
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस, जो भारत के सम्मान, गौरव और गरिमा का प्रतीक है, को सभी नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा और नवीन उत्साह का संचार करना चाहिए।उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस राष्ट्रीय अवसर पर विकसित भारत बनाने का सामूहिक संकल्प और भी सुदृढ़ होगा।प्रधानमंत्री ने कहा उन्होंने रेखांकित किया कि कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड ने भारत के लोकतंत्र की मजबूती, इसकी विरासत की समृद्धि तथा राष्ट्र को एक सूत्र में बाँधने वाली हमारी एकता को प्रदर्शित किया। समारोह की झलकियाँ साझा करते हुए उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय गौरव का सशक्त प्रदर्शन देखने को मिला।प्रधानमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष अंतोनियो कोस्टा तथा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष सुश्री उर्सुला फ़ॉन डेर लेयेन की मेजबानी करना भारत के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि उनकी उपस्थिति भारत–यूरोपीय संघ (ईयू) साझेदारी की बढ़ती मजबूती तथा साझा मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा विभिन्न क्षेत्रों में भारत और यूरोप के बीच गहन होते संवाद और सहयोग को नई गति प्रदान करेगी।
बनारस को चौपाटी बना दिया गया है : काशीनाथ सिंह
वाराणसी, 25 दिसंबर (भाषा) ‘‘लोगों ने बनारस को बर्बाद कर दिया है। ये मॉल और कॉलोनियों का मुहल्ला नहीं था। ये गलियों और मुहल्लों का मोहल्ला था। पहले लोग बनारस की परंपरा को देखने के लिए आते थे, अब लोग आरती के लिए आते हैं। बनारस के चरित्र को नष्ट किया जा रहा है।’’साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित और ‘काशी का अस्सी’ जैसा बहुचर्चित और बहुविवादित उपन्यास लिखने वाले काशीनाथ सिंह ने एक मुलाकात में शहर के बदलते रूप रंग को लेकर कुछ इस तरह से अपना दर्द बयां किया।‘भाषा’ के साथ यहां ब्रिज एन्क्लेव में स्थित अपने आवास पर एक विशेष बातचीत में उन्होंने शहर को लेकर पुरानी यादों के पन्नों को पलटते हुए कहा, ‘‘ 1953 में जब हम आए थे तो इस शहर में कार एक दो थीं… इक्के थे। प्रेमंचद, जयशंकर प्रसाद इक्के से आते जाते थे। लेकिन अब तो कारें हैं, मल्टी प्लेक्सेस बने हुए हैं। अब बनारस में, दिल्ली या किसी बड़े शहर में कोई फर्क नहीं रह गया है।’’
राष्ट्रपति ने देश के 77वें गणतंत्र समारोह का तिरंगा फहराया
नई दिल्ली,समाचार एजेंसी ईएमएस के अनुसार।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व कर तिरंगा फहराया। राष्ट्रगान की मधुर धुन गूंजी और स्वदेशी लाइट फील्ड गनों से 21 तोपों की सलामी दी गई। इस अवसर पर राष्ट्रपति के साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि थीं। पीएम नरेंद्र मोदी ने दोनों अतिथियों का सलामी मंच पर स्वागत किया। परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति और मुख्य अतिथियों को भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट ने कर्तव्य पथ तक पहुंचाया। पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का भी स्वागत किया। इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम के 150 वर्षों की झलक, देश की सैन्य ताकत और भारत की सांस्कृतिक विविधता देखने को मिली। परेड में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों जैसे आधुनिक हथियारों के साथ 30 रंग-बिरंगी झांकियां भी शामिल हुईं।
9 दिनों से विरोध में हैं बैठे प्रयागराज,समर्थकों के साथ तिरंगा फहराया
प्रयागराज माघ मेले में प्रशासन से विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं। गणतंत्र दिवस पर उन्होंने समर्थकों के साथ तिरंगा फहराया। पदवी विवाद और दुर्व्यवहार के आरोपों के बीच सियासत तेज है। स्वामी का संकल्प है कि माफी मांगे जाने तक वे संगम स्नान और शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे। प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वह अपने शिविर के बाहर ही धरने पर बैठे हैं। इस बीच गणतंत्र दिवस के मौके पर यानी 26 जनवरी को उन्होंने शिविर के बाहर तिरंगा फहराया। इस दौरान काफी साधु-संत और उनके समर्थक मौजूद रहे जिन्होंने मिलकर राष्ट्रगान गाया। गौरतलब है कि प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच हफ्ते भर से अधिक समय से विवाद जारी है। इसको लेकर प्रशासन अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भी भेज चुका है। उनके शंकराचार्य की पदवी पर भी सवाल खड़ा किया गया है। इन सबके बीच जमकर सियासत हो रही है। विपक्ष यूपी सरकार को घेर रहा है। वहीं, डिप्टी सीएम सीएम केशव मौर्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विवाद खत्म करने की अपील की है। अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि पुलिस-प्रशासन ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है। जब तक माफी नहीं मांगी जाएगी वो संगम स्नान नहीं करेंगे और ना ही अपने शिविर में जाएंगे। वो रोज सरकार के खिलाफ बयान दे रहे हैं। इसको लेकर संत समाज भी दो धड़ों में बंटा नजर आ रहा है।

