
जगत-सत्यम, ब्रह्म-मिथ्या..
ब्रह्म-राम के जन्म स्थल सरयू नदी के किनारे स्थित अयोध्या में, विश्व के सात आश्चर्य में शामिल ताजमहल से भी खूबसूरत मस्जिद का निर्माण करने का दावा किया गया है, इसके पहले 22 जनवरी को दुनिया के बड़े मंदिर भवन का लोकार्पण और बहुत खूबसूरत रामलला की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों किया जाना सुनिश्चित किया गया है। यह 2024 में पहले हफ्ते की बड़ी खबर है।
( त्रिलोकी नाथ )
हिंदू-मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए यह अयोध्या-तीर्थ की जगह है बड़ा पर्यटक-केंद्र के रूप में बन जाएगा। इसके लिए बकायदे कथित तौर पर करीब एक लाख करोड रुपए का निवेश भी अयोध्या में किया गया है। बकायदे उच्च श्रेणी का रेलवे स्टेशन और अंतरराष्ट्रीय बाल्मिक हवाई अड्डा की शुरुआत भी कर दी गई है। कुल मिलाकर टीवी सीरियल “सिया के राम” में “जगत सत्यम-ब्रह्म मिथ्या” के नारे को जबाली की कल्पना अयोध्या में लोकतंत्र के राम को लाकर चरितार्थ की जा रही है ….?
यह अलग बात है कि हजारों साल की सनातन धर्म
के प्रतिनिधि गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य जगतगुरु निश्चलानंद जीने यह कहकर इस भव्य लोकतंत्र के राम के मंदिर मैं आने से इनकार कर दिया कि अगर मोदी जी प्राण प्रतिष्ठा करेंगे तो क्या शंकराचार्य वहां जाकर ताली बजाएंगे…?
काशी हिंदू विश्वविद्यालय की एक आईआईटी की छात्रा के साथ गेंगरेप
इसी पहले हफ्ते में इस खबर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों की मेहनत दो महीने बाद रंग लाई जब लोकतंत्र की न्यायपालिका ने भाजपा की शीर्ष नेताओं के साथ एकांतिक फोटो मैं दिखने वाले आई-टी सेल के आधुनिक लोक व्यवस्था के प्रतिनिधि कुणाल पांडे , आनंद उर्फ अभिषेक चौहान और सक्षम पटेल युवकों ने पंडित मदन मोहन मालवीय की महान दान परंपरा से निकलेकाशी हिंदू विश्वविद्यालय की एक आईआईटी की छात्रा के साथ गेंगरेप किया और भारतीय जनता पार्टी की पूरी ताकत लगाने के बाद न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद अंततः वाशिंग-मशीन से निकालकर के नाथ संप्रदाय के गोरखपुर पीठ के प्रमुख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करवा करके लोकतंत्र के राम की मर्यादा को कायम करने का काम किया। खबरों में यह सुनामी मामूली से झोंके की तरह आई और इस खबर ने चाल-चरित्र और चेहरे की मर्यादा को स्थापित किया है। इसमें कोई शक नहीं करना चाहिए ।
यह अलग बात है हिंदू राष्ट्र के इन भाजपा वाराणसी के आईटी सेल के समर्पित सिपाहियों ने गैंगरेप करने के बाद स-सम्मान मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव प्रचार का कार्य भी किया और जब फुर्सत मिली तब गिरफ्तारी संभव हो सकी। यह भी अलग बात है कि अगर विश्वविद्यालय के छात्र धरना-आंदोलन जीवी नहीं होते तो शायद 22 जनवरी को लोकतंत्र के राम राज्य में यह तीनों युवक प्राण प्रतिष्ठा में अपनी भूमिका का सफलता के साथ निर्वहन कर रहे होते….?
संन्यास की साक्षी बनी साक्षी मलिक ,सड़क पर अर्जुन पुरस्कार और कई पदक….
