
अनुपपुर
कलेक्टर हर्षल पंचोली ने पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित कपिलधारा मैं पर्यटन विकास निगम द्वारा बनाए जा रहे कातिलीवर व्यू प्वाइंट का निरीक्षण किया उन्होंने निरीक्षण के दौरान सुरक्षा के सभी पैरामीटर का ध्यान रखना तथा कपिलधारा क्षेत्र में आवश्यक साफ सफाई के संबंध में दिशा निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। निरीक्षण के दौरान एमपीटी तथा नगरीय निकाय अमरकंटक के अधिकारी उपस्थित थे।
भोपाल : बुधवार, सितम्बर 4, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उनके पिता के निधन पर निज निवास पर जब आमजन मिलने पहुंचे तो वे पिता के संस्मरण सुनाकर भावुक हो गए। अपने पिताश्री की स्मृतियों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उज्जैन विकास प्राधिकरण के चेयरमेन से लेकर विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री बनने पर भी उनके पिता ने सरकारी सुविधा से सदैव परहेज रखा। उन्होंने कहा कि जब वे विधायक का चुनाव जीतकर आये और पिताजी के पैर छुए तो उन्होंने कहा- जीत गए अच्छी बात है लेकिन हमेशा स्वाभिमान की जिंदगी जीना। कभी किसी के पैरों में मत गिरना। अपने दम पर और कर्म के आधार पर आगे बढऩा। स्वयं के द्वारा की गई मेहनत ही एक दिन रंग लाएगी और ऊंचाई तक पहुंचाएगी। जब मैं मुख्यमंत्री बना और आशीर्वाद लेने उज्जैन आया तो घर पर चरण स्पर्श करते समय पिताजी ने कहा- अच्छा काम करना, लोगों का भला करना। किसी को दु:ख पहुंचे, ऐसा काम कभी मत करना।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिताजी हमेशा आशीर्वाद के साथ एक नई सीख देते थे। वे अपना काम आखिरी समय तक स्वयं ही करते रहे। कोई मिलने आता तो वे कभी यह नहीं कहते थे कि मैं विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री का पिता हूं। ताउम्र वे सामान्य जीवन जीते रहे। जब मुख्यमंत्री निवास में जाते समय मैंने उनसे साथ चलने का आग्रह किया तो पिताजी ने कहा मैं तो यहीं पर अच्छा हूं। आज तक तुम्हारी सरकारी कार में भी नहीं बैठा और आगे भी नहीं बैठना चाहता हूं। तुम वहां जाकर रहो और लोगों की सेवा करते रहो। मैं यहीं पर अच्छा हूं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिताश्री के दैनिक जीवन का एक हिस्सा खेत पर जाना भी था। फसल तैयार होने पर उसे अपनी देखरेख में कटवाना और ट्रेक्टर ट्रॉली के साथ स्वयं उपज बेचने के लिए मंडी जाना… उनका यह नित्य क्रम था। हम सब कहते भी थे कि यह सब आप मत किया करो, आराम करो, आपको जाने की क्या आवश्यकता है। वे कहते थे कि यह मेरा काम है और मैं ही करूंगा। वे बाजार भी जब-तब सामान लेने निकल जाते थे। कभी उन्होंने किसी की भी किसी काम के लिए मुझसे सिफारिश नहीं की। मैं उनके लिए एक पुत्र था, न कि कोई राजनेता। पिताश्री की स्मृतियों के साथ मां को भी याद कर वे भावुक हो गये और उन्होंने कहा कि पिताजी की तरह ही मां भी बेहद कर्मशील थीं। दोनों ने मुझे सदैव कर्मशील बने रहने की सीख दी और उनकी इसी सीख पर मैं अब तक अडिग होकर चला हूं और आगे भी चलता रहूंगा।
अनुपपुर – जिले में नगरीय निकायों की तर्ज पर ग्राम पंचायतों को भी स्वायत्त बनाने के दृष्टिगत जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय वशिष्ठ शर्मा के निर्देशन में संपत्ति एवं जल कर वसूलने के लिए कलेक्टर लेवल बैठक आयोजित कर कर वसूली के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत सेक्टरवार सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक के साथ बैठकों का आयोजन कर ग्रामीण क्षेत्रों में कर वसूली का कार्य प्रारंभ करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शर्मा ने बताया है कि हर ग्राम पंचायत को स्व कराधान प्रावधान के तहत संपत्ति, जल कर की वसूली का अधिकार है। उन्होंने बताया है कि ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और विकास कार्यों को गति देने के लिए ग्राम पंचायतों में स्व कराधान लागू की गई है, ताकि करों का संग्रहण करके ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों को मूर्तरूप दिया जा सके।

