जल स्रोत रक्षा के आंदोलनकारियो नए शहर में निकला मसाल जुलूस; लक्ष्य तक आंदोलन चलेगा-धर्मेंद्र

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शहडोल 24 april जम्मू कश्मीर के पहलगांम में आतंकवादियों द्वारा 27 यात्रियों की गोली मारकर धार्मिक आधार पर पहचान करते हुए हत्या कर देने की दिल दहला देने वाली अमानवीय घटना ने पूरे देश को हिला दिया समस्त राजनीतिक दल आक्रोश से भर गए इस घटना की निंदा करते हुए मसाल जुलूस लेकर किरण टॉकीज के पास गत 17 दिवस से श्रमिक अनशन करने वाले शहडोल के नागरिकों ने गांधी चौराहा स्थित महात्मा गांधी की मूर्ति के समक्ष  दीप प्रज्वलित करते हुए शोक श्रद्धांजलि अर्पित किया- शहर के मुख्य मार्ग में मसाल जुलूस लेकर अपनी जनहित कारी शासन की जल गंगा संवर्धन योजना के तहत जल बचाओ अभियान को जनता के पास ले गए और किरण टॉकीज में अतिक्रमण कार्यों द्वारा राजनीतिक सत्ता के संरक्षण में प्राचीन जल बावड़ी को जिंदा करने के लिए जुलूस निकाला-

इस अवसर पर नारे लगाए गए की जल बावड़ी को जल स्रोत को पुनर्जीवित किया जाए और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाए ताकि दोबारा इस शहडोल शहर में कोई जल स्रोत को नष्ट न कर सके, आश्चर्य की बात यह है की जो काम प्रशासन को अपने हाथ में लेकर जल स्रोतों की रक्षा करनी चाहिए उसे काम के लिए गत सत्र दिवस से चल रहे क्रमिक अनशन के दौरान जांच भी की गई कि वह सरकारी जमीन है जल स्रोत है आश्वासन भी दिया गया तहसीलदार द्वारा कि इसे तत्काल किया जाएगा प्रशासन अलग-अलग जगह की फोटोग्राफ्स पानियों से कचरा हटाकर प्रचार प्रसार कर रहा है कि कल जल गंगा संवर्धन अभियान चल रहा है किंतु दो जल स्रोत को एक महीने पहले भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में अतिक्रमण करने के उद्देश्य से ढक दिया गया हो और उसे वार्ड के नगर वासी इस जल स्रोत की रक्षा के लिए क्रमिक अनशन कर रहे हो उसे पर प्रशासन की पूर्ण कार्यवाही अभी तक सिर्फ चुप्पी साधने की है.

बल्कि तहसीलदार सुहागपुर का यह प्रयास है कि किसी तरह यह क्रमिक अनसंन टूट जाए इससे ज्यादा वह जमीन पर कोई कार्यवाही नहींकरते। जबकि नगर वासी शुद्ध पर्यावरण व जल स्रोत संरक्षण की दृष्टिकोण से अपने को जिंदा रखने के लिए इस जल स्रोत और शासकीय जमीन को सुरक्षा और संरक्षण चाहते हैं।
बताया जाता है की भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के नजदीकी भाजपा शहडोल जिला अध्यक्ष अमिता चपरा के कारण इस अतिक्रमण कार्यों को न सिर्फ बढ़ावा दिया गया बल्कि अतिक्रमण करने की छूट दी गई और प्राचीन जल स्रोत को जेसीबी से ढक दिया गया ताकि अतिक्रमणकारियों मुफ्त में यह जमीन दी जा सके.

बहरहाल अब जबकि मसाल जुलूस जलाकर अंधेर राज में इस अंधेरे को खत्म करने के लिए नागरिक संकल्पित दिखाई देते हैं स्थानीय शासन व प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करती है देखना होगा सबसे ज्यादा इस आंदोलन का दुखद पक्ष है कि कांग्रेस पार्टी या दूसरे राजनीतिक दल नगर के चुने हुए पार्षद और जिला पंचायत के नेता भी यह चाहते हैं कि इस अतिक्रमण कार्यों को इसलिए बढ़ावा मिले क्योंकि यह चपरा परिवार पर अतिक्रमण का मसला है….?

सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है क्या समस्त राजनीतिक दल का चाल चरित्र और चेहरा एक जैसा है आपकी वह लोकहितार्थ हो रहे इस जन आंदोलन से आंख क्यों मुद्दे हुए हैं, अथवा वह अंधे अथवा बहरे हैं या फिर सभी माफिया गिरी के चट्टे-बट्टे हैं इस आशय का आरोप आंदोलनकारी राम प्रकाश लग रहे थे। आंदोलन का नेतृत्व करने वाले पूर्व छात्र नेता धर्मेंद्र श्रीवास्तव का कहना है आंदोलन पर्यावरण संरक्षण और अपनी विरासत को बचाने का है जब तक लक्ष्य नहीं मिल जाएगा आंदोलन चलता रहेगा।


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