की लोकतंत्र के संविधान के दायरे में नये महाभारत का युद्ध की घोषणा 18 जनवरी 2026 को कर दी गई है क्योंकि शंकराचार्य जी ने अपने शिविर में रहने से तब तक मना कर दिया है जब तक अपमान के लिए माफी नहीं मांग ली जाती। तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने तीन दिन बाद अपना मुंह खोलते हुए उसे कहावत को चरितार्थ करते हुए कि “जब बोले तब हुआ-हुआ..” चिल्लाने का काम फिर किया है.. ताकि उनकी अन्य लोग भी हुआ हुआ करने का काम करें…और भगवा वस्त्र पहनकर यह बता दिया की भगवा वस्त्र पहनकर कोई कालनेमि में सनातन धर्म को चोट नहीं पहुंचा सकता।
इसके पूर्व शंकराचार्य जी अपनी गौ माता संरक्षण की मांग को दोहराते हुए इस पर अमल न करने वाले को हिंदू मानने से इनकार कर दिया है। आंकड़े भी बताते हैं की गौ-मांस नहीं, बफैलो-मीट के निर्यात के मामले में उत्तर प्रदेश में भगवाधारी आदित्यनाथ जो स्वयं गोरख पीठ के महंत हैं के कार्यकाल में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है ।
स्पष्ट है अपने संवैधानिक अधिकार शस्त्रागार से मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने अब तक शंकराचार्य जी के शिविर की तरफ दो नोटिस नमा मिसाइल के बाहर छोड़ दिए हैं पहले नोटिस में उन्हें शंकराचार्य होने की चुनौती दी गई तो दूसरी नोटिस में पहले नोटिस का हवाला देकर उन्हें मेला क्षेत्र से हमेशा के लिए अलग करने की नोटिस दी गई है, यानी जोशीमठ के शंकराचार्य को हमेशा के लिए प्रयागराज मेला क्षेत्र से बाहर कर दिया जाएगा, अगर परिस्थितियों नहीं बदली तो।
देखना होगा कि सामने प्रयागराज में होने वाले इस नकली धर्म और असली धर्म के झगड़े के पीछे राजनीति का खास तौर से भारतीय जनता पार्टी के अंदर जो भगवा राजनीति चल रही है कौन असली हिंदू है कौन नकली हिंदू है…? किसे आदित्यनाथ पसंद नहीं आ रहा है कौन आदित्यनाथ को पसंद करता है…? इस युद्ध की भी घोषणा अप्रत्यक्ष रूप से हो गई है।
क्योंकि जिन जोशीमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी को शंकराचार्य के रूप में एक विश्व स्तरीय मंच से नरेंद्र मोदी पैर पड़ते हुए दिखाई दिए हैं अब उन्हीं की एक राज्य के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया है। बल्कि अप्रत्यक्ष तौर पर उन्हें कालनेमि कहने का प्रयास किया है । ऐसे में आदित्यनाथ को हिंदू होने पर भी प्रश्न चिन्ह लगने का काम जोशीमठ के शंकराचार्य जी ने अपने तर्कों के सहारे सिद्ध करने का काम किया है।
पक्ष और विपक्ष की राजनीति में भाजपा मूक बधिर बनी हुई है तो विपक्ष जोशीमठ के शंकराचार्य के सम्मान में लगातार प्रेस वार्ता कर रहा है देखते हैं अगर चारों शंकराचार्य एक साथ अपनी सम्मान और स्वतंत्रता की गोरक्षा अभियान के साथ लड़ाई को लेकर दिल्ली कूच की जो घोषणा की है अगर दिल्ली में मार्च में पहुंचेंगे उसे वक्त क्या हालात होंगे…? या इसके पहले ही इस भारत की अमृत काल में संवैधानिक दायरे में होने वाले धर्म-युद्ध में कई महारथी के सर कटे मिलेंगे…? जैसा कि आज मुख्यमंत्री आदित्यनाथ प्रयाग क्षेत्र में शंकराचार्य जी को मेला क्षेत्र से अपने संवैधानिक शस्त्रों की ताकत से अगर बाहर कर देते हैं जैसा की संभावना प्रबल बनी हुई है अथवा प्रायश्चित करते हुए मध्य मार्ग का उपयोग कर सनातन हिंदू परंपरा के नाम पर चल रही राजनीति की दुकान को बचाने का प्रयास करते हैं यह भी देखने को बसंत पंचमी पर तीर्थ क्षेत्रे प्रयागराज मैं देखने को मिल सकता है। क्योंकि हिंदुत्व की राजनीति पर किसका एकाधिकार मैं पहले ही अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रमुख नेता डॉ प्रवीण तोगड़िया को दूध में बड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया गया और अब उन्हें ही जड प्लस सुरक्षा देकर अपने दायरे में रखने का प्रयास किया गया प्रमाणित हुआ है। ऐसे में हिंदू सनातन धर्म पर एकाधिकार की राजनीति को बरकरार रखने के लिए भारत की आदि शंकराचार्य के परंपरा को हिंदुत्व ब्रांड के दायरे में रखने के लिए क्या नए घटनाक्रम बसंत पंचमी की आराध्या सरस्वती प्रयाग क्षेत्र में घटित करती हैं यह भी देखने को आज मिलेगा…

