
इन दोनों सोशल मीडिया में संविधान की पांचवी अनुसूची में अनुसूचित जिलों में स्वत सासी संस्थाओं को लेकर एक बहस छिड़ी हुई है वही है कि संविधान में ऐसी व्यवस्था का उल्लेख नहीं है कि नगर पालिका नगर पंचायत नगर परिषद नमक संस्थाएं संविधान की पांचवी अनुसूची में काम नहीं कर सकती उन्हें बंद करके वैकल्पिक संस्थाओं का या वित्त संस्थाओं का संचालन किया जाना चाहिए तो क्या शहडोल क्षेत्र मैं जो भी नगरी प्रशासन की संस्थाएं कार्यरत हैं और काम कर रही हैं वे गैर कानूनी तरीके से अब तक काम कर रही थी इस मामले में कुछ सोशल मीडिया पर अलग-अलग विचार भी फैलाई जा रहे हैं हमने जब पड़ताल किया ग्रोकप की सहायता से पताचला वास्तव में संविधान में इन्हें कार्य करने की अधिकारिक स्वतंत्र रूप से नहीं है तो सवाल यह है की क्या हमारी प्रशासनिक व्यवस्था न समझा है या फिर कुछ चीज जबरदस्ती चल रही हैं इस संविधान के अनुरूप सही नहीं है (filefoto दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते आदिवासी)
भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) अनुच्छेद 244(1) के तहत अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) और अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित प्रावधान करती है। यह मुख्य रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्रों की रक्षा, उनकी संस्कृति, भूमि अधिकारों और स्वशासन को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।उल्लिखित अनुच्छेद 243ZC(1) संविधान के भाग IXA (नगर पालिकाएँ / Municipalities) में आता है, जो 74वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़ा गया था। यह अनुच्छेद पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों से सीधे जुड़ा हुआ है।
अनुच्छेद 243ZC(1) में क्या कहा गया है? “इस भाग (भाग IXA) की कोई भी बात अनुच्छेद 244 के खंड (1) में निर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्रों और खंड (2) में निर्दिष्ट जनजातीय क्षेत्रों पर स्वयं लागू नहीं होगी।”
सरल हिंदी में अर्थ: पाँचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) और छठी अनुसूची के जनजातीय क्षेत्रों (Tribal Areas) में नगर निकायों (Municipalities जैसे नगर पालिका, नगर परिषद, नगर निगम) के सामान्य प्रावधान स्वतः लागू नहीं होते। यानी इन क्षेत्रों में सामान्य रूप से नगर निकाय बनाना या लागू करना संवैधानिक रूप से प्रतिबंधित है, क्योंकि ये क्षेत्र आदिवासी हितों की रक्षा के लिए विशेष हैं।
मुख्य बिंदु:
भाग IXA (अनुच्छेद 243P से 243ZG) नगर निकायों की स्थापना, चुनाव, शक्तियाँ आदि से संबंधित है।
अनुच्छेद 243ZC(1) स्पष्ट रूप से कहता है कि ये प्रावधान अनुसूचित क्षेत्रों पर ऑटोमैटिक लागू नहीं होंगे।
हालांकि, अनुच्छेद 243ZC(3) के तहत संसद कानून बनाकर (विशेष अपवादों/संशोधनों के साथ) इन प्रावधानों को इन क्षेत्रों में विस्तारित कर सकती है। लेकिन अब तक ऐसा कोई व्यापक कानून (जैसे MESA – Municipal Extension to Scheduled Areas) पारित नहीं हुआ है।
इसलिए कई विशेषज्ञों और आदिवासी संगठनों का मत है कि अनुसूचित क्षेत्रों में बिना संसदीय कानून के नगर निकाय बनाना या चुनाव कराना असंवैधानिक हो सकता है।
यह प्रावधान आदिवासियों की भूमि, संस्कृति और स्वशासन की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि शहरीकरण या बाहरी प्रभाव से उनका हक प्रभावित न हो। ( त्रिलोकी नाथ)

