रिश्वत लेने के मामले में सांसदों और विधायकों को अभियोजन से छूट नहीं-CJI

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नयी दिल्ली: चार मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि सांसदों और विधायकों को सदन में वोट डालने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने के मामले में अभियोजन से छूट नहीं होती।प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) रिश्वत मामले में पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनाए गए 1998 के फैसले को सर्वसम्मति से पलट दिया। पांच न्यायाशीधों की पीठ के फैसले के तहत सांसदों और विधायकों को सदन में वोट डालने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने के मामले में अभियोजन से छूट दी गई थी।उन घटनाओं का  ब्यौरा  है जिनके कारण सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि सदन में वोट देने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने वाले सांसदों और विधायकों को आपराधिक मुकदमे से छूट नहीं है:17 अप्रैल, 1998: पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 3:2 के बहुमत से नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई मामले, जिसे जेएमएम रिश्वत मामले के रूप में भी जाना जाता है, में कहा कि सांसदों को किसी भी भाषण और वोट के लिए आपराधिक मुकदमा चलाने से छूट प्राप्त है। संविधान के अनुच्छेद 105(2) और 194(2) के तहत सदन के अंदर डाला गया|

वोट के बदले नोट लेने के मामले में अभियोजन (मुकदमे) से छूट देने का फैसला सुनाया था। चीफ जस्टिस ने कहा कि ‘माननीयों को मिली छूट यह साबित करने में विफल रही है कि माननीयों को अपने विधायी कार्यों में इस छूट की अनिवार्यता है।’सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में रिश्वत लेकर वोट देने वाले माननीयों को अभियोजन से राहत देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 1998 में पीवी नरसिम्हा राव के मामले में दिए अपने पिछले फैसले को पलट दिया। सात जजों की संविधान पीठ ने कहा कि संसदीय विशेषाधिकार के तहत रिश्वतखोरी की छूट नहीं दी जा सकती।फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ‘पीठ के सभी जज इस मुद्दे पर एकमत हैं कि पीवी नरसिम्हा राव मामले मे दिए फैसले से हम असहमत हैं।’ नरसिम्हा राव मामले में अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों-विधायकों को वोट के बदले नोट लेने के मामले में अभियोजन (मुकदमे) से छूट देने का फैसला सुनाया था। चीफ जस्टिस ने कहा कि ‘माननीयों को मिली छूट यह साबित करने में विफल रही है कि माननीयों को अपने विधायी कार्यों में इस छूट की अनिवार्यता है।’ मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ‘संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 में रिश्वत से छूट का प्रावधान नहीं है क्योंकि रिश्वतखोरी आपराधिक कृत्य है और ये सदन में भाषण देने या वोट देने के लिए जरूरी नहीं है।

 

नयी दिल्ली: 4 मार्च (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विभिन्न राज्यों में जिन परियोजनाओं की शुरुआत कर रहे हैं वो सभी उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले की परियोजनाएं हैं।पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री एक ‘इवेंट मैनेजर’ हैं और विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रमों को उनके लिए ‘इवेंट’ में बदला गया है।कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा सोशल मीडिया मंचों पर ‘मोदी का परिवार’ अभियान शुरू किए जाने के बाद सोमवार को दावा किया कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के निरंतर बढ़ने से भाजपा के नेता परेशान हो गए हैं।भाजपा ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ‘अपना परिवार’ ना होने को लेकर कटाक्ष किए जाने के अगले दिन सोशल मीडिया पर ‘मोदी का परिवार’ अभियान शुरु कर दिया।

राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के गुजरात पहुंचने से पहले कांग्रेस को वहां बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने इस्तीफे का एलान किया है। मोढवाडिया गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं। वे वर्तमान में पोरबंदर से कांग्रेस विधायक थे।

लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की पहली सूची जारी हुई तो उसमें चार भोजपुरी सितारों के नाम भी सामने आए। इसी में एक नाम आया ‘पावर स्टार’ कहे जाने वाले पवन सिंह का। उन्हें पश्चिम बंगाल में आसनसोल सीट से टिकट दिया गया है। यहां से ‘बिहारी बाबू’ शत्रुघ्न सिन्हा टीएमसी के मौजूदा सांसद हैं। महज 24 घंटे भी नहीं हुए थे कि पवन ने बतौर प्रत्याशी अपना नाम वापस ले लिया। हालांकि, इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने पवन सिंह की कुछ पुरानी फिल्मों के दृश्य साझा किए और इन्हें बंगाली अस्मिता के खिलाफ बताया।

 


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