
शहडोल।
यह संयोग ही है कि जब मिलिट्री का जवान व्योहारी विधानसभा क्षेत्र में रेत माफिया से घायल होकर अपनी शिकायत पुलिस और प्रशासन को कर रहे थे तभी उसे क्षेत्र के विधायक शरद कोल व्योहारी विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र डाल रहे थे। जिन पर रेत माफिया गर्व करता है कि वह विधायक शरद कोल का आदमी है..?
भारतीय थल सेना के राजभान तिवारी इन दोनों छुट्टी पर अपने गांव बाणसागर थाना अंतर्गत ग्राम सुखाड़ में आए हुए हैं ।
ग्राम सुखाड़ से लगी हुई नदी में दोनों तरफ के माफिया यानी रामनगर थाना क्षेत्र जिला सतना और शहडोल बाणसागर थाना क्षेत्र में सक्रिय निर्भीक माफिया रेत की स्मगलिंग का कारोबार करता है। जो बिना पुलिस की मिली भगत के संभव नहीं है। शहडोल प्रशासन ने रेत खदान के टेंडर ना होने के कारण रेत खनन पर प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन इन ज्ञात और अज्ञात यानी देसी और विदेशी माफियाओं का पुलिस और प्रशासन से बेहतर ताल में होने के कारण कलेक्टर का प्रतिबंध का नियम यहां लागू नहीं होता है । परिणाम स्वरूप खनिज माफिया पूरी निर्भीकता के साथ यहां पर रेत की माफिया गिरी करता है।
किंतु छुट्टी पर आए हुए थल सेना के राजभान तिवारी की खेत जो नदी के पास है उनके पूरे खेत को माफिया कई जेसीबी मशीन और अपने डंपर से ट्रैक्टर से खराब करके नदी की रेत की माफिया गिरी करते हैं।
इसका खुलेआम बंदरबांट आम बात बन गई है। किंतु राजभान तिवारी को इस बात का अंदाजा नहीं था और वह माफिया को ऐसा करने से कि उनके खेत ना बिगड़े मना किया बस बात यहीं पर बिगड़ गई और थल सेना के राजभान तिवारी की माफिया ने मौका स्थल पर पिटाई कर दी जिसमें उन्होंने मौका पर फावड़ा और सब्बल आदि का भी उपयोग किया किसी तरह जान बचाकर थल सेना का जवान भाग कर बाणसागर थाना में पहुंचा और पूरी आप बीती बताई।
किंतु बताया जाता है की उपस्थिति पुलिस के सिपाही ने माफिया से संपर्क किया और उनकी रिपोर्ट लिखने पर आना-कानी की बाद में दबाव आने पर 155 के तहत मात्र सूचनात्मक कार्यवाही कर ली गई। जिसकी शिकायत जवान राजभान तिवारी ने आज शहडोल के पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन से तथा अपने सैनिक कल्याण विभाग और खनिज विभाग से भी की है।की किस प्रकार से खुलेआम वहां पर रेत माफिया गिरी का विरोध करने पर प्राणों के लाले पड़ जाते हैं।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय में हुई एक मुलाकात में राजभान तिवारी ने कहा की माफिया का आतंक बाणसागर क्षेत्र में पुलिस के सक्रिय न होने के कारण बहुत ज्यादा बना हुआ है और श्री तिवारी और उनके परिवार को अब जान का खतरा पैदा हो गया है । कभी भी रेत माफिया से जुड़ा हुआ ज्ञात और अज्ञात गिरोह प्राण घातक हमला कर सकता है।
यह हालत तब है जब विधानसभा चुनाव की निर्वाचन प्रक्रिया चल रही है और आचार संहिता लगी हुई है। सत्ता के संरक्षण में अक्सर चलने वाला रेत माफिया सत्ता के हटने के बाद भी प्रशासन से बेहतर तालमेल बनाकर आतंक का पर्याय बना हुआ है और रेत के स्मगलिंग के कारोबार को प्रतिबंध के दौरान भारी मुनाफे का कारोबार बनाकर काला बाजार में अपना एकाधिकार बना रखा है । तथा आम जनता को रेत की सप्लाई करते हुए करोड़ों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं ।
खबर तो यहां तक है कि संबंधित रेत माफिया स्वयं को विधायक शरद कोल का खास आदमी बताते हैं आरोप तो यह भी है की शरद कोल ही इस माफिया गिरी को वहां पर संरक्षक के तौर पर पुलिस प्रशासन से संरक्षण दिलवाते हैं और रेत माफिया उनके लिए वोट एकत्र करने का ठेका ले रखे हैं।
किन्तु निर्वाचन आयोग ने तो उन घोषित पुलिस प्रकरणों पर प्रत्याशियों के द्वारा प्रकाशित करने की बात कही गई है जो थाने में दर्ज हैं किंतु जहां पुलिस प्रकरण दर्ज नहीं करती और चुनाव आचार संहिता में भी सफल माफिया गिरी स्वयं को उम्मीदवार से संरक्षित होकर होकर करोड़ों की लूट और अपराधों को अंजाम देती है उनका प्रकाशन कैसे संभव है…?
ऐसे में लोकतंत्र अब घोषित तौर पर व्यवहारी विधानसभा में क्या प्राय: खत्म ही हो गया है इन रेत माफियाओं के कारण। जहां भारतीय थल सेवा के जवान को माफिया गिरी से अपनी जान बचाकर पुलिस और प्रशासन के पास दर-दर ठोकर ठोकरे खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। तो देखते हैं की निर्वाचन आचार संहिता के दौरान भी क्या माफिया गिरी की सफलता अपना जश्न कब तक मनाती रहेगी…






