
बजरंगबली को हिंदी आती है क्योंकि नरेंद्र मोदी हिंदी में बोले थे किंतु चुनाव कर्नाटक का हो रहा था कन्नड़ में बटन दबाते वक्त भाषा नहीं समझ पाए और पंजे में बटन दबा दिए. मोदी जी का यह बोलना बेकार रहा कि बजरंगबली का नाम लेकर बटन दबा देना… उम्मीद थी के सामने की तरफ से अल्लाह ताला भी बटन दबाने के लिए उतर पड़ेंगे… लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी। इसलिए की चुनाव आयोग को हिंदी ज्यादा समझ में आती थी इसलिए वह आचार संहिता की कार्यवाही नहीं किए क्योंकि उन्हें मालूम था कन्नड़ में आचार संहिता हिंदी को नहीं समझ पा रही है।इस दौरान बजरंग जी महिलाओं के सम्मान बचाने के लिए जंतर मंतर में धरने में बैठ गए उम्मीद रही की जब गृहमंत्री और उनके राम प्रधानमंत्री इलेक्शन ड्यूटी से फुर्सत पाएंगे भारत की गोल्ड मेडलिस्ट महिलाओं की इज्जत और मान मर्यादा से खिलवाड़ करने वाले अपने सांसद को सबक सिखाएंगे । क्योंकि अपने सांसद को योगी जी , उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अनैतिकता यौन प्रताड़ना के मामले में दबंग डॉन नुमा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के मामले में पोक्सो एक्ट ( नाबालिक के साथ यौन प्रताड़ना )लगने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने देना चाहते। लेकिन ब्रज भूषण शरण सिंह ने तो दावा ही ठोक दिया कि जब गृहमंत्री और प्रधानमंत्री बोलेंगे याने शाह और मोदी बोलेंगे तब वह इस्तीफा दे देंगे। लगे हाथ उन्होंने चड्ढा का भी नाम दिया बावजूद दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी में आधी महिला सदस्यों में एक भी महिला ने यौन प्रताड़ना के मामले में अपना जुबान नहीं खोलना चाहा,
______________________( त्रिलोकीनाथ )_________________________
ढेर सारे साधु संत साध्वी की भरमार होने के बाद भी नैतिकता और धर्म के दरवाजे पर कोई भी दबंग सांसद के खिलाफ बोलकर मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता था सब अज्ञात भय और डर से जैसे घबराए हुए थे, अगर सुप्रीम कोर्ट में जाने की औकात ओलंपिक और एशियाई खेल के सितारे गोल्ड मेडलिस्ट महिला पहलवान भी अपने पास नहीं रखती तो सुप्रीम कोर्ट भी शायद ही उनकी बात सुनता..? अपनी योग्यता और क्षमता उस समझने के बाद अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए जंतर मंतर में आम जनता की तरह न्याय के लिए धरने में बैठ गई.
भाजपा दिल्ली में दारू के धंधे के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल के बंगले की सजावट से जले हुए थे .क्योंकि की 45 करोड़ रुपए मैं सजावट हुई है इसलिए टिकट लगाकर हमें भी दिखाओ और महिला पहलवानों की इज्जत आबरू के मामले में धरने के मुकाबले में अपनी भारी भीड़ और मोदी और गोदी मीडिया दोनों के साथ पहलवानों के धरने के मुकाबले में धरना कर रहे थे ताकि मेघालय से ट्विटर के जरिए अपने राज्य को आग में जलने से बचाने की भीख मांगने वाली मेरीकाम की बात भी बहुत सुनाई न दे .तो मेघालय जलता रहा. आखिर कब तक जलेगा …जब थक जाएंगे फिर ठीक हो जाएंगे .
बहरहाल 1 महीने को होने को आ रहा है चुनाव कर्नाटक के खत्म हो गए हैं बजरंगबली ने भाजपा को अनसुना कर दिया है और कांग्रेश चुनाव जीत गई है इस बीच में बागेश्वर बाबा यानी बजरंगबली के नाम पर धीरेंद्र शास्त्री जी का धर्म का धंधा हिंदू राष्ट्र के सपने को उसी तरह सजाता रहा जैसे “वारिस दे पंजाब” का अमृतपाल खालीस्थान का सपना सजाता रहा. बहुत ही कम समय में जल्द ही उसे कार से भागते देखा गया और चमत्कारिक ढंग से अलग-अलग जगह प्रकट होते भी .अंततः 21वीं सदी के काला-पानी में याने आसाम में उसे भेज दिया गया.
