
एक सज्जन से संवाद चल रहा था कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से जो चुनावी भाषण किया है और गारंटी दी है कि अगले 2024 में भी वही झंडा फहराएंगे।
यह उनका कॉन्फिडेंस पेगासस से आया या EVM बाबा से अथवा फिर किसी अज्ञात शक्ति से….?
यह तो वही जाने,लेकिन “कॉन्फिडेंस” को लेकर चर्चा की जो शुरुआत हुई वह मोदी से चलकर… अयोध्या के राम मंदिर और कूदकर शहडोल के मोहन राम मंदिर में आकर गिर गई….. उनके समर्थक पक्ष ने कहा कि कितना अच्छा काम हुआ है कि मोहन राम तालाब बच गया है..हमने समझाया की तालब तो ठीक है किन्तु एक बड़ा तालाब नष्ट हो गया है, और बचे हुए तालाब में सर्फा से नगर से सप्लाई होने वाला शुद्ध पानी भरा जा रहा है।
अगर विकास का पैमाना यही है तो उन्हें मुबारक है।अंततः समर्थक अंधभक्त पक्ष कुछ ठंडा हो गया शायद उन्हें दिख गया कि हां एक तालाब नष्ट करके दूसरे तालाब में कीमती पानी भरा जा रहा है…किंतु इन बहस से फायदा क्या हो रहा है…?
————————–( त्रिलोकीनाथ)——————————–
. मध्यप्रदेश में वर्तमान की प्रचारित शब्द “डबल इंजन” वाली उनकी सरकार जो करीब 20 साल से मध्यप्रदेश में कब्जा है यह एक पक्ष हुआ….,अब दूसरी घटना पर चर्चा करते हैं क्योंकि देश में क्या अच्छा और क्या बुरा चल रहा है हम अपने इर्द-गिर्द अच्छे और बुरे चल रहे गति के हिसाब से देखते हैं, मेरे पिताजी ने जब शहडोल में एक मकान 1950 में खरीदा निश्चित तौर पर मकान 20-25 साल पहले बना रहा होगा कभी करीब डबल स्टोरी मिट्टी का मकान दो फीट से ढाई फीट मिट्टी की चौड़ाई की दीवारें हैं… निचले स्तर पर जो ऊपर जाकर करीब 1 फीट तक हो जाते हैं। इस मकान को इस तरह 100 वर्ष हो गए ,ऐसा मेरा अनुमान है। मकान गिरा नहीं कुछ हिस्सा हमने रिपेयर कराया तो पता चला।दीवार बहुत मजबूत है लेकिन एक लंबे चौड़े षड्यंत्र के तहत हमारे ही अपने लोगों ने इस मकान के एक दीवार को पिछले 10 साल के प्रयास अंततः इस बरसात में गिरा दिया…..
क्योंकि वह नीव खोदने का काम कर रहे थे, इसकी पुलिस रिपोर्ट वगैरह हम करते रहे… कोई फर्क नहीं पड़ा और दीवार गिर गई… दीवार गिरने में अकेले हमारे अपने ही लोग सफल हुए ऐसा नहीं है… पूरा सिस्टम, जो भ्रष्ट है जिसमें भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल का कतिपय भ्रष्ट प्रशासन भी शामिल है ;कहना गलत नहीं होगा ।
मुझे याद है 2011 में कोर्ट का फैसला आया तब मोहन राम मंदिर के पुराने ट्रस्टी हटाए जाते हैं और नवीन न्यासियों का गठन होना था ।जिसका गठन कोर्ट के आदेश से न्यास पंजीयक सोहागपुर को करना था। तब मोहन राम मंदिर के दानदाता स्वर्गीय मोहन राम पांडे परिवार समाज में संपर्क कर घुसपैठ कर एक लड़की को कन्यादान करने वाले एसडीम गजेंद्र सिंह सोहागपुर के एसडीएम थे, और बहुत कुछ गलत कर रहे थे। मैं उसमें न्याय की अपेक्षा में आवेदन लगातार लग रहा था ,स्व0मोहन राम पांडे के परिजन स्व0 हर प्रसाद पांडे के जरिए। ताकि मंदिर में न्याय पूर्ण पद्धति से न्यासियों का समावेश हो सके। क्योंकि तब मुझे मालूम नहीं था कि गजेंद्र सिंह मोहन राम पांडे के परिवार में किस तरह उनके अपने विरोधियों से संपर्करत थे। एसडीएम गजेंद्र सिंह पूरी तरह से षड्यंत्र कर रहे थे की एक समूह का कब्जा मंदिर के अंदर हो जाए जो उनके पसंद का था। चित्रकूट के रोहाणेश्वर प्रपन्नाचार्य इस समूह का प्रमुख थे।
