
म.प्र. मीडिया संघ की मांग
पत्रकारों व परिवारजनो के बने, आयुष्मान कार्ड
शहडोल । मध्यप्रदेश मीडिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष जयवंत ठाकरे के निर्देशन में शहडोल इकाई द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शहडोल आगमन पर ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि पत्रकारों के हित को दृष्टिगत रखते हुए समस्त पत्रकारों एवं उनके परिवारजनों का आयुष्मान कार्ड बनवाया जाए, ताकि पत्रकारों एवं उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। पत्रकारों एवं उनके परिवारजनों का शासन स्तर पर निःशुल्क बीमा कराया जाए। पत्रकारों के ऊपर दर्ज कराए गए झूठे मुकदमों को वापस लिया जाए। शहडोल जिले में रिक्त जनसम्पर्क अधिकारी नियुक्ति कराई जाए साथ ही जिला चिकित्सालय शहडोल में डाक्टरों द्वारा लगातार मरीजों से ऑपरेशन एवं इलाज के लिए पैसों की मांग किए जाने साथ ही मरीजों एवं उनके परिजनों से डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ एवं वार्ड ब्वाय द्वारा अभद्रता की जाती है और । ज्ञापन सौंपते समय मध्यप्रदेश मीडिया संघ के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित रहे।मीडिया संघ के शहडोल प्रमुख मनीष शुक्ला के नेतृत्व में मुख्यमंत्री मोहन सिंह को यह ज्ञापन सोपा गया
चिकित्सा के बदले पैसा लेने के मामले में निलंबित….
शहडोल से मुख्यमंत्री मोहन यादव के जाने के बाद यह खबर आई की कमिश्नर शहडोल ने जिला चिकित्सालय में डॉक्टर अपूर्व पांडे को मरीज से चिकित्सा के बदले पैसा लेने के मामले मेंनिलंबित कर दिया है । जो इस बात को प्रमाणित करता है कि जिला चिकित्सालय दरअसल डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस का बुकिंग सेंटर भी है। हालांकि निलंबन में यह बात स्पष्ट नहीं की गई है कि वह ऑपरेशन के लिए जो पैसा ले रहे थे वह ऑपरेशन किसी निजी चिकित्सालय में या जिला चिकित्सालय में करना था..?
अक्सर चिकित्सा पैसे से जुड़े लोग चाहे वह मेडिकल कॉलेज हो या फिर जिला चिकित्सालय हो ज्यादा से ज्यादा निजी चिकित्सालय में प्रैक्टिस करते हैं और वहां पर मरीज को ले जाने के लिए दबाव बनाते हैं और फिर वह निजी चिकित्सालयों से भी भारी मात्रा में पैसा लेते हैं तथा मैरिज तो लगभग लुट ही जाता है। हमने पहले खबर डाली थी की विधायक ड्राइवर से ऑपरेशन के एवरेज में पैसा लूटा गया है यह अलग बात है की विधायक के हस्तक्षेप के बाद यह मामला चर्चा में आ गया था और पैसा भी वापस हुआ है।
सिर्फ एक डॉक्टर के सस्पेंड हो जाने से यह समस्या खत्म नहीं हो गई है बल्कि वह इस बात को प्रमाणित करती है कि पूरा चिकित्सालय परिषद चाहे हुए मेडिकल कॉलेज हो या अन्य जगह हो संवेदनहीन कार्य प्रणाली से प्रभावित हैं, कमिश्नर को चाहिए कि वह इस संवेदनहीन कर प्रणाली को चिन्हित करने का काम करें आखिर चिकित्सा सेवा के सभी संस्थान कैसे पारदर्शी तरीके से काम करेंगे…?
जबकि सरकार की बीमा योजना ने इन्हें ज्यादा से ज्यादा पैसा लूटने का अवसर दिया है अक्सर देखा जाता है की छोटी सी बीमारी के लिए भी लाखों रुपए की बिल बना दिए जाते हैं क्योंकि बीमा कंपनी से पैसा मिलना होता है लेकिन इसका दुर्भाग्यपूर्ण असर उन मरीजों पर पड़ता है जिनका बीमा नहीं होता है आखिर यह बाजार सरकारी तंत्र ने ही खड़ा किया हुआ है । और इस प्रतियोगिता में कोई एक अपूर्व पांडे फंसकर मरीज से पैसा कमाना चाहता है। तो यह एक मानवीय स्वाभाविक प्रक्रिया है। जिसमें एक डॉक्टर फंस गया है।
जरूरी है की नैतिक रूप से चिकित्सालय परिसर को ईमानदार और स्वस्थ बनाए जाए और जिस चिकित्सक को जो सेवा दी गई है उसकी पूरी पारदर्शिता रखी जाए । जो शहडोल में लगभग ना के बराबर है ऐसे में पकड़े गए एक डॉक्टर अपूर्व पांडे तो मात्र उदाहरण है। दरअसल पूरा परिसर ही मरीज से पैसा लूटने के मामले में अथवा शासकीय अस्पतालों में भर्ती मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराकर उन्हें लूटने के मामले में एक बाजार बन गया है। जो आदिवासी विशेष क्षेत्र के लिए बहुत दुखद है । और इस पर अभी तक शहडोल के नेताओं ने कोई काम नहीं किया है। बल्कि तथाकथित जन भागीदारी समिति भी इस भ्रष्टाचार में अपना हाथ साफ करती रहती है। जब तक इस पर काम नहीं होगा तब तक एक अपूर्व पांडे ने कोई अपूर्व काम नहीं किया है वह सिर्फ पैसा लूटने के बाजार में फंस गई, एक चिड़िया मात्र है।
वह इसलिए क्योंकि इसमें स्वयं वर्षों से विधायक रहे एक पूर्व मंत्री का ड्राइवर प्रभावित हुआ था । यही व्यवस्था है क्योंकि प्रशासन तंत्र इस व्यवस्था को ठीक करने में नाकाम रहा है। उम्मीद करना चाहिए डॉक्टर पांडे के बहाने पूरे चिकित्सा परिसर में भ्रष्टाचार की बह रही पैसे की लूट की इस गंगा को प्रदूषण से मुक्त किया जाएगा।

