फिर से पीएसीएल की 10000 करोड़ की संपत्ति जप्त, मध्य प्रदेश में शून्य बटे सन्नाटा…?

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  एक बार फिर से पीएसीएल पर कार्यवाही करके 10000 करोड रुपए की संपत्ति ईडी ने जप्त की है इस कंपनी ने मध्य प्रदेश के शहडोल में भी काफी धोखाधड़ी करके किसानों की और आदिवासियों की जमीन को हथियाया था। ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय ने PACL मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. दिल्ली जोनल ऑफिस-II ने इस केस से जुड़ी 247 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है. इन संपत्तियों की मार्केट वैल्यू लगभग 10,021.46 करोड़ रुपये आंकी गई है. जांच एजेंसी ने यह कदम प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत उठाया है. यह कार्रवाई उन करोड़ों निवेशकों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर आई है, जिनका पैसा सालों से इस स्कीम में फंसा हुआ है. कुर्क की गई ज्यादातर संपत्तियां पंजाब के एसएएस नगर, रूपनगर, जीरकपुर और मोहाली जैसे प्राइम लोकेशन्स पर स्थित हैं. ईडी की इस कार्रवाई से उन जालसाजों में हड़कंप मच गया है, जो निवेशकों की खून-पसीने की कमाई को हड़पकर बैठे थे.

क्या है PACL घोटाला और कैसे हुई ठगी?

इस पूरे मामले की जड़ें साल 2014 में दर्ज हुई सीबीआई की एफआईआर से जुड़ी हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था.कंपनी ने 1990 के दशक से 2014 तक देशभर में (मध्य प्रदेश सहित) लोगों को कृषि भूमि खरीदने/विकसित करने के बहाने छोटी-छोटी राशि निवेश करने का लालच दिया। अनुमानित रूप से ₹48,000 करोड़ से ₹60,000 करोड़ तक की राशि इकट्ठा की गई, जिसमें से अधिकांश निवेशक (लगभग 5-6 करोड़ लोग) ठगे गए। SEBI ने इसे अवैध घोषित किया, CBI ने 2014 में FIR दर्ज की, और ED ने PMLA के तहत जांच की। कंपनी के प्रमोटर निर्मल सिंह भंगू (मृतक) सहित कई लोग आरोपी बने।
ED ने अब तक हजारों करोड़ की संपत्तियां अटैच की हैं (2025-2026 में कई बैच में, जैसे ₹10,000+ करोड़ की हालिया अटैचमेंट), और निवेशकों को रिफंड प्रक्रिया शुरू हुई है।
शहडोल संभाग में किसानों की संपत्ति/रजिस्ट्री से जुड़ी धोखाधड़ी
शहडोल (और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों) में मुख्य आरोप यह है कि PACL ने किसानों की जमीनों को फर्जी तरीके से कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड कराया या हड़पने की कोशिश की। हाल के मामलों में राजस्व विभाग के स्तर पर गड़बड़ी से किसानों की जमीन PACL के नाम कर दी गई, जबकि दस्तावेज किसानों के नाम पर थे। यह कई किसानों के साथ हुआ, जिसमें शहडोल संभाग प्रभावित हुआ। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने देशभर में अवैध कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम चलाई थी. इसके जरिए मासूम निवेशकों से करीब 48,000 करोड़ रुपये जुटाए गए थे. निवेशकों को लुभाने के लिए कृषि भूमि की खरीद-बिक्री और किस्तों में निवेश का लालच दिया गया था. लोगों से एग्रीमेंट और पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे भ्रामक कागजों पर साइन कराए गए, लेकिन हकीकत में उन्हें कभी जमीन मिली ही नहीं.शहडोल जिले में पीएसीएल (Pearls Agrotech Corporation Limited या PACL) से जुड़े फर्जी संपत्ति रजिस्ट्रेशन के मामले में मुख्य रूप से 2014 में रिपोर्ट हुई है। यह मामला आदिवासी (ट्राइबल) जमीनों के फर्जी तरीके से ट्रांसफर और रजिस्ट्रेशन से संबंधित था, जहां कुछ आदिवासियों की जमीन को दिल्ली स्थित कंपनी PACL के नाम फर्जी तरीके से रजिस्टर्ड किया गया था। यह घटना 2009 के आसपास की बताई जाती है, जब भूमि रजिस्ट्री में अनियमितता हुई।

जिन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई हुई:
संध्या सिंह वह उस समय शहडोल में जिला रजिस्ट्रार पद पर तैनात थीं। फर्जी ट्रांसफर में उनकी भूमिका के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था। लोकल कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।अन्य 7 व्यक्ति भी आरोपी थे, जिन पर धोखाधड़ी (cheating) और SC/ST (Prevention of Atrocities Act) के तहत केस दर्ज हुआ। इनमें से अन्य आरोपियों को जमानत मिल गई थी, लेकिन संध्या सिंह के खिलाफ मुख्य कार्रवाई हुई।
PACL एक बड़ा घोटाला था, जहां कंपनी ने निवेशकों से पैसे लेकर जमीन के नाम पर ठगी की, और कई जगह फर्जी दस्तावेजों से रजिस्ट्री कराई। लेकिन शहडोल में यह विशेष रूप से आदिवासी जमीनों का मामला था। 

 


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