इसी दौर में इत्तेफाक से मेरे परिवार का विवाद गजेंद्र सिंह के कोर्ट में पहुंचा और उन्होंने मेरे खिलाफ स्थगन आदेश दे दिया। मैंने उनसे निवेदन किया कि यह अन्याय होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा आप मोहन राम मंदिर में हस्तक्षेप छोड़ दें हम मंदिर को छोड़ देंगे…. मैंने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि मैं कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहा हूं न्याय की लड़ाई में साथ दे रहा हूं… उन्होंने कहा आप किसी भी प्रकार का मदद ना करिए।मैंने कहा यह उचित नहीं है उन्होंने मेरे मकान से संबंधित विवाद को प्रश्रय दिया नाजायज तरीके से इसे प्रश्रय देने वाले प्रपन्नाचार्य भी एक थे …इसलिए जब मेरे मकान का दीवार अंततः गिर गया तो मुझे लगा कि पूरे सिस्टम ने मिलकर भ्रष्टाचार का सहारा लेकर इस दीवार को गिरा दिया है। जिसे मैं लगातार कानून सम्मत तरीके से न्याय की अपेक्षा करता रहा।
कह सकते हैं की दीवार और मकान 100 साल पुराना था और इसे गिराया ही जाना था अगर हम पुनर्निर्माण के लिए इसे गिराते तो यह मकान के साथ भी न्याय होता और पक्षकारों के साथ भी ।
किंतु इस षड्यंत्र करके एक भ्रष्ट सिस्टम ने जिसमें कतिपय भ्रष्ट प्रशासन के लोग, पुलिस के लोग और मोहन राम मंदिर में घुसपैठ कर गैर कानूनी तरीके से रह रहे भ्रष्ट लोग, हमारे अपने लोगों के पीछे एक बड़ी ताकत बनकर खड़े रहे । जिससे यह दीवार गिर गई, जिसे बनाना ही पड़ेगा ।
यही भाजपा का रामराज्य है। और इसमें न्याय को क्षतिग्रस्त होना ही पड़ता है इसलिए गिरी हुई दीवार मेरे अपेक्षा में होने वाली दुर्भाग्यपूर्ण भयानक घटना थी।
किंतु यह अपेक्षा में मोहन राम मंदिर के अंतर्गत स्थापित शिव पार्वती मंदिर की छत गिर जाने के लिए मैं तैयार नहीं हूं ।क्योंकि उसे भी इसी बड़े षड्यंत्र के तहत गिराया जा रहा है। मंदिर का पुजारी लगातार संबंधित प्रशासन से इस आशय की शिकायत कर रहा है कि किस तरह मंदिर की छत जो करीब सवा 125 साल पुरानी है और जर्जर हालत में है अगर उसे तत्काल ठीक नहीं किया गया तो वह कभी भी गिर सकती है..… षड्यंत्रकारी गिरोह यही चाहता भी है और वर्तमान में मंदिर ट्रस्ट का प्रबंधन देख रहे हाई कोर्ट के निर्देश में गठित स्वतंत्र समिति के सदस्यों को जिसमें तहसीलदार सोहागपुर एक अहम सदस्य हैं। उन्हें विधिवत सूचना है जरिए कलेक्टर अथवा एसडीएम के या फिर भारतीय जनता पार्टी के रामराज वाली सीएम हेल्पलाइन 181 के ।की क्या इस मंदिर छत को बचाया जा सकता है…..? और क्यों नहीं बचाया जा रहा है…?
