
जब कभी शहडोल में डिग्री कॉलेज में जो वर्तमान में शंभू नाथ विश्वविद्यालय का हिस्सा है लोकतंत्र जिंदा था स्टूडेंट यूनियन के चुनाव होते थे डिग्री कॉलेज के चुनाव था राजीव उपाध्याय चुनाव हार गया कोई खेल हो गया टेक्निकल कारणों में जैसे अभी जंतर मंतर में सोनम वांगचुक को तकनीकी कारण दिखाकर हाईजैक कर लिया गया )और अगली बार शहडोल डिग्री कॉलेज का चुनाव वही राजीव चुनाव जीतने का रिकॉर्ड तोड़ दिया क्योंकि डिग्री कॉलेज युवाओं की फौज थी उसमें डिसीजन सुनाया था जंतर मंतर में जो हो रहा है उसका परिणाम इसे कमजोर नहीं आएगा… करीब 16 घंटे बाद। क्योंकि यह युवाओं का निर्णय है इसे राजनीतिक दल का भी समर्थन मिल गया है किसानों का भी लेकिन वह कितना खतरनाक होगा अगर भड़क गया… यदि गांधीवादी तरीके से चला तो दमन और शोषण और बढ़ेगा क्योंकि 20 दिन में डंडे के बल पर तानाशाही पर विश्वास रखने वाली सरकार का बौद्धिक मस्तिष्क अगर अभी नहीं सोच पाया है तो 20 घंटे में कोई हृदय परिवर्तन होगा समझना थोड़ा मुश्किल है अनुभव यही बताता है कि इस सरकार के दौरान जो भी गांधीवादी तरीके से धरना अनशन हुए हैं उनका जो नतीजा निकला है खास तौर पर कोविद महामारी के दौर में किसानों का आंदोलन को जिस 700 किसने की हत्याओं के बाद घटनाएं बदली है उसे देखकर यह आंदोलन का क्या रुख होगा तब जबकि नेतृत्व अनुभवहीन युवाओं के हाथ में है कल्पना करना थोड़ा मुश्किल है नेपाल के घटनाक्रम को देखें तो भयावह है अनुभव से सरकार ने कुछ सीखा नहीं और सोनम वांगचुक को बेहद शातिराना तरीके से बेहद अभद्र और निर्मम तरीके से हाईजैक करके उसे कथित हाई कोर्ट के आदेश का कथित पालन किया गया उसे स्थितियां बनने की बजाय और बिगड़ गई है युवा आक्रोश ज्वालामुखी कगार पर पहुंचाने का काम किया गया है। कि शायद इन्हें कुचल दिया जाएगा किंतु जो भीड़ बढ़ती चली जा रही है वह 20 घंटे बाद जंतर मंतर से संसद भवन तक कितने प्रकार के अवरोधों से रोकी जाएगी इसकी कल्पना नहीं की जा सकती उसका परिणाम क्या होगा उसकी भी कल्पना नहीं की जा सकती।
हां कल्पना यह जरूर की जा सकती है की संभावनाओं को संवेदना के साथ जोड़कर सरकार को मध्य मार्ग का रास्ता जो गांधीवादी विचार से होकर निकलता है निर्णय लेना चाहिए किंतु गांधीवाद सरकार के लिए दिखाने का मुखौटा है जिस विचारधारा से यह सरकार मूल रूप में जुड़ी हुई है उसी के एक समर्थन में गांधीवाद के केंद्र महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी ऐसे में गांधीवादी मध्य मार्ग पर यह विश्वास नहीं करती है यह तो सुनिश्चित है यदि उसने हृदय परिवर्तन किया तो वह क्रांतिकारी निर्णय होगा जो देश के लिए उतना ही जरूरी है जितना की जंतर मंतर में युवाओं की मांग जरूरी है
तो क्या 20 घंटे बाद भारत में कोई बड़ा क्रांतिकारी घटनाक्रम होने जा रहा है अगर बढ़ रहे भीड़ के घटनाक्रम सड़क पर उतरेंगे तो हम इसे शोषण के बाद क्रांति की भाषा में शायद समझ पाए या फिर कोई नया जलियांवाला बाग मैं कोई नया जनरल टायर अपने तुगलकी फरमान से किसी संयोजित षड्यंत्र के तहत उसे अंजाम देगा। अलग-अलग सोशल मीडिया में स्पष्ट तौर पर यह आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं कि उनके ही लोग गुंडागर्दी कर सकते हैं आंदोलन में घुसकर कुछ ऐसे घटनाक्रम को रचना दे सकते हैं जो जनरल डायर के लिए वरदान साबित हो।
