
शहडोल नगर में अधिवक्ता सुरक्षित नहीं है और पुलिस को पूरी जानकारी होने के बाद भी अपराधी खुले आम जाकर अधिवक्ता पर हमला कर देते हैं ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि पुलिस के संरक्षण में अपराध अपनी अराजकता पर आ पहुंचा है अन्यथा जब दो महत्वपूर्व पुलिस प्रकरण दर्ज हो चुका, अपराधी चिन्हित हो चुके थे इसके बाद भी अपराधियों के हौसले ऐसे कैसे बढ़ गए थे कि वह अधिवक्ता उदय सोनी के ऊपर सार्वजनिक तौर पर हमला कर देते। यह आशंका हालांकि उदय सोनी पहले ही जता चुके थे. क्योंकि पुलिस अपराधियों को पकड़ नहीं रही जबकि अपराधी खुलेआम घूम रहा है. अप्रत्यक्ष तौर पर अपराधियों को यह कहकर महिमामंडित किया जा रहा था कि वह पेसेवर अपराधी हैं इसलिए जब तक उच्च अधिकारी उन्हें योजनाबद्ध तरीके से नहीं पकड़ेंगे तब तक पुलिस का संरक्षण उन्हें मिलता रहेगा। इसकी आशंका बनी ही थी कि अधिवक्ता उदय सोनी के ऊपर अब इस बात के लिए हमला हो गया कि उनकी हिम्मत कैसे हुई कि वह अपराधियों के खिलाफ पुलिस प्रकरण हेतु शिकायत दर्ज कराए थे।
कहते हैं आज सुबह ही अधिवक्ता उदय सोनी के ऊपर जानलेवा हमला चार-पांच लोगों ने मिलकर कर दिया। इसके पहले घटना गंभीर हो पाती पब्लिक प्लेस होने के कारण अपराधियों ने चेतावनी देकर भाग गए। आज राजस्व बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने इस घटना में कड़ी निंदा करते हुए पुलिस अधीक्षक से मिलकर तत्काल अपराधियों को पकड़ने की बात कही है।
देखना होगा कि पुलिस प्रशासन अब भी अपराधियों को पकड़ने में कितनी सफलता प्राप्त करते हैं। अन्यथा नए सिरे से अपराधियों को हत्या करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जा सकता है ताकि दर्ज प्रकरण में न सिर्फ अधिवक्ता उदय सोनी बल्कि अन्य अधिवक्ता तहसील कैंपस में अपराधियों के आतंक और खौफ से अपना काम करना सीख लें।
अन्यथा जब पहली बार हमला होने के बाद उदय सोनी का हाथ तोड़ दिया गया था तब प्रभावशाली कार्यवाही पुलिस के द्वारा बार एसोसिएशन क्यों नहीं करवा पाया या फिर बार एसोसिएशन के कुछ सदस्य अपराधियों को इस प्रकार से संरक्षण देने का काम करते हैं जैसे पुलिस विभाग के कतिपय भ्रष्ट लोगों की रोजी-रोटी अपराधियों के अपराध पर आधारित होती है। बहरहाल देखना होगा कि अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस इस बार भी तमासबीन की तरह काम करती है या फिर तत्काल अपराधियों को हिरासत में लेकर अराजकता पूर्ण और आतंक पूर्ण अपराध पर अंकुश लगाने का प्रयास करती है| ऐसा नहीं है कि पुलिस अगर चाहती तो आईजी मुख्यालय शहडोल नगर में इस पारदर्शी हमले पर कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकती थी.. किंतु यह पुलिस का आंतरिकभ्रष्टाचार ही था जो उसे कार्यवाही से रोक रहा था, अथवा अपराधियों के हाथ इतने लंबे थे कि वह पुलिस कार्यवाही पर बाधक हो रही थी..? कारण चाहे जो भी रहा हो किंतु सच्चाई अब सामने है की जवान खोली तो पहले हाथ तोड़ा… अब पैर तोड़ दिया है.. अब बारी यह है कि पूरे परिवार की घर में घुसकर हत्या क्यों न कर दी जाए…? अपराधियों के शायद यही मंसा इस हमले का पारदर्शी संदेश है और पुलिस इस मंसा को किस कदर कामयाब होने देगी यह भी देखना होगा….. फिलहाल अधिवक्ता उदय सोनी का परिवार पुलिस और अपराधियों की पूरा कुश्ती से आतंक के साए में जी रहा है कि क्या वह अपने घर में सुरक्षित है…? अथवा अधिवक्ता का पेसा उसे त्याग देना चाहिए…? अप्रत्यक्ष तौर पर सोहागपुर एसडीएम कार्यालय क्षेत्र में भी यह संदेश सभी वकीलों को है कि वह भी उन अपराधियों की दहशत के साए में रहना सीख ले और उनके किसी भी गैर कानूनी कार्यों पर बाधक न बने अन्यथा उनका भी यही परिणाम होगा जो अधिवक्ता उदय का हुआ है। तो यह चुनौती पुलिस आईजी को भी समझी क्यों नहीं जानी चाहिए आखिर शहडोल नगर आईजी मुख्यालय भी है….

