
छात्र आंदोलन, राजनीतिक टकराव और सवालों की बारिश
कल दिल्ली में दो महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ताएं हुईं, जो एक ही मुद्दे — छात्रों के प्रदर्शन और पेपर लीक पर केंद्रित थीं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले छात्रों के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया, जबकि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उसके कुछ घंटों बाद जवाबी हमला बोलते हुए विपक्ष शासित राज्यों में पेपर लीक की घटनाओं का ब्योरा पेश किया। यह टकराव सिर्फ दो पार्टियों का नहीं, बल्कि वर्तमान भारतीय राजनीति की विसंगतियों और संभावनाओं दोनों को उजागर करता है।
राहुल गांधी ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस दमन की घटनाओं पर फोकस किया। उन्होंने तीन प्रमुख मांगें रखीं — प्रदर्शन में दमन की स्वतंत्र जांच, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा माफी मांगना। शर्मनाक वीडियो क्लिप्स दिखाकर उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि युवाओं और छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार हुआ। यह एक विपक्षी नेता का पारंपरिक कर्तव्य है — शासन की कमियों को उजागर करना।
दूसरी तरफ जेपी नड्डा ने “मेरा पेपर लीक, तेरा पेपर लीक” वाली लाइन पर जोर देते हुए कहा कि समस्या केवल भाजपा शासित राज्यों तक सीमित नहीं है। उन्होंने गैर-भाजपा सरकारों में हुई पेपर लीक घटनाओं की सूची पेश की और कहा कि इस मुद्दे पर गंभीरता से बैठकर चर्चा होनी चाहिए। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि नड्डा ने छात्र प्रतिनिधियों (सोनम वांगचुक समेत) को 20 तारीख को अपने घर में देर तक रोके रखा, उनकी मांगों (शांति अपील, मंत्री का इस्तीफा, मृतकों को मुआवजा) पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला और आंदोलन को हिंसक होने तक समय बर्बाद किया।
कल दिल्ली में दो पत्रकार वार्ताएं आयोजित की गई एक कांग्रेस के राहुल गांधी द्वारा दूसरी भाजपा के जेपी नड्डा के द्वारा 8:30 बजे रात
पहले पत्रकार वार्ता में राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दों को फोकस करके तीन मांगों को पूरा करने की बात कही छात्रों के प्रदर्शन में दमन की जांच कार्यवाही, शिक्षा मंत्रीधर्मेंद्र प्रधान काइस्तीफा, और प्रधानमंत्री द्वारा माफी मांगा जाना। उन्होंने उन शर्मनाक वीडियो क्लिप भी दिखाया की किस प्रकार से दमन हुआ है
बहुत सोच समझ कर मंथन के बाद प्रतिकार में भाजपा केपी नाडा की पत्रकार वार्ता मैं तेरा पेपर लीक मेरा पेपर लीक यानी भाजपा सरकार के अलावा गैर भाजपा सरकारों में जो पेपर लीक हुए हैं उसकी उपलब्धि बता रहे थे इसलिए हिसाब किताब बराबर के तर्ज पर अपनी बात रख रही थे की दोनों के शासन में पेपर लीक होता है और बैठकर इसमें मनोरंजन करें कुछ इस तर्ज पर संसद में बात करने की बात कर रहे थे उन्होंने प्रदर्शन में छात्र और छात्राओं बच्चों के साथ भी जो शर्मनाक मारपीट हुई अभद्रता हुई उसके लेकर बड़ी बेशर्मी से किनारा काट लिया।
यह वही जेपी नड्डा है जो भाजपा की तरफ से नियुक्त हुए थे कि 20 तारीख को प्रदर्शन के युवाओं को बुलाकर दिनभर अपने घर में हाईजैक कर रखा उनके तीन बिंदु मांग सोनम वांगचुक के द्वारा शांति की अपील का वीडियो जारी करने, शिक्षा मंत्री प्रधान का इस्तीफा और एक करोड रुपए मृत छात्रों को राहत राशि के संबंध में कोई निष्कर्ष निकलना निकालकर उनका समय नष्ट किया और आंदोलन को हिंसक परिणीति पहुंचने तक प्रतिनिधियों को अपने यहां हाईजैक कर रखा था।
तो क्या म मान कर चलें हमारी सरकार हमारे साथ छल कर रही है राजनीतिक रोटियां सेक रही है जैसा कि आप विपक्षी पार्टी पर भी लग रहा है किंतु यह खुशी की बात है की शिक्षा और छात्र प्रदर्शन का मामला इन राजनेताओं के केंद्र का विषय बनता जा रहा है अन्यथा मंदिर और धर्म का नशा ड्रग्स उसे पर होने वाली माफिया गिरी पैसे की चोरी और तस्करी के अलावा जातिवाद का धंधा ही इनके केंद्र में रहा है इस संभावना बन रही है कि देर से ही सही राजनीति के केंद्र में महत्वपूर्ण मुद्दे विषय वस्तु बनेंगे। सोनम वांगचुक के नेतृत्व में जंतर मंतर के आंदोलन का अगर यह निष्कर्ष निकलता है तो उपलब्धि होगी बहरहाल अघोषित तरीके से चल रही इमरजेंसी में अभिव्यक्ति अपना रास्ता निकाल ही लेती है वह राजनीति की जरूरत बनी जाती है

