
शहडोल जिले के पपौंध थाना क्षेत्र के हिरवार गांव में एक महिला ने कथित तौर पर अपने तीन नाबालिक बेटियों को जहर देकर हत्या कर दी और बाद में स्वयं आत्महत्या कर ली। शहडोल जिला में महिला सांसद हिमाद्री सिंह हैं पपौंध लोकसभा क्षेत्र वर्तमान में सीधी लोकसभा का हिस्सा है वहां भी महिला सांसद ऋतु पाठक रह चुकी हैं वर्तमान में डॉक्टर मिश्रा सांसद हैं 2-2 सांसदों की सरपरस्ती है। शहडोल जिले की भाजपा जो एक प्रकार का पैरेलर प्रशासनिक संगठन भी चलता है उसकी अध्यक्ष भी श्रीमती चपरा महिला है कुल मिलाकर शासन और प्रशासन मिलकर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कूड़े की ढेर की तरह योजनाएं लाता है इसके बावजूद भी अगर महिला होना अपमान महसूस करने का य सामाजिक सम्मान का कारण नहीं बनता, यदि वह सामाजिक सुरक्षा का अनुभव नहीं करती है और प्रथम दृश्य मे अनुमानित हत्या का कारण अगर यही बनता है तो हम देश के अमृत काल में किस अमृत को पी रहे हैं यह प्रमाणित होता है ..हालांकि निष्कर्ष पुलिस थाना क्षेत्र में अभी नहीं दिया है उम्मीद की जानी चाहिए की पुलिस और प्रशासन स्पष्ट तौर पर अपने निष्कर्ष प्रेस के जरिए सार्वजनिक करेगी। उन कारणों को सामने लाएगा जो इस महिला परिवार में उसकी आत्महत्या का कारण बने हैं किंतु अगर पुलिस और प्रशासन इन कारणों को किसी कारण जल्द स्पष्ट नहीं करता है तो भी यह महिला को महिला होने का अपमान से जुड़ने को प्रमाणित करेगा।
( त्रिलोकीनाथ )
तो सवाल यह उठता ही है कि पिछले 75 साल में देश की आजादी ने महिलाओं को क्या दिया है स्वाभिमान की जिंदगी जीने की गारंटी क्यों नहीं दे पाया है व्योहारी क्षेत्र में घटी इस घटना ने एक बार फिर सामाजिक चेतना को झकझोर दिया है कि हम किस प्रकार का निर्दय समाज बढ़ाने की रफ्तार में विकसित हो रहे हैं।
शुरू में सर्व शिक्षा अभियान चला व्योहारी क्षेत्र के एक गांव में शिक्षकों को भुगतान नहीं होने से मानसिक रूप से दबाव में आए एक आदिवासी शिक्षक ने अपने ही घर में चला रहे स्कूल मैं पढ़ रहे बच्चों में दो अबोध बच्चों की जिज्ञासु प्रतिक्रिया और बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण दो बच्चों की हत्या कर दी थी तब महिला बाल विकास के अधिकारी केंद्र स्तर से आए थे देश और प्रदेश में यह चर्चा का कारण बना था महिला आयोग के लोग भी आए लेकिन हम जहां के तहत खड़े हैं इस घटना को 25 साल तो बीत गए। उस घटना से हम कुछ नहीं सीख पाए क्योंकि विकास की दिशा भट्की हुई है विकास का पैमाना सामाजिक स्वस्थ चिंतन में विकास की बजाय भ्रष्टाचार उद्देश्य पूर्ति के लिए योजनाओं को लाना और ज्यादा से ज्यादा एक माफिया सिस्टम विकसित करके धन लूटना रह गया है। जब दो बच्चों की हत्या हुई थी तब व्योहारी सीधी लोकसभा का हिस्सा नहीं था लोकसभा का बंटवारा भी सामाजिक विकास को सुरक्षित करने में बुरी तरह से फेल हुआ है महिलाओं का प्रतिनिधित्व औंधे मुंह गिर पड़ा है हिरवार की घटना इसका प्रमाण पत्र है।