इन सबके बीच में अपनी इज्जत आबरू के साथ भारत की तमाम लड़कियों की इज्जत और आबरू के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कार्यवाही हो एफ आई आर सिर्फ नहीं इसलिए गिरफ्तारी तत्काल हो; महिला पहलवान गोल्ड मेडलिस्ट तमाम प्रकार के अपमान से जंतर-मंतर में बैठी रही
उम्मीद रहा कि यह रहस्य आखिर बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री के जरिए पर्ची खोलकर क्यों नहीं बता पाए कि सीता का अपहरण करने रावण भारतीय कुश्ती संघ के अंदर अगर दागदार है तो कितना दागदार है…. धीरेंद्र शास्त्री को तो पर्ची में लिखकर बता देना चाहिए था मामला 1 मिनट में सुलझ जाता…और पूरी दुनिया में भारत की थू थू होने को रोका जाता …क्योंकि कानून और संपूर्ण व्यवस्था महामानव ब्रज भूषण शरण सिंह और उनके संरक्षण दाता से बागेश्वर बाबा ;हिंदी जानते हैं निश्चित रूप से नहीं डरते हैं और डर और आतंकवाद यह धंधा हिंदी भाषी क्षेत्र में भी आतंकवादी हो गया कि हमारी गोल्ड मेडलिस्ट महिला पहलवानों को जंतर मंतर में जनता दरबार में आना पड़ा..
किंतु धीरेंद्र शास्त्री को हिंदू राष्ट्र की ज्यादा चिंता है बजाएं भारत की लड़कियों की मान और सम्मान की… जो 21वीं सदी की माता सीता का प्रतिरूप ही हैं. शायद धीरेंद्र को भी यह मालूम हो गया है की जब त्रेता में ही अग्नि परीक्षा होने के बाद भी भगवान राम ने सीता को त्याग दिया था तो क्या फर्क पड़ता है कि अगर महिला पहलवानों के साथ कुछ हुआ भी है या वही झूठ कह रही हैं…? और इससे कुछ होने जाने वाला नहीं है क्योंकि धीरेंद्र को मालूम है कि हिंदू राष्ट्र के कल्पना कारों के पास एक ऐसी वाशिंग मशीन है जो बिना श्रीमद् भागवत सुनाएं ही मोक्ष के द्वार खोल देती है… या ने उसे पवित्र घोषित कर देती है. ऐसे में बृजभूषण शरण सिंह जैसे लोगों के बारे में पर्ची क्यों खोली जाए…?
क्योंकि आवेदन ही किसी ने नहीं लगाया था .यही तो चुनाव आयोग भी कह रहा था की बजरंगबली और भगवान राम चुनाव कर्नाटक में प्रधानमंत्री ने उतारे थे चुनाव लड़ने के लिए तब किसी ने हंगामा क्यों नहीं खड़ा किया ..और अगर जंतर-मंतर में हंगामा हो रहा था तो उसे देखता कौन है. दिल्ली की वफादार पुलिस अपने आकाओं के अनुरूप कर्तव्यनिष्ठा का पालन कर रही . एक पुलिस वाले ने तो जो शायद आर्मी के सज्जन थे या सीआरपीएफ के थे उन्होंने मुझे कहा कि “अगर वह न घुसने देने जंतर-मंतर तरफ तो आप अड़ जाना कि हमें जाना है… कैसे नहीं जाने देंगे.” उसको मालूम था कि यह सब गैर कानूनी तरीके से महिला पहलवानों के साथ अपमानजनक कार्यवाही है उसके कहने पर हम भी कुछ बहस किए बाद में लगा कि हमारे पास जो गोल्ड मेडल भी नहीं है और हम बृजभूषण शरण सिंह भी नहीं है तो कहां पुलिस अरेस्ट करेगी और कहां फेंक देगी कहां तोड़ देगी कहां रिपोर्ट देगी हमारा पता भी नहीं चलेगा. हम चुपचाप वापस चले आए और घूम घूम घूम कर के अंत तक जंतर-मंतर पहुंच गए छोटे से पेड़ की 1 फिट की गली के बीच में.
