धर्मनिरपेक्षता के वास्तविक अर्थ को पुन:स्थापित का प्रतीक भी बन गया राममंदिर-लालकृष्ण

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नयी दिल्ली: 13 जनवरी समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार22 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होंगे लालकृष्ण आडवाणी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि राम जन्मभूमि आंदोलन का प्राथमिक उद्देश्य अयोध्या में श्री राममंदिर का पुनर्निर्माण था और यह ‘‘छद्म धर्मनिरपेक्षता के हमले के कारण (धूमिल हुए) धर्मनिरपेक्षता के वास्तविक अर्थ को पुन:स्थापित करने का प्रतीक भी बन गया।’’वर्ष 1990 में राम रथयात्रा शुरू करने वाले आडवाणी ने कहा, “एक ओर, आंदोलन को व्यापक जन समर्थन प्राप्त था, वहीं, अधिकांश राजनीतिक दल इस आंदोलन का समर्थन करने से इसलिए कतरा रहे थे, क्योंकि उन्हें मुस्लिम वोट खोने का डर था। वे वोट-बैंक की राजनीति के लालच में आ गए और उसे धर्मनिरपेक्षता के नाम पर उचित ठहराने लगे।’’

आडवाणी (96) ने लिखा है, ‘‘इस प्रकार, अयोध्या मुद्दा, जिसका प्राथमिक उद्देश्य श्री रामजन्मभूमि मंदिर का पुनर्निर्माण था, छद्य धर्मनिरपेक्षता के हमले के कारण (धूमिल हुए) धर्मनिरपेक्षता के वास्तविक अर्थ को पुन:स्थापित करने का प्रतीक भी बन गया।’’

उन्होंने कहा कि आगामी 22 जनवरी, 2024 के विशेष अवसर से पहले पूरे देश का वातावरण सचमुच राममय हो गया है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए संतुष्टि का क्षण है, न केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा के एक गौरवान्वित सदस्य के रूप में, बल्कि हमारी गौरवशाली मातृभूमि के एक गर्वित नागरिक के रूप में भी।उन्होंने कहा कि वह धन्य हैं कि वह अपने जीवनकाल में इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनेंगे।उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अयोध्या में श्रीरामलला के विग्रह की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ करेंगे, तो वह ‘‘हमारे महान्‌ भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक का प्रतिनिधित्व करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरा अटल विश्वास है और मेरी आशा भी कि यह मंदिर सभी भारतीयों को श्रीराम के गुणों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। मैं यह भी प्रार्थना करता हूं कि हमारा महान्‌ देश न केवल वैश्विक शक्ति बनने के पथ पर तेजी से आगे बढ़ता रहे, बल्कि जीवन के सभी क्षेत्रों में अपने आप को गरिमा और मर्यादा के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करे।’’उन्होंने कहा कि अब जब भव्य श्रीराम मंदिर अपने निर्माण के अंतिम चरण में है, तो वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार, सभी संगठनों, विशेष रूप से विश्व हिंदू परिषद्‌ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी, अनगिनत रथ यात्रा के सहयोगियों, संतों, नेताओं, कारसेवकों और भारत तथा दुनिया के सभी लोगों के प्रति गहरी कृतज्ञता की भावना से भर गए हैं, जिन्होंने कई दशकों तक अयोध्या आंदोलन में बहुमूल्य योगदान और बलिदान दिया।

उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए किया गया ‘रामजन्मभूमि आंदोलन’ 1947 के बाद के भारत के इतिहास में एक निर्णायक और परिणामकारी घटना सिद्ध हुई।उन्होंने कहा, ‘‘मैं विनम्रता से कहता हूँ कि नियति ने मुझे 1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक श्रीराम रथयात्रा के रूप में एक महत्त्वपूर्ण कर्तव्य निभाने का अवसर दिया।’


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