हिरवार में करोड़ों रुपए का एक प्रोजेक्ट जल संरक्षण के लिए जब आया और उसमें भ्रष्टाचार स्पष्ट रूप से उभर कर आया क्योंकि भ्रष्टाचार के सूत्र एक माफिया सिस्टम की तरह ऊपर से नीचे तक दीमक की तरह हिरवार जल संरक्षण प्रोजेक्ट को भ्रष्टाचार लक्ष्य पूर्ति का हिस्सा बना रहे थे वह भी उसी प्रकार से प्रमाणित होकर माफिया सिस्टम में दबा दिया गया है जैसे की सामाजिक सुधार और समाज की विकास के मामले में दो विद्यार्थी बच्चों की उन्हीं के पालक शिक्षक यानी संरक्षक द्वारा हत्या के बाद अब फिर से “महिला हूं, इसलिए अपमान का कारण हूं…”की दिशा को अपने ही पालक माता के द्वारा तीन बेटियों की हत्या कर देना सामाजिक ताना-बाना की गिरती स्थिति को प्रमाणित करता है कि हम पिछले 25 वर्ष में इस प्रमाण पत्र को प्रमाणित करने में लगे हुए हैं जो असुरक्षा और अपमान का हेतु है।
हिरवार की त्रासदी: महिलाओं की असुरक्षा, सामाजिक विफलता और आंकड़ों की कहानी
शहडोल जिले के पपौंध थाना क्षेत्र के हिरवार गांव में 31 मई 2026 को हुई घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा। एक 32 वर्षीय महिला ने कथित तौर पर अपनी तीन नाबालिग बेटियों को जहर देकर मार डाला और खुद भी आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच जारी है, लेकिन यह घटना महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और परिवारिक दबावों की गंभीर समस्या को उजागर करती है।
MP में लिंगानुपात और बाल लिंगानुपात में सुधार हुआ है, लेकिन सामाजिक समस्याएं बनी हुई हैं। शहडोल जिले में बाल लिंगानुपात (2011) 955 लड़कियां प्रति 1000 लड़के था, जो राज्य औसत से बेहतर था, लेकिन घटनाएं गहरी जड़ों की ओर इशारा करती हैं।
पिछले 25 वर्षों में कई समान घटनाएं हुई हैं, जैसे व्योहारी क्षेत्र में शिक्षक द्वारा बच्चों की हत्या। विकास योजनाओं (सर्व शिक्षा अभियान, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, जल संरक्षण प्रोजेक्ट आदि) के बावजूद भ्रष्टाचार और क्रियान्वयन की कमी ने सामाजिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है।हिरवार जैसी घटनाएं व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक दबाव, लिंग-आधारित हिंसा, मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी और परिवारिक संरचना की विफलता का परिणाम हैं। पिछले 75 वर्षों में आजादी ने कानूनी अधिकार, शिक्षा और आरक्षण दिए, लेकिन स्वाभिमान और सुरक्षा की गारंटी अभी पूरी नहीं हुई।
आखिर यह परिस्थितियों क्यों बनी हुई है व्यवहारी क्षेत्र में इस पर क्या कोई कमेटी या सीधी और शहडोल के लोकसभा सांसद मिलकर कोई निष्कर्ष प्रदान करेंगे या फिर वह अपनी मौत मर गए जैसे प्रयागराज के कुंभ में मर गए जैसे बाणसागर नहर में डूब कर मर गए वैसे ही यह महिला परिवार स्त्री जाति अपनी मौत मर गई ऐसा दोनों सांसद प्रमाणित करेंगे यह देखने की बात होगी फिलहाल सन्नाटा है गांव में भी शहर में भी समझ में भी और प्रदेश तथा देश में भी लेकिन सन्नाटा अपने-अपने तरीके का है क्योंकि क्षेत्र का माफिया सरगना है सामाजिक विकास शून्य है सोचिए और सोचते रहेंगे क्या इसीलिए भारत की आजादी आई थी…?