बजरंग पुनिया से मुलाकात भी हुई लगा साक्षात बजरंगबली यहां 21वीं सदी की माता सीता की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं. पूरे देश की सीता ऐसे ही बजरंग पूनिया जैसे लोगों के भरोसे बैठी हैं .यह सोच कर दिल भर आया. लगा आखिर साक्षात बागेश्वर भगवान याने बागेश्वर बाबा जब यहां बैठे हैं लोकतंत्र की लड़ाई लड़ रहे हैं तो कौन से बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री को कह रहे हैं की पर्ची मत खोलना… बृजभूषण शरण सिंह कहां तक यौन प्रताड़ना किया था.
और शायद इसीलिए हिंदू राष्ट्र के कल्पनाकार शास्त्री प्रताड़ना और नाबालिक के साथ प्रताड़ना के मामले में आंख मूंदे रहे. अन्यथा वे तू कहीं भी किसी को भी देख कर कुछ भी बोल देते हैं. बृजभूषण शरण सिंह के बारे में नहीं बोले…? क्या वे भी डर गए या बागेश्वर बाबा ने उन्हें कह दिया कि चुप रहना…?
बहराल कर्नाटक का चुनाव हार गए उसकी जीत की जश्न शपथ ग्रहण समारोह में होने पाती इसके पहले ही उन लोगों से राजनेताओं को गांधी की कृपा से मुक्त करना था.. जो गुलाबी खजाने के रूप में उन्हें जिम्मेदारी के रूप में दी गई थी. कहते हैं
कर्नाटक के चुनाव के पहले कोई बड़ा नेता इन्हीं गुलाबी नोटों की गड्डी के साथ पकड़ा गया था… अब यह तो तय है कि अगर अरबों खरबों रुपए बट गए या खर्च दिखा दिए गए हैं तो उनकी घर वापसी होना मुश्किल है.. इसलिए 2000 के नोट आरबीआई में जाकर डायरेक्टर को बार-बार समझाए कि हमें बैंक के थ्रू वापस कर लिया जाए ..और कोई रास्ता नहीं है .गांधी जी की आत्मा को शांति मिलेगी ,एक बार और काला धन की घर वापसी होगी और उसे हल्ला मचा कर वापस किया जाए.
अन्यथा आरबीआई जब भी घर वापसी करती है नोटों की, तो बाजार को पता ही नहीं चलता है कब पुराने नोट गायब हो गए और अब नए नोट चल गए ,जिसे सुरक्षित घर वापसी कहा जाता है.. फिर भी राजनीत है तो चिल्ला रही है यह नोट बंदी है.. जनता समझ नहीं पा रही कि हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है चोरी तो नहीं की है डाका तो नहीं डाला थोड़ी सी जो पी ली है… अगर 2000 के गुलाबी नोट सीधे तरीके से वापस नहीं आएंगे तो बैंक में उंगली टेढ़ी करके वापस कर दिए जाएंगे. समझे गद्दार कन्नड़ वासियों तुमने अच्छा नहीं किया. लगे यहां कुछ कारपोरेट जगत का भी भला हो जाएगा.. हमारे शहडोल में कल एक मकान और तोड़ा गया. इसके पहले भी बलात्कारियों के मकान टूटते रहे.. अन्य अपराध करने वालों के भी मकान टूटते रहे क्या बेहतर नहीं होता की हमारे बाहुबली बच्चों के शिवराज मामा अगर प्रधानमंत्री होते तो दबंग डॉन सांसद बृजभूषण शरण सिंह के मकान हमें कई टुकड़ों में टूटते दिखाई देते….. लेकिन दुर्भाग्य कब बाबा मरेगा, कब बैल बिकेगा.; ना नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी… यही सोच कर हम चुप रह जाते हैं.. की तमाम योग्यताओं के बावजूद भी शिवराज सिंह प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे…क्योंकि कहीं शक्ति पीठ रतनगढ़ के किसी बाबा ने शिवराज सिंह को गद्दी से हटाए जाने की 30 मई तक की डेट लाइन दे दी है यह बाबा गिरी राजनीति को पता नहीं कहां ले जा सकेगी पटकेगी.. यही है वर्तमान का प्रत्यक्षम किम् प्रमाणम है..

