
प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लिका अर्जुन खड़गे ने कहा है r.s.s. जितना भी प्रयास कर ले लेकिन इतिहास बदलने वाला नहीं है, जबकि राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कटाक्ष किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत के अनुरूप आधुनिक भारतीय इतिहास 2014 से आरंभ होना चाहिए .बहराल यह अजीबोगरीब संयोग है कि जब चीन, अरुणाचल प्रदेश के कई नाम बदल कर भारत के कई क्षेत्रों पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है तभी एनसीईआरटी के पाठ्य पुस्तकों में इतिहास के कई महत्वपूर्ण तथ्य इस बहाने बदले गए हैं की पाठ्यक्रम को कम करना है. किंतु इससे वह वास्तविक इतिहास से छेड़खानी करते नजर आते हैं .जैसे कि चीन अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों से छेड़खानी करता नजर आता है. यह संयोग अजीबोगरीब है किंतु एक सच है.
———————————————————————–त्रिलोकीनाथ———-
दैनिक जनसत्ता में प्रकाशित खबरों के अनुसार अमेरिका ने कहा है कि वह अरुणाचल प्रदेश को भारत के अभिन्न अंग के रूप में मान्यता देता है और क्षेत्रीय दावों के तहत स्थानीय इलाकों का नाम बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास का कड़ा विरोध करता है। अमेरिका की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने रविवार को अरुणाचल प्रदेश के 11स्थानों के मानकीकृत नाम जारी किए थे। चीन इस क्षेत्र को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताकर इस पर अपना दावा करता है। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरिन ज्यां-पियरे ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका उस क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश) को लंबे समय से (भारत के अभिन्न अंग के रूप में) मान्यता देता रहा है। हम इलाकों का नाम बदलकर क्षेत्रीय दावों को आगे बढ़ाने के किसी भी एकतरफा प्रयास का कड़ा विरोध करते हैं। अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों का चीन द्वारा पुनः नामकरण किए जाने के बीच भारत ने मंगलवार को कहा कि यह राज्य भारत का अभिन्न एवं अटूट हिस्सा है और ‘मनगढ़त’ नाम रखने से यह हकीकत बदल नहीं जाएगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हमने ऐसी खबरें देखी हैं। यह पहली बार नहीं है, जब चीन ने ऐसी कोशिश की है। हम इसे सिरे से खारिज करते हैं।
एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक से महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े कुछ अंशों को बिना कोई अधिसूचना जारी किए हटाने
पर उठे विवाद के बीच परिषद के प्रमुख दिनेश सकलानी ने बुधवार को कहा कि यह अनजाने में चूक हो सकती है कि पिछले वर्ष पाठ्यपुस्तकों को युक्तिसंगत बनाने की कवायद में कुछ अंशों को हटाने की घोषणा नहीं की गई। सकलानी ने कहा कि युक्तिसंगत बनाने की प्रक्रिया में सभी जरूरी प्रक्रियाओं कापालन किया गया जिसमें कई पाठों में से कई अंशों को कम किया गया। एनसीईआरटी के प्रमुख ने कहा कि इसे विषयांतर करके नहीं देखा जाना चाहिए और पाठ्यपुस्तक में किए गए बदलावों के बारे में एक दो दिनों में अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब एनसीईआरटी की नई पुस्तक बाजार में आने पर यह पाया गया कि पिछले वर्ष पाठ्यपुस्तक को युक्तिसंगत बनाने के बाद जारी अधिसूचना की तुलना में कुछ और सामग्रियां उसमें मौजूद नहीं एनसीईआरटी की नए शैक्षणिक सत्र के लिए
12वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान कीपाठ्यपुस्तक में ‘महात्मा गांधी की मौत का देश में सांप्रदायिक स्थिति पर प्रभाव, गांधी की हिंदू मुसिलम एकता की अवधारणा ने हिंदू कट्टरपंथियों को उकसाया, और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठन पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध सहित कई पाठ्य अंश नहीं हैं .सकलानी ने कहा है कि विषय विशेषज्ञ पैनल ने गांधी पर कुछ अंशों को हटाने की सिफारिश की थी इसी पिछले वर्ष स्वीकार कर लिया गया था. उन्होंने कहा कि कोई भी चीज रातों-रात नहीं हटाई जा सकती एक उपयुक्त प्रक्रिया और पेशेवर आचार का पालन करना होता है इसके पीछे कोई खास मकसद नहीं है.
इस तरह वसुधैव कुटुंबकम का नारा देने वाले भारत के इस महामंत्र के दौर में एक तरफ देश के अंदर आमूलचूल बदलाव का प्रयास हो रहा है तो दूसरी तरफ दुनिया में चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश के कई गांव के नाम बदलने का प्रयास कर रहा है यह संयोग अजीबोगरीब है लेकिन सच है