इसी हफ्ते इस खबर ने धीरे से सही जोर का धक्का देते हुए हड़कंप कर दिया कि अपने धरना प्रदर्शन और आंदोलन के जरिए न्याय मांग रही पिछले 1 साल से लगातार भारतीय कुश्ती को दुनिया में नाम देने वाली ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता साक्षी मलिक बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट
ने अपने जीते हुए सभी भारतीय सम्मान पूरे सम्मान के साथ अर्जुन पुरस्कार पदक आदि को दिल्ली की गली कर्तव्य पथ प्रधानमंत्री के घर के सामने वापस करके चले आए क्योंकि बलात्कार और यौन प्रताड़ना के आरोपी भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहे भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के मामले में उन्हें न्याय नहीं मिल रहा था और इस आश्वासन के बाद भी कि इस संघ में अब अध्यक्ष महिला होगी यौन प्रताड़ना के आरोपी के नजदीकी व्यक्ति को नया अध्यक्ष बना दिया गया भारतीय कुश्ती संघ की खेल में महिलाओं के अंधे अंधेरे पूर्ण भविष्य को देखते हुए साक्षी मलिक तो इतना व्यथित हो गई कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के सामने ही भारतीय कुश्ती से संन्यास लेने की घोषणा कर दी भारत के गृहमंत्री अमित शाह के मुलाकात के बाद यौन प्रताड़ना के आरोपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी कुश्ती को टाटा करने का संदेश दिया यह अलग बात है कि लोकतंत्र की राम की स्थापना और लोकसभा में चुनाव के बाद उनका कुश्ती प्रेम किस रूप में जागता है यह देखने लायक होगा फिलहाल दुनिया में भारत का नाम ऊंचा करने वाली इन महिला खिलाड़ियों और ओलंपिक पदक विजेता को भारत से उसे प्रकार का धरना आंदोलन का समर्थन नहीं मिल पाया जिस प्रकार से काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों ने जागरूकता बना कर रखें इसलिए सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी बाल यौन प्रताड़ना के आरोपी भाजपा सांसद को पास को एक्ट से राहत जरूर मिली किंतु गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई वह कई बार के सांसद हैं कोई आईटी सेल के युवा नहीं जो उनकी गिरफ्तारी इतनी जल्दी हो जाती इसलिए पिक्चर अभी बाकी है यह खबर भी भारतीय मीडिया में पहले हफ्ते की चटपटे मसालेदार खबर के रूप में चर्चित रही ।
हेमंत सोरेन, केजरीवाल और भूपेश बघेल पर ईडी और सीबीआई शस्त्र प्रहार
इसी हफ्ते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री केजरीवाल और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर ईडी और सीबीआई के जरिए शास्त्र प्रहार हुआ संभव है आने वाले समय में इन्हें भी वाशिंग मशीन से धोने का प्रभाव प्रयास किया जाएगा अन्यथा भारतीय जेल जिंदाबाद कुछ इस प्रकार की खबरें सामने आई।
अशोक बर्णवाल की बैठक में लोकतंत्र की नई वर्ण-व्यवस्था
लेकिन मध्य प्रदेश में शिव-राज के समापन के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की मनमोहन कार्यवाही भी देखने को मिली, जब बीते साल साइलेंट-मोड में भारतीय संसद ने कई कानून एक तरफ पारित कर दिए उसमें से एक कानून ड्राइवर पर “हिट एंड रन” से संबंधित कानून पर किसी भी ड्राइवर के द्वारा एक्सीडेंट कर दिए जाने के बाद भाग जाने पर10 साल की सजा और सात लाख रूपए का जुर्माना की खबरें जब उड़ते उड़ते जमीन पर आई तो पूरे ड्राइवर ने ड्राइवरी छोड़कर एक लंबी उड़ान भर दी… और लोकतंत्र में काम करने से मना कर दिया। दो-तीन दिन हंगामा भी रहा लगा पूरी अर्थव्यवस्था पर ब्रेक लग गया है। प्रशासन इस अचानक आई आपदा से बौखला गया।