बावजूद लगातार हर प्रकार की सतर्कता और चेतावनी तथा आवेदन पत्रों के इस मंदिर छत को बचाने के कोई प्रयास अभी तक होते नहीं दिखाई दे रहे हैं।
यह ठीक उसी प्रकार का कृत्य रहा जिस प्रकार से मेरे घर की 100 वर्ष पुरानी दीवार अंततः आरोपी जन द्वारा गिरा दी गई। ऐसे में भी कोई अगर कहता है कि मोहन राम मंदिर बचा हुआ है तो उसके विवेक-हीनता का परिचय है ….गैर कानूनी तरीके से उच्च न्यायालय की आदेश की मंसा के विरुद्ध न सिर्फ शिव मंदिर छत को गिराए जाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है बल्कि एक तालाब को पूरी तरह से नष्ट करके दूसरे तालाब से अलग-अलग कर दिया गया है । और ऊपर के स्रोत तालाब को अतिक्रमणकारियों के भरोसे लूटने खाने प्रशासनिक भ्रष्टाचार के बंटवारे का संसाधन बना दिया गया है ….क्या यही डबल इंजन की रामराज की सरकार का परिणाम है….?
तो सवाल यह उठता है कि सिर्फ शहडोल के एक तालाब की चर्चा क्यों हो, पूरे तालाबों जो करीब 100- 150 से ऊपर थे उन्हें धीरे-धीरे करके प्रशासनिक भ्रष्टाचार के जरिए अतिक्रमणकारियों भूमिया के हवाले कर दिया गया है। और जमकर बंदर-बांट हुई ।
करीब 10% तालाब ही अपनी औकात में शायद बचे हों। बाकी लगभग हर तालाब क्षतिग्रस्त होकर नष्ट होने को तैयार हैं।यह कहना चाहिए भाजपा की राम राज्य में बलिदान हो रहे हैं….
ऐसे में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह 100 करोड़ों रुपए लगाकर अमरकंटक में किसी काल्पनिक लोक का निर्माण करना चाहते हैं तो डर लगता है की आप, विकास और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए आग लगाकर क्षेत्रीय पर्यावरण और पारिस्थितिकी के साथ भयानक खिलवाड़ करने जा रहे हैं…? ऐसा कोई काम प्रदेश के मुख्यमंत्री को अमरकंटक परिधि क्षेत्र में नहीं करना चाहिए जिससे उसकी स्थिति की नष्ट होती हो। वैसे भी अमरकंटक में मनमानी तरीके से पक्के मकान का और मंदिरों का निर्माण वहां की भौगोलिक संरचना को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त किया गया है। जिस पर जिस स्तर पर हो रोक लगाया जाना चाहिए।
किंतु नहीं लगता कि जो शहडोल के बने बनाए तालाबों को बचाकर रख पाने में नपुंसक साबित हुए वह अमरकंटक क्षेत्र की पर्यावरण और पारिस्थितिकी को बचा पाने में अपना पुरुषार्थ दिखा पाएंगे।
नए तालाबों का निर्माण विकास के नाम पर क्यों होना चाहिए अगर विरासत के हजारों तालाबों को विनाश की बलिवेदी पर चढ़ा दिया जाता है…? ऐसा नहीं है कि भाजपा के इस रामराज के जाने से तालाबों नदियों को जीवनदान मिलेगा, सत्ता का रामराज जब तक पवित्र नहीं होगा वह यह अपराध करता ही रहेगा…. जनता को अपनी दौलत, सत्ता लोगों के भरोसे नहीं छोड़ देना चाहिए…. और इस वक्त शहडोल में यही हो रहा है… कानून व्यवस्था का जोर-जोर से नारा लगाकर उसकी धज्जियां उड़ाई जा रही है…
नर्मदा का संरक्षण क्यों होना चाहिए अगर सोन नदी और जोहिला नदी को प्रदूषित और नष्ट होने के लिए छोड़ दिया जाता है…?इसी अन्याय का विवाद और न्याय का सिद्धांत मनुष्य होने की विवेकशील का पर छोड़ दिया गया है अगर आप मनुष्य हैं तो…?अन्यथा जय श्रीराम का नारा जोर-जोर से लगाकर कोई बिट्टू बजरंगी कहीं ना कहीं मेवात में या नूंह में हिंसा की आग तो लगा ही रहा है… आप भी लगाइए कौन रोका है… आखिर डबल इंजन की सरकार जो ठहरी….?

