गंगा संवर्धन अभियानके लिए जरूरी है सोन और मुड़ना नदी का संवर्धन, जिसके लिए किरण टॉकीज की बावड़ी का जिंदा होना जरूरी है.. -( त्रिलोकी नाथ )

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          फिर क्या कारण है कि मुड़ना नदी के किनारे निवासरत विधायक मनीषा सिंह यह जानते हुए भी की भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती अमिता चपरा का किरण टॉकीज की बावड़ी के पास कोई दखल नहीं है वे साथ मिलकर ज्ञापन भी दी थी और स्थिति स्पष्ट है इसके बावजूद भी इस जल स्रोत को बचाने के लिए क्षेत्रीय विधायक आंदोलनकारी से मिलकर उनके साथ कंधा पर कंधा मिलाकर किरण टॉकीज की जल स्रोत को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है…? कुछ लोगों को मानना है क्या क्षेत्रीय विधायक मनीष सिंह अतिक्रमणकारियों के प्रभाव अथवा दबाव में चुप हैं…? स्वाभाविक रूप से यह चिंता होती है की क्या सिलेक्टिव तरीके से की जहां भारतीय जनता पार्टी के लोगों का जरा भी नाम मात्र का हित है वहां पर अतिक्रमण और जल स्रोतों को नष्ट करने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा…? और जहां उनका हित नहीं है वहां पर काम किया जाएगा…

शहडोल।   जय सिंह वर्षों से विधायक रहे वे समाजवादी पृष्ठभूमि से भारतीय जनता पार्टी में आयात किए गए थे उन्हें भाजपा ने राज्य मंत्री राजस्व विभाग का दायित्व दिया था किंतु वह अत्यंत ईमानदार और साफ सुथरी छवि केसहज व्यक्ति हैं। उन्होंने हाल में शासन की जल गंगा संवर्धन योजना के तहत ग्राम पंचायत चकौड़िया के जोधाधार स्टापडेम में साफ सफाई कर अपनी सहभागिता प्रदान की। इस अवसर पर ” पानी का एक-एक बूंद सहजने पूरे जिले के कुएं, बावड़ी और नदियों में कर रहे श्रमदान पत्रिका अखबार ने इसे प्राथमिकता से जगह दी है। ‌जय सिंह शहडोल की विधानसभा क्षेत्र जैसिंहनगर के भी पूर्व विधायक रहे हैं।वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के लंबे समय तक विधायक रहे स्व. भगवान दीन की बहू श्रीमती मनीषा सिंह इस समय भाजपा से विधायक हैं। और उन्होंने अपना स्थाई मकान भी मुड़ना नदी के बगल में पांडव नगर शहडोल में बना लिया है।
जल गंगा संवर्धन अभियान का शहडोल के संदर्भ में मूल स्रोत सोन नदी का संरक्षण है सोन नदी के कछार क्षेत्र में मुड़ना नदी का प्रवाह है जो केलमनिया घाट के आसपास से निकलती है।

वर्तमान में विधायक जी के घर के बगल में बहने वाली मुड़ना नदी सोन नदी के संरक्षण दाता है। उसका पानी सोन नदी में मिलकर गंगा नदी का संवर्धन करता है। इसलिए मुड़ना नदी का शहडोल संभाग मुख्यालय की मुख्य नदी के रूप में देखा जाता है । वर्तमान में यह नदी नेताओं और नागरिकों तथा भ्रष्ट कार्यपालिका के सहयोग से उदासीनता के कारण गंदे पानी का नाला बनकर रह गया है। यह नदी अभी भरपूर बदबू नहीं दे रही है। जैसे ही मेड़की के पास निर्मित होने वाले निर्माण कर्ता गुजराती कंपनी का सीवर प्लांट तैयार हो जाएगा यह नदी बदबूदार नदी के रूप में बदल जाएगी, ऐसी पूर्ण आशंका हमें रखनी चाहिए।फिलहाल गुजराती कंपनी का सीवर लाइन का काम कथित तौर पर बहुत पिछड़ा हुआ है इसलिए अभी यह नदी बदबूदार नदी के रूप में विकसित नहीं हो पाई है।इस मुड़ना नदी को जिंदा रखने के लिए शहडोल नगर के तमाम तालाबों, कुंओ, बावड़ियों और अन्य जल स्रोतों का महत्वपूर्ण योगदान है जिसको जिंदा रखना जरूरी है। वही इस मुड़ना नदी को जीवित नदी के रूप में सहायता करते हैं।
शहडोल नगर की तमाम तालाब प्रशासकी लापरवाही से या शासन की नीतियों के कारण नष्ट हो रहे हैं। अतिक्रमणकारियों, माफिया अधिकारियों से मिली भगत कर तमाम तलावों पर या तो पट्टा हासिल कर लिया है या फिर उस पर कब्जा कर लिया है। विराट मंदिर के पास का बड़ा तालाब इसका साक्षात प्रकट उदाहरण है। पूर्व कमिश्नर हीरालाल त्रिवेदी को अपनी कर्तव्य निष्ठा की याद आई तो उन्होंने तालाबों को बचाने के लिए एक मुहिम छेड़ी थी और तमाम भू अभिलेख में तालाबों को चिन