शाजापुर के कलेक्टर ने एक ड्राइवर को धमकी भरे अंदाज में भरी सभा में उसकी औकात बताने की बात कह दी, जो वायरल हो गई। इस वीडियो से मजदूर पुत्र डॉक्टर मोहन यादव की जमीर जिंदा हो गई और उन्होंने आनंद-फानन में कलेक्टर शाजापुर को कलेक्ट्री से अलविदा कहने को कहा। यानी हटा दिया जिसका कुछ सकारात्मक प्रभाव राजनीति में पढ़ ही रहा था की शहडोल में नई व्यवस्था में बनाए गए संभागीय प्रभारी सचिव आईएएस अधिकारी अशोक बर्णवाल ने जो बैठक की उसमें लोकतंत्र की नई वर्ण-व्यवस्था लागू करते दिखे। इस खबर ने भी धीरे से लगाए जोर का धक्का का काम किया। लेकिन आदिवासी क्षेत्र होने के कारण मुख्यमंत्री मोहन यादव कि मनमोहन कला अशोक बर्नवाल के पत्ता भी नहीं हिला पाई। अब तक तो कोई कार्यवाही हुई है ऐसी कोई खबर नहीं है..… यह भी हफ्ते की बड़ी खबर रही।
21वीं सदी का पदयात्री राहुल गांधी 6200 किलोमीटर की यात्रा
तो अयोध्या में लोकतंत्र के राम को प्राण प्रतिष्ठित किया जाएगा 22 जनवरी के दिन इसके एक हफ्ते पहले मकर संक्रांति के दिन 21वीं सदी का गांधी यानी पद यात्री राहुल गांधी हिंसा ग्रस्त मणिपुर राज्य से अपनी 6200 किलोमीटर की यात्रा करके मुंबई तक पहुंचाने का घोषणा कर दी कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बकायदे इसका पोस्टर भी जारी किया है लोकतंत्र की यह पदयात्रा की तपस्या केरल से कन्याकुमारी की करीब 3:30 हजार किलोमीटर की पदयात्रा की सफलता से प्रेरित है उन्हें इस बात का यकीन भी है की 6200 किलोमीटर की जब पद यात्रा हो रही होगी तब मृत पड़े अनेक न्याय के मापदंड उड़ान भर रहे होंगे यानी जनता उनके नजर में जागरूक हो रही होगी यह अलग बात है की 22 जनवरी को भारतीय मतदाताओं को जागरूकता लाने की दृष्टिकोण से लोकतंत्र के राम अपना ब्रह्म तेज अपनी समस्त प्रभुसत्ता के साथ फैला चुके होंगे यह भी अलग बात है कि लोकतंत्र के राम जिस मणिपुर को और वहां के निर्वस्त्र महिलाओं के मामले में शुतुरमुर्ग की तरह अपना सर बालू में छुपा लिए थे यानी मौन व्रत में चले गए थे।
जंतर मंतर में
बैक-टू-वैलेट
इसी हफ्ते के अंत में दिल्ली के जंतर मंतर में एक नया जादू आंदोलन जीवियों ने खड़ा कर दिया खबर आई की जंतर मंतर में बैक-टू-वैलेट के जरिए एक सभा में लोकतंत्र को बचाने के लिए निर्वाचन आयोग के द्वारा प्रयोग किया जा रहे ईवीएम मशीन को खारिज कर दिया और मतपत्र के जरिए मतदान की प्रक्रिया चालू करने की मांग की गई है खबर यह भी है कि 14 जनवरी को भारत के हर जिले में इसी प्रकार का प्रदर्शन खड़ा किया जाएगा ताकि लगभग हर चुकी विपक्ष का सहारा बनकर मतपत्र के जरिए वोट हो सके और लोकतंत्र बच सके इस प्रकार की मांग नए आंदोलन में की गई है इसकी सफलता भी भविष्य के अंधेरे में है।
बची-खुची पत्रकारिता को भी नियंत्रित करने के लिए नई व्यवस्था
चलते-चलते यह खबर भी सनसनी पैदा करके चली गई कि भारत में बची-खुची पत्रकारिता को भी नियंत्रित करने के लिए नई व्यवस्था की गई है। जिसके तहत भारत ने मर रही पत्रकारिता की लाश को उसके जीवन की संभावना के मद्देनजर उसे स्वस्थ रखने के नाम पर कभी कर्मचारी आ करके उसकी नब्ज को टटोल सकता है। यानी उसकी जांच कर सकता है इस खबर ने धीरे से बहुत जोर का धक्का लगाया भारतीय लोकतंत्र को देने का काम किया है.. ताकि चेतना कुछ जागृत हो जाए देखना होगा भारतीय पत्रकारिता मृत घोषित होने के पहले करने के पहले और कितनी आत्महत्या करती है….?
आशा पर आकाश टिका है इस राह में 21वीं सदी का यह गांधी अपनी पदयात्रा में लोकतंत्र की जागरूकता में कितना सफल होगा यह तो भविष्य बताएगा फिलहाल 2024 का वर्ष रहस्य और रोमांच से भारत होगा पूत के पांव पालने पर 2024 के पहले हफ्ते में खबरों की घटनाओं ने कुछ ऐसा प्रदर्शन किया है। तो देखते चलिए भारत के लोकतंत्र में ” जगत-सत्यम, ब्रह्म-मिथ्या ” किस प्रकार से स्थापित होता है।

