
प्रधानमंत्री ने कहा
इस युद्ध के कारण, दुनिया में जो कठिन हालात बने हैं, उनका प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका है, इसलिए हमें तैयार रहना होगा, हमें एकजुट रहना होगा। हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की आवश्यकता है। धीरज के साथ, संयम के साथ, शांत मन से हमें हर चुनौती का मुकाबला करना है, और यही हमारी पहचान है, यही हमारी ताकत है, और हां हमें बहुत सावधान और सतर्क भी रहना है, हालात का फायदा उठाने वाले झूठ फैलाने का प्रयास करेंगे, ऐसे लोगों की कोशिशें को सफल नहीं होने देना है। मैं देश के सभी राज्य सरकारों से भी इस सदन के माध्यम से आग्रह करूंगा, ऐसे समय में काला बाजारी करने वाले, जमाखोरी करने वाले, एक्टिव हो जाते हैं, इसके लिए कड़ी मॉनिटरिंग जरूरी है, जहां से भी ऐसी शिकायतें आती हैं, वहां त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए। देश की हर सरकार और देश का हर नागरिक जब मिलकर चलेंगे, तो हम हर चुनौती को चुनौती दे सकते हैं। इसी आग्रह के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।
अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर, बहुत ही विपरीत असर हो रहा है, इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है।भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यह चुनौतियां आर्थिक भी हैं, नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी भी हैं और मानवीय भी हैं। लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं इसलिए यह आवश्यक है कि भारत की संसद से, इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए।जब से ये युद्ध शुरू हुआ है, तब से ही प्रभावित देशों में हर भारतीय को जरूरी मदद दी जा रही है। मैं खुद पश्चिम एशिया के ज्यादातर देश के राष्ट्र अध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है।सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। दुर्भाग्य से इस दौरान कुछ लोगों की दुखद मृत्यु हुई है और कुछ घायल हुए हैं।संकट की स्थिति में देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है। युद्ध शुरू होने के बाद से लेकर अब तक, 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। यानी सरकार संवेदनशील भी है, सतर्क भी है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है।
भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आती हैं। युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है। बावजूद इसके, हमारी सरकार का यह प्रयास रहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो। देश के सामान्य परिवारों को परेशानी भी कम से कम हो, इस पर हमारा फोकस रहा है। हम सभी जानते हैं, देश अपनी जरूरत के के 60% एलपीजी आयात करता है, इस पर भी लगातार काम किया गया है।
आज की इन परिस्थितियों में एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर बीते एक दशक में उठाए गए कदम और भी प्रासंगिक हो गए हैं। भारत ने बीते 11 वर्षों में अपनी एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन किया है। पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी, एलपीजी, ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था, वहीं आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट करता है।आज भारत के पास 53 लाख मैट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटेजिक पैट्रोलियम रिजर्व है और 65 लाख मैट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। हमारी तेल कंपनियों के पास जो रिजर्व रहता है, वो अलग है। बीते 11 वर्षों में हमारी रिफायनिंग कैपेसिटी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी बहुत काम आ रही है। पिछले 10-11 साल में एथेनॉल का उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर अभूतपूर्व काम हुआ है। एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक डेढ़ परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग कैपेसिटी थी। आज हम पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच गए हैं। इसके कारण प्रतिवर्ष करीब साढ़े चार करोड़ बैरल कम ऑयल इंपोर्ट करना पड़ रहा है, ऐसे ही रेलवे के बिजलीकरण से भी बहुत बड़ा फायदा हो रहा है।
हम जानते हैं की एनर्जी आज इकोनॉमी की रीड है और ग्लोबल एनर्जी नीड्स को पूरा करने वाले एक बड़ा सोर्स वेस्ट एशिया है। स्वाभाविक है कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्था वर्तमान संकट से प्रभावित हो रही है और भारत पर इसका कम से कम दुष्प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किया जा रहे हैं। भारत सरकार ने एक इंटर मिनिस्टीरियल ग्रुप भी बनाया है, ये ग्रुप हर रोज मिलता है मुझे पूरा भरोसा है कि सरकार और इंडस्ट्री के साझा प्रयासों से, हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे।
एक बड़ा सवाल यह है कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा? देश के किसानों ने हमारे अन्न के भंडार भर रखे हैं, इसलिए भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है। हमारा ये भी प्रयास है कि खरीफ सीजन की ठीक से बुआई हो सके। सरकार ने बीते सालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था भी की है। अतीत में भी हमारी सरकार ने दुनिया के संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया था। कोरोना और उस समय को युद्धों के दौरान, उस समय भी ग्लोबल सप्लाई चैन में disruption आ गई थी। दुनिया के बाजार में यूरिया की एक बोरी 3000 रूपये तक पहुंच गई, लेकिन भारत के किसानों को वही बोरी 300 रूपये से भी कम कीमत पर उपलब्ध करायुद्ध का एक बहुत बड़ा चैलेंज ये भी है कि भारत में गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है। आने वाले समय में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली के डिमांड बढ़ती जाएगी। फिलहाल देश के सभी पावर प्लांट्स के पर्याप्त कोल स्टॉक्स उपलब्ध हैं। भारत में लगातार दूसरे साल 100 करोड़ टन कोयला उत्पादन करने का रिकॉर्ड बनाया है। जहां तक डिप्लोमेसी की बात है, भारत की भूमिका स्पष्ट है शुरुआत से ही हमने इस संघर्ष को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। मैंने स्वयं भी पश्चिम एशिया के सभी संबंधित नेताओं से बातचीत की है। भारत हमेशा से मानवता के हित में और शांति के पक्ष में अपनी आवाज उठाता रहा है। मैं फिर कहूंगा, कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का समाधान है।

