
मुंबई: दिवंगत रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा, टाटा ट्रस्ट्स के अगले अध्यक्ष होंगे, सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।67 वर्षीय नोएल को बोर्ड द्वारा टाटा साम्राज्य को नियंत्रित करने वाले परोपकारी ट्रस्टों की श्रृंखला का नेतृत्व करने के लिए चुना गया था।अपने प्रतिष्ठित सौतेले भाई की छत्रछाया में काम करने वाले नोएल पर अब टाटा ट्रस्ट्स का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी होगी – जिसमें मोटे तौर पर सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, तथा सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स शामिल हैं – जो टाटा समूह की कंपनियों की होल्डिंग और प्रमोटर फर्म टाटा संस में 66 प्रतिशत नियंत्रित हिस्सेदारी रखते हैं।वे पहले से ही सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में ट्रस्टी हैं।
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एमएसएमई शिपयार्ड, मेसर्स सेकॉन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (एसईपीपीएल), विशाखापत्तनम द्वारा भारतीय नौसेना के लिए निर्मित 08 x मिसाइल कम एम्युनिशन बार्ज परियोजना के छठे बार्ज ‘मिसाइल कम एम्युनिशन बार्ज, एलएसएएम 12 (यार्ड 80)’ का जलावतरण 10 अक्टूबर 24 को मेसर्स विनायगा मरीन पेट्रो लिमिटेड, मीरा भयंदर, महाराष्ट्र (मेसर्स सेकॉन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का प्रक्षेपण स्थल) पर किया गया। जलावतरण समारोह की अध्यक्षता कमांडर एमवी राज कृष्ण, सीओवाई (एमबीआई) ने की।08 x मिसाइल कम एम्युनिशन बार्ज के निर्माण के लिए अनुबंध पर रक्षा मंत्रालय और मेसर्स सेकॉन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, विशाखापत्तनम के बीच 19 फरवरी 2021 को हस्ताक्षर किए गए थे। इन बार्ज की उपलब्धता भारतीय नौसेना के परिचालन प्रतिबद्धताओं को गति प्रदान करेगी, क्योंकि इससे जेटी के किनारे और बाहरी बंदरगाहों पर भारतीय नौसेना के प्लेटफार्मों पर वस्तुओं/गोला बारूद के परिवहन के साथ-साथ चढ़ने और उतरने में सुविधा मिलेगी।इन बार्ज को स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है और भारतीय नौवहन रजिस्टर के प्रासंगिक नौसेना नियमों और विनियमन के तहत बनाया गया है। डिजाइन चरण के दौरान बार्ज का मॉडल परीक्षण नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला, विशाखापत्तनम में किया गया था। ये बार्ज भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल के गौरवशाली ध्वजवाहक हैं।
भोपाल : शुक्रवार, अक्टूबर 11, 2024, केन्द्र सरकार ने जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में 2 अक्टूबर 2024 से ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ की शुरुआत की गई है। इस अभियान का उद्देश्य मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में जनजातीय आबादी के लिए समान अवसरों का सृजन, सामाजिक-आर्थिक स्तर का विकास, बुनियादी ढांचे के सुधार और स्वास्थ्य, शिक्षा व आजीविका के क्षेत्र में ठोस प्रगति करना है।जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि प्रदेश के 51 जिलों के 267 विकासखंडों में स्थित 11 हजार 377 जनजातीय गांवों को इस अभियान का लाभ मिलेगा। यहां 43 जनजातीय समुदायों के 18 लाख 58 हजार परिवार निवास करते हैं, जिनकी कुल 93 लाख 23 हजार आबादी इस अभियान से लाभान्वित होगी। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इन जनजातीय गांवों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए समन्वित प्रयास कर रही हैं।
अभियान में सभी जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए कौशल विकास, उद्यमिता संवर्धन और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी पात्र जनजातीय परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना और उनके गांवों में सड़क, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सेवाओं का विस्तार किया जायेगा। अधिक से अधिक मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (एमएमयू) की स्थापना की जाएगी, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जा सके। इसी प्रकार जनजातीय क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केंद्र (टीएमएमसी) शुरू करने के प्रयास किये जायेंगे, जिससे जनजातीय परिवारों को उनकी अपनी कला, संस्कृति, चित्रकारी, वनोपज संग्रहण, शहद, कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा, महुआ से तैयार उत्पादों, जड़ी-बूटी से प्राकृतिक उपचार ज्ञान कौशल की बेहतर मार्केटिंग हो सकें और जनजातियों की उन्हीं के गांव में ही आमदनी बढ़ाई जा सके। इससे जनजातियां पलायन भी नहीं करेंगी।अभियान में 25 प्रकार की नागरिक सेवाएं/सुविधाएं जनजातीय समुदायों को प्रदान की जाएंगी, जो 18 लाइन मंत्रालयों/विभागों के द्वारा संचालित की जाएंगी। ये मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों के लिए विभागीय विकास कार्ययोजना (DAPST) के तहत अपनी बजट राशि से पांच वित्त वर्षों (2024-25 से 2028-29) तक जनजातीय क्षेत्रों में विकासमूलक काम करेंगे।केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास, जल शक्ति, विद्युत, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि, दूरसंचार और जनजातीय कार्य मंत्रालय/विभाग इस अभियान में प्रमुख रूप से शामिल होंगे।