जो भी हो बात कुछ बड़ी नहीं थी परीक्षाओं के पर्चे लीक करवा कर योग्यता की हत्या तो होती ही रही है। किंतु इसे संरक्षण देने का काम जिस बेशर्मी से यह सरकार कर रही है वह एक खतरनाक प्रयोग भी है अन्यथा लोकतंत्र में इतनी संभावना तो रहती है की कोई बहाना प्रकार किसी मंत्री को हटा दिया जाए और स्वस्थ लोकतंत्र का सर्कस चला रहे।
शहडोल में जिला पंचायत में शिक्षा कुर्मी की नियुक्तियां जनपद और जिला पंचायत स्तर से उसे वक्त हो रही थी जब मैं जिला पंचायत शहडोल का इकलौता मान्यता प्राप्त समाचार पत्र विजय आश्रम का पत्रकार था मैंने नजदीक से देखा की फर्जी नंबर धारी, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगवाकर नियुक्ति नियुक्ति का खेल खेला जा रहा था तब कलेक्टर के साथ एक मीटिंग में जिला पंचायत सदस्य के ऊपर यह तंज करते हुए भी मैंने देखा की ₹5000 में अनुभव प्रमाण पत्र बिकता है तो बनवा लें नियुक्तियां हो जाएगी और शहडोल में ऐसा हुआ भी इसे रोकने के लिए मैं तब जैसिंह नगर जनपद में जहां 267 पद शिक्षा कर्मी वर्ग 3 में पदों की पंजीरी बाट पर मुझे क्रोध आया और मैंने तब के कलेक्टर टी धर्माराव से विस्तार से चर्चा की दूसरे दिन जनपद में छापा पड़ गया और परिणाम स्वरूप 267 पद हमेशा के लिए लगभग विलुप्त हो गए मैं अनुभव से इस प्रकार का भविष्य में काम न करने का निर्णय लिया।
जब मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा व्यापम घोटाले के हीरो बन गए और अंत में उनकी मौत भी हो गई उसके साथ व्यापम घोटाले का पूरा रहस्य भी आज तक दफन है घटनाएं घटी तो मुझे जैसिंहनगर जनपद की याद आती रही।
इत्तेफाक से पर्चा लीक ऐसी ही जैसी नगर जैसी घटनाओं का राष्ट्रीय स्वरूप है जिसमें राजनेता शिक्षा माफिया के साथ मिलकर सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर रहे थे और ऐसे में अगर जिम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवा वर्ग चाहता है तो वह उसका न्याय है सरकार को यह सोचने में समय लग रहा है यह आश्चर्य है या फिर वह शिक्षा माफिया को पालना चाहती है ताकि देश का युवा गुलामों की तरह जीना सीख ले… यह युवा मन का आक्रोश भी है.
जो भी हो 20 घंटे शेष हैं जब मैं आलेख तैयार कर रहा हूं हर घंटे बेहद खतरनाक बेहद संवेदनशील और भारत की आजादी के मद्देनजर बेहद संक्रमण काल है। सिर्फ मीडिया को हिंदू मुस्लिम और तमाम प्रकार के मूर्खतापूर्ण मुद्दों में मूर्ख लड़ाई की तरह इस्तेमाल करके वास्तविक मुद्दे को भुलाया नहीं जा सकता। इसलिए 20 घंटे का यह सफर पूरे भारत के नागरिकों के लिए बहुत ही रोमांच कारी यात्रा के रूप में देखना चाहिए। मैंने देखा है एक सांसद जो दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है चंद्रशेखर आजाद जो जंतर मंतर में रात में चौकीदारी कर रहा है की सरकार के लोग और उनके आदमी तथा प्रशासनिक लोग क्या हरकत करने जा रहे हैं उन्हें भी इन परिस्थितियों का भलीभांति अनुभव है।उसका इंटरव्यू ब्राह्मण समुदाय से आने वाले अनुभव पांडे ने पिंच के लिए कवर किया है। तो यहां उच्च जाति और दलित जाति दोनों एक साथ मिलकर बन रही परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रही है तो कुछ तो होने वाला है सतर्क रहिए और रात के सोने के पहले जरूर जंतर मंतर को एक नजर देखिए और जब नींद खुल जाए तब देखिए और जब सुबह हो तब देखिए क्योंकि सुबह 9:00 बजे से यह क्रांतिकारी यात्रा अपने अंजाम की ओर बढ़ेगी…

