
नयी दिल्ली,8 मई (भाषा) ब्रिटेन की प्रमुख औषधि निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका ने दुनियाभर से अपने कोविड-19 रोधी टीके वापस मंगाने शुरू कर दिए हैं।कंपनी ने कुछ दिन पहले यह स्वीकार किया था कि उसके टीकों के कारण खून के थक्के जमने और प्लेटलेट कम होने के मामले सामने आए हैं।कंपनी ने एक बयान में कहा कि महामारी के बाद से उपलब्ध टीकों की अधिक संख्या को देखते हुए इन्हें वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।एस्ट्राजेनेका ने कोविड-19 टीके विकसित करने के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी की थी। इन टीकों को भारत में कोविशील्ड और यूरोप में ‘वैक्सजेवरिया’ के नाम से बेचा गया था।बयान में कहा गया है, “चूंकि कई प्रकार के कोविड -19 टीके विकसित हो चुके हैं, इसलिए उपलब्ध टीकों की संख्या अधिक है। इससे ‘वैक्सजेवरिया’ की मांग में गिरावट आई है, जिसका उत्पादन या आपूर्ति अब नहीं की जा रही है।”
कंपनी ने कहा, “अब हम इस अध्याय को समाप्त करने और कोविड-19 महामारी में महत्वपूर्ण योगदान के लिए एक स्पष्ट मार्ग पर आगे बढ़ने को लेकर नियामकों और हमारे भागीदारों के साथ काम करेंगे।”इससे पहले, वैश्विक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार किया था कि उसकी कोविड-19 वैक्सीन के बहुत ही दुर्लभ दुष्प्रभाव हो सकते हैं।कंपनी ने दुष्प्रभावों का जिक्र किए बिना कहा था, ‘वैश्विक महामारी को समाप्त करने में वैक्सजेवरिया ने जो भूमिका निभाई, उस पर हमें अविश्वसनीय रूप से गर्व है। स्वतंत्र अनुमान के अनुसार टीकों का इस्तेमाल शुरू होने के बाद के पहले वर्ष में 65 लाख से अधिक लोगों की जान बचाई गई और दुनियाभर में तीन अरब से अधिक खुराकों की आपूर्ति की गई।”कंपनी ने कहा, “हमारे प्रयासों को दुनिया भर की सरकारों ने मान्यता दी है और इन्हें व्यापक रूप से वैश्विक महामारी को समाप्त करने का एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है।”भारत में, कोविड-19 टीकों की 220 करोड़ से अधिक खुराकें दी गई हैं और उनमें से अधिकांश कोविशील्ड थीं।
नयी दिल्ली8 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक आदेश के विरुद्ध एक अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि निजी पक्षों को दिए गए अनुबंधों को बिना कारण बताए रद्द नहीं किया जा सकता।मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि अनुबंध हासिल करने के बाद निवेश करने वाले निजी क्षेत्र के लोगों को बदले में कुछ प्राप्त होने की उचित आकांक्षा होती है।
रायबरेली: इस बात पर जोर देते हुए कि देश के लोग बदलाव चाहते हैं और ‘झूठ’ बोलने से तंग आ चुके हैं, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में अपने भाषणों में ‘अपनी कल्पना का भरपूर इस्तेमाल’ कर रहे हैं। तथ्यों के आधार पर बोल रहे हैं.उनकी यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के इस दावे के एक दिन बाद आई है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो वह राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट देगी, ठीक उसी तरह जैसे 1985 में शाहबानो मामले में उसके ऐतिहासिक फैसले को राजीव गांधी सरकार ने पार्टी के तुष्टिकरण के तहत पलट दिया था। राजनीति।उत्तर प्रदेश के रायबरेली में प्रचार अभियान के दौरान पीटीआई के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, जहां से उनके भाई राहुल गांधी लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं, कांग्रेस महासचिव ने प्रधानमंत्री को बेरोजगारी, मूल्य वृद्धि और किसानों की दुर्दशा के मुद्दों पर बोलने की चुनौती दी। .

