
यादव समुदाय से आने वाले अपनी वंशानुगतवृत्ति परंपरा मे धनपुरी क्षेत्र में प्रतिबंधित गौ हत्या पर एक शब्द नहीं बोले क्षेत्र में संरक्षित कोयला माफिया गिरी के अघोषित कानून की तरह चल रहे कुटीर उद्योगों पर अवैध कोयला खदानों जिन पर कई लासे से निकल चुकीहैं मुख्यमंत्री मोहन यादव अपनी यात्रा पर कुछ नहीं बोले… स्थानीय कांग्रेसी जब विरोध में अपने दायित्वों कानिर्वहन कर रहे इन मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे थे तब उन्हें थाने में निरुद्ध कर दिया कुछ अभी भी बंद है उन्हें डंडे से मारा भी गया। अच्छी चीज है लोकतंत्र में यह भी जरूरी है और इसी क्रम में प्रदेश कांग्रेस एक जीत की आशा को लेकर जीतू पटवारी शहडोल आ सकते हैं वह कांग्रेस के घायल हुए अपमान को सहला सकते हैं किंतु मुद्दा यह है कि जिस तरह से वैध और अवैध कोयला खदानें धनपुरी क्षेत्र में संचालित हैं जिसे कांग्रेस अध्यक्ष अजय अवस्थी ने मौका स्थल पर जाकर पिछले दिनों वीडियो शूटिंग किया क्या उसे अंजाम तक पहुंचाया गया शायद नहीं नगरपालिका धनपुरी के पूर्व अध्यक्ष कहते हैं की कांग्रेसियों ने हल्ला मचाकर जो चुप्पी साध ली है वह हिस्सा बाट की लड़ाई है..
शहडोल जिले के धनपुरी क्षेत्र में हालिया घटनाओं ने राजनीतिक और सामाजिक विवाद को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की एक दिवसीय यात्रा के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई हुई, जिसमें लाठीचार्ज और हिरासत शामिल थी। यह घटना मुख्य रूप से शुद्ध पेयजल की मांग और अन्य स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित थी, लेकिन इसमें अवैध कोयला खनन, कोयला माफिया और गौ हत्या जैसे गंभीर आरोप भी जुड़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव धनपुरी में वाटर पार्क उद्घाटन और अन्य विकास कार्यों की घोषणा के लिए पहुंचे थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले के सामने काले झंडे दिखाए और विरोध जताया। गोपालपुर तिराहे के पास प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम करने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने कई कांग्रेसियों को हिरासत में लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, 37 से अधिक कार्यकर्ता हिरासत में आए, जिनमें से कुछ को जमानत मिली, सूत्र बताते हैं लेकिन कम से कम तीन (शेख साजिद, आशु चौधरी, सत्यम प्रजापति) को जेल भेजा गया। उनके खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज हुआ। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध पर लाठीचार्ज किया गया और यह BJP सरकार की तानाशाही है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय अवस्थी ने पहले भी क्षेत्र में अवैध कोयला खनन पर वीडियो जारी कर मुद्दा उठाया था।
अवैध कोयला खनन और माफिया गिरी
धनपुरी और शहडोल के आसपास अवैध कोयला खनन लंबे समय से समस्या है। क्षेत्र में SECL की वैध खदानों के साथ-साथ अवैध गतिविधियां चल रही हैं। उदाहरण के लिए, 2025 में 10+ अवैध खदानों को सील किया गया, 30 टन कोयला जब्त हुआ और माफिया गिरफ्तार हुए। धनपुरी पुलिस ने जंगल में छिपाए ट्रक जब्त किए और खेतों से कोयला बरामद किया। पुलिस की मिलीभगत के आरोप: अमलाई थाने के TI सहित 8 पुलिसकर्मी लाइन अटैच हुए, क्योंकि वे अवैध खनन को संरक्षण दे रहे थे।
स्थानीय स्तर पर “अघोषित कानून” चल रहा है, जहां माफिया सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री की यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर कोई टिप्पणी नहीं हुई। अजय अवस्थी ने मौके पर जाकर वीडियो बनाया, लेकिन आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।
गौ हत्या का मुद्दा गौ हत्या पर चुप्पी मध्य प्रदेश में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध है (2004 से उमा भारती सरकार के समय से लागू)। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कई बार कहा है कि सरकार गौ हत्यारों पर सख्त कार्रवाई करती है, और कांग्रेस शोर मचाती है। हालांकि, धनपुरी में स्थानीय स्तर पर गौ हत्या की घटना रिपोर्ट मिली । क्षेत्र में गौवंश से जुड़ी अन्य समस्याएं
जीतू पटवारी की भूमिका और संभावित दौरा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शहडोल में पहले रेत माफिया के खिलाफ एक्शन लिया (डंपर रोके, जांच की)। प्रश्न में सवाल है कि क्या वे अब धनपुरी आकर कोयला माफिया या गौ हत्या के मुद्दों का पर्दाफाश करेंगे, या सिर्फ “डंडे की चोट सहलाने” आएंगे।अभी तक कोई पुष्टि नहीं मिली कि पटवारी धनपुरी या शहडोल में इस विशिष्ट घटना के बाद दौरा करने वाले हैं। पटवारी ने राज्य स्तर पर गौ हत्या और माफिया मुद्दों पर BJP को घेरा है, लेकिन इस घटना पर उनका कोई स्पष्ट बयान या दौरा रिपोर्ट नहीं हुआ।धनपुरी की घटना लोकतंत्र में विरोध के अधिकार के बीच टकराव को दर्शाती है। अवैध कोयला खनन क्षेत्र की पुरानी समस्या है, जहां पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद माफिया सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री यात्रा पर फोकस विकास पर रहा, लेकिन विरोध ने स्थानीय मुद्दों को उजागर किया। यदि जीतू पटवारी आते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए मुद्दों को जीवंत करने का अवसर हो सकता है, अन्यथा यह राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह सकता है। आदिवासी बहुल क्षेत्र में सम्मान और कानून व्यवस्था के सवाल बने रहेंगे। स्थिति पर आगे की निगरानी जरूरी है।

