
21 जुलाई 2026 के समाचार पत्रों को जरूर देखना चाहिए किसका क्या नजरिया था कॉर्पोरेट पॉलिटिकल इंडस्ट्री और भाजपा सरकार के 14 वर्षों में 20 जुलाई 2026 की दिल्ली में युवाओं की अब तक इस सबसे बड़ी रैली को लेकर वह किस प्रकार से इसका प्रकाशन किया यह भी देखना चाहिए कि जब मुख्य धारा का अखबार और मीडिया इसे इग्नोर कर रहा था इसके बाद युद्ध लगभग एक महीने से चल रहे जंतर मंतर के युवाओं के आंदोलन में अंत में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बुलाकर जब दो घंटा बाद इंतजार करने के बाद आंदोलनकारी युवाओं को मिले तो उन्होंने कौन सी तीन मांग रखी इसे भारतीय पत्रकारिता ने कैसे कवर किया है..
उनकी तीन प्रमुख मांगों में 20 जुलाई को लाखों युवाओं के नेतृत्व विहीन कर देने के बाद आंदोलन अराजक ना हो जाए इस आशंका से तत्काल पहली मांग हाईजैक हो चुके १-सोनम वांगचुक के वीडियो के जरिए शांति की अपील के जरिए शांति की अपील की मांग, २-शिक्षा मंत्रीधर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा हो यह बर्खास्त किया जाए दूसरी मांग ३-और नीट पेपर की लीक हो जाने की वजह से मर गए छात्र परिवारों को एक करोड रुपए राहत राशि की मांग को अखबारों ने किसी नजर से देखा यह भी देखना चाहिए….
जब हम समीक्षा करते हैं तो कई अखबार इसे प्रमुखता से महत्व देते हैं तो कुछ अखबार अपने फ्रेंड पेज में विज्ञापन भर देते हैं यह भी देखना चाहिए पत्रकारिता वेश्यावृत्ति का धंधा नहीं है धंधा तो यह भी अच्छा है क्योंकि पैसा जमीन और इज्जत बेच के कमाया जाता है गैरकानूनी है लेकिन पारदर्शी है
इसलिए नियम है और बाजार में बिकता भी है इसलिए भी देखा जाना चाहिए की कौन से अखबार पैसा कमाने का धंधा कर रही थे। और कौन से अखबार पत्रकारिता कर रहे थे मीडिया की छोड़िए वह तो अपवाह ही फैला रहा था जब युवाओं को जलियांवाला बाग की तरह घेर कर पुलिस पीट रही थी हाथ पैर तोड़ रही थी सर फोड़ रही थी खून बहाहोली खेल रही थी हां गोली नहीं मार रही थी मीडिया अपना धंधा कर रहा था अपवाद मीडिया को छोड़ दे उन्हें युवाओं की गुस्सा का और धन्यवाद मीडिया के करतूत का अपमान सहना पड़ रहा था यही नया भारत है… इसी तरह अपने लोकल अखबारों को भी देखना चाहिए किसकी कितनी औकात है… और वह कितना पुराना अखबार भी है

