
क्या भविष्य की राजनीति का मॉडल दिल्ली का दिल नगर निगम की राजनीति बनेगी या फिर पंजाब में चौरी-चौरा घटना को नए सिरे से अंजाम देने का रास्ता निकाला जाएगा अथवा अंग्रेजों के शासन काल लगभग मृत्युदंड देने जैसे हालात के लिए काला-पानी का नया अड्डा पूर्वोत्तर के राज्य प्रताड़ना के लिए बन जाएंगे…. यह सब बातें 2024 की लोकसभा चुनाव के पहले दिखने लगी….. क्योंकि भारतीय राजनीति में नए ककहरा की अंग्रेजी में ए फॉर अदानी, हिंदी में अ अदानी को लोकतंत्र के अमृतकाल में नए ककहरा को सिखाया जा रहा है….तो बंधु “प्रत्यक्षण किम् प्रमाणम” यही है भविष्य की राजनीति क्या हम ऐसा सोच सकते हैं (त्रिलोकीनाथ)
पिछले 3 माह से देश का दिल दिल्ली, नगर निगम चुनाव में पढ़े लिखे और अनपढ़ जमात की अराजकता का जलजला है.. और कल इसकी इंतहा हो गई क्योंकि विकास की रफ्तार की सीमाओं को तोड़ते हुए दिल्ली नगर निगम में पूरी रात लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए काम करते दिखे.. जिससे जो बना लात जूता-मुक्का-गाली-गलौज और वह सब कुछ जो हम यहां बैठकर नहीं सोच सकते दिल्ली नगर निगम में जमकर हुआ… क्योंकि वहां चुनाव होना था| वैसे चुनाव तो नगर निगम के मुखिया मेयर का बिना न्यायपालिका के हस्तक्षेप के भी नहीं हुआ उसे 3 माह बाद अंततः न्यायपालिका के निर्देश से संपन्न कराया. शैली, आम आदमी पार्टी के मेयर बनने के बाद अलग-अलग विभागों के प्रतिनिधियों का चुनाव होना था| जब से कॉर्पोरेट जगत की भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है तभी से उन्हें मुंह चिढ़ाने वाली आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता में कब्जा करके बैठी है| और उसका विकास भाजपा के राष्ट्रीय विकास से कमतर नहीं है.. इसलिए जब दिल्ली में नगर निगम में आम आदमी पार्टी का कब्जा हो गया तो भाजपा के लिए यह अपच हो जाने वाली घटना के रूप में देखा गया .और शायद इसीलिए भारतीय जनता पार्टी ,आम आदमी पार्टी को किसी भी हालत में काम नहीं करने देना चाहती और इसी काम नहीं करने देने के चक्कर में विकास की रफ्तार ने दिल्ली नगर निगम को सोने नहीं दिया.
तो दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के लिए पंजाब में एक बड़ी चुनौती सामने आ गई है, कभी चौरी-चौरा मैं थाने में आग लगा देने वाली घटना को परिवर्तित करने के दृष्टिकोण से अमृतसर में एक थाने में जबरदस्त घेराबंदी हुई और खुलेआम अपने परंपरागत अस्त्र-शस्त्र के साथ जनसमूह थाने में हमला कर दिया, आग नहीं लगाया. यह भी एक नए प्रकार का विकास है.. देश में आजादी के बाद यह प्रयास लोकतंत्र के खतरनाक चेहरे को दिखाता है…
इन सबसे परे आतंकवादियों से भी ज्यादा खतरनाक घटना के रूप में भारत सरकार की गैर जानकारी में असम सरकार की पुलिस दिल्ली में कांग्रेस नेता प्रवक्ता पवन खेड़ा को हवाई अड्डे में हवाई जहाज से उतारकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया.. कांग्रेस प्रवक्ता पर आरोप था कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता के बारे में अपशब्द कहा है.. जिसकी रिपोर्ट भाजपा शासित उत्तर प्रदेश और असम में की गई थी और इसीलिए असम सरकार प्रतियोगिता में विकास की छलांग लगाकर दिल्ली हवाई अड्डे में पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने पहुंच गई. इसके पहले भी पूर्वोत्तर के राज्य में गुजरात से एक कांग्रेसी नेता को ऐसे ही किसी प्रकरण में असम में एफ आई आर दर्ज करके गिरफ्तार किया गया था… तो क्या असम प्रताड़ना का नया राजनैतिक केंद्र बनता जा रहा है…..? यह प्रश्न भी उठने लगा है.
,यह अलग बात है कि पवन खेड़ा को उच्चतम न्यायालय ने तत्काल राहत देते हुए जमानत दे दी अपशब्द बोलने के लिए और पवन खेड़ा ने भी अपशब्द बोलने के लिए पहले भी माफी मांग ली थी और बाद में भी माफी मांगने के पक्ष में हैं. क्योंकि उनकी जबान फिसल गई थी…..
इन घटनाओं से क्या साबित होता है, क्या भविष्य की राजनीति का मॉडल दिल्ली का दिल नगर निगम की राजनीति बनेगी या फिर पंजाब में चौरी-चौरा घटना को नए सिरे से अंजाम देने का रास्ता निकाला जाएगा अथवा अंग्रेजों के शासन काल लगभग मृत्युदंड देने जैसे हालात के लिए काला-पानी का नया अड्डा पूर्वोत्तर के राज्य प्रताड़ना के लिए बन जाएंगे…. यह सब बातें 2024 की लोकसभा चुनाव के पहले दिखने लगी….. क्योंकि भारतीय राजनीति में नए ककहरा की अ अनार की जगह अब फिर अंग्रेजी में ए फॉर अदानी, हिंदी में अ अदानी को लोकतंत्र के अमृतकाल में नए ककहरा को सिखाया जा रहा है….तो बंधु “प्रत्यक्षण किम् प्रमाणम: यही है भविष्य की राजनीति क्या हम ऐसा सोच सकते हैं…
इसलिए यह अमृत काल की राजनीति का प्रसव पीड़ा मात्र है… देखते चलिए, आगे आगे होता है क्या… यह अलग बात है की बहुत जल्दी अपने लोगों को अर्थव्यवस्था का विश्व गुरु बनाने के चक्कर में लोकतंत्र घृणित तरीके से पतित होता जा रहा है…. और दिए गए बलिदान श्रापित होते जा रहे हैं…. कहते हैं बीसवीं सदी के और 21वीं सदी के इमरजेंसी में कुछ तो परिवर्तन होगा.. तो हमें इसके लिए भी मानसिक तौर पर तैयार रहना चाहिए और कोई बात नहीं है…. बोलने की आजादी तो होगी लेकिन बोलना वह होगा जो उनके हित के खिलाफ ना हो…. बाकी आप स्वतंत्र हैं, क्योंकि देश स्वतंत्र है.. और स्वतंत्रता पर गर्व करना चाहिए… क्योंकि गर्व करने के लिए एक और कारण मिल गया है… विश्व बैंक में हमारा भारतीय मूल का अजय उसका मुखिया बनने जा रहा है……

