
कल एक खबर आई एक पॉडकास्ट द्वारा कि मोदी ने अपने मनुष्य होने की घोषणा कर दी है तो पहले यह समझ ले की मीडिया के डिजिटल युग में पॉडकास्ट क्या होता है…क्योंकि जब हम लोगों ने पत्रकारिता चालू की थी उसे समय पत्रकार-वार्ता, चर्चा, संवाद, इंटरव्यू ,मुलाकात ,चौपाल आदि शब्दों का उपयोग किसी से साक्षात्कार करने में होता था उसे समझ में आता था की एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से कुछ पूछ रहा है और वह उसका उत्तर दे रहा है.. लेकिन अब 21वीं सदी का जमाना है पत्रकारिता के संदर्भ में बैक-वर्ड शब्दों का उपयोग अब नहीं किया जाता.. रोज नया-नया सिगुफा छोड़ जाता है इसी नई सिगुफा को पॉडकास्ट कहा गया है. समान रूप से इसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बातचीत का माध्यम माना जाता है और यह पत्रकारिता नहीं होती है..
जैसे इसके पहले एक टीवी चैनल में लियाकत नाम की महिला है टीवी एंकर, जिनकी जिज्ञासा शांत करते हुए शायद गंगा की गोद, यह कहना चाहिए गंगा जी में खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के मध्ये नजर स्वयं को नॉन-बायोलॉजिकल यानी गैर मनुष्य होने का घोषणा किये थे । (जैसा कि अक्सर कोई भी साधु संत नकाब पहनकर अपने को घोषित कर दिए होते हैं)
जब उस महिला एंकर ने भाव विभोर होकर पूछा था कि आपके अंदर इतनी ऊर्जा कहां से आती है…? आप दिन-रात मेहनत कैसे कर लेते हैं.. आदि-आदि… तब गंगा की गोद में तैरते हुए यह यह गंगा में खड़े होकर प्रधानमंत्री ने सत्य का उजागर किया था कहने का आशय यह था कि जब तक उनकी (नरेंद्र मोदी) मां जिंदा थी तब तक वह अपने को मनुष्य होने के भ्रम में महसूस करते थे । जब उनकी मां का निधन हो गया तब उन्हें एहसास हुआ कि दरअसल वह नॉन-बायोलॉजिकल है… तो अब समझ ले की लोकसभा चुनाव में अगर धोखे से ही सही या चुनाव आयोग के प्रबंधन में कमी होने के कारण वह कम सीटों में जीते हैं अगर 400 पर होते तो इस बात को स्थापित करने में कोई संशय नहीं होता कि, उन्होंने कहा था कि वे नान बायोलॉजिकल है… यानी अवतारी पुरुष हैं जैसा कि भारतीय जनता पार्टी और उनके प्रशंसक( जिन्हें कुछ लोग अंधभक्त भी कहते हैं ) उन्हें अलग-अलग संदर्भ में भगवान का अवतार बता चुके थे । चुनाव में अगर 400 पार सीटों से जिते होते तो वह प्रमाण पत्र होता की जनता ने भी उन्हें अवतरित पुरुष मान लिया है।
बहरहाल वह लोकसभा को चुनाव था..
जो बीत गई, सो बात गई;
जो रीत गई, सो रातगई।
माना कि एक सितारा था,
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया… सो डूब गया..”
हरिवंश राय बच्चन की इस काव्यांश को आत्मसात करते हुए जैसे ही दिल्ली के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कदम रखा तो उन्हें आम आदमी पार्टी का “शीश महल” आप-दा के रूप में दिखा.
शायद इसी शीश महल में कहीं पर किसी आईने में उन्हें स्वंय को देख आभास हो गया कि दरअसल वे आईने में दिखते हैं इसलिए वह मनुष्य नहीं है…. हमने भी बचपन में ऐसा सुना था कि भूत लोग या भगवान लोग आईने में नहीं दिखते…
इसलिए पॉडकास्ट के जरिए उन्होंने घोषणा कर दी कि “..वह भी मनुष्य हैं। उनसे भी गलतियां होती हैं..”दिल्ली में आकर उनके दिल की बात निकली भी तो सटीक लक्ष्य को प्राप्त होती नहीं दिख रही है। शायद शायद लोकसभा का अनुभव अब इन बनावटी बातों में कॉन्फिडेंस नहीं पैदा कर पाता की क्या मालूम परिणाम क्या हो.. क्योंकि चुनाव आयोग के राजीव शर्मा ने भी पत्रकार वार्ता में स्पष्ट कर दिया है कि रिटायरमेंट के बाद भी हिमालय में रहना चाहेंगे…”शायद इसलिए कि अब वह कोई पाप नहीं करना चाहते उनसे कोई उम्मीद ना की जाए।
दरअसल दिल्ली में कथित रूप से 30 पर्सेंट आबादी पूर्वांचलों के रहने वालों की है जो बिहार उत्तर प्रदेश झारखंड आदि क्षेत्र से आते हैं और नेताओं को यह भ्रम है की जिन्हें मूर्खों की तरह वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
और मोदी जी को जब भगवान के अवतार से गिरना ही था तो उन्हें पूर्वांचली के रूप में गिरना चाहिए था। उनके प्रबंधन ने उन्हें गलत स्क्रिप्ट दे दी थी.. वह कह सकते थे कि “मैं मनुष्य ही हूं और गंगा का छोरा भी हूं.. जैसा कि अमिताभ बच्चन ने गाना गया था”…छोरा गंगा किनारे वाला..” और अगर अमिताभ बच्चन की तरफ से यह कहलाया जाता तो कुछ फिल्मी अंदाज में और रोचक हो जाता.. पूर्वांचली ठुमक ठुमक कर फिर यही गाना गाते हैं, जब तक वोट ना पड़ जाता वह गुनगुनाते रहते हैं “..छोरा गंगा किनारे वाला..”
क्योंकि पिछले 10 वर्ष से मोदी गुजरात से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं बल्कि बनारस से चुनाव लड़ रहे हैं तो उनका अब मूल निवास बनारसी हो गया है.. क्योंकि मां गंगा ने उन्हें बुलाया था.. इसमें दस्तावेजी प्रूफ भी हो गया है तो अगर वह यह सच बोलते तो झूठ की श्रेणी में कहने में विरोधियों को परेशानी जाती।
लेकिन दिल्ली आने वालों की समस्या यही है कि वह दिल से बात बोलने लग जाते हैं और मोदी जी के साथ यही एक्सीडेंट हो गया। वह “एक्सीडेंटल-मनुष्य” बनकर अवतरित हो गए।क्योंकि अगर उनका मनुष्य होना अवतार नहीं माना जाएगा तो उन पेड-पत्रकारों ,दलालों विचारों का क्या होगा जिन्होंने बार-बार सत्यापित करने का काम किया कि मोदी जी वस्तुतः अवतार हैं.. तो मनुष्य भी अवतरित होता है वह मनुष्य के रूप में अवतरित हो गए हैं… ऐसा कहा जाएगा तो जिन्होंने उनसे यह झूठ बुलवाया था और उसे झूठ को प्रमाणित किया था कि वह नॉन बायोलॉजिकल हैं उन्हें अपना आईना देखने में सहूलियत होगी; और कोई बात नहीं है….
—-( त्रिलोकी नाथ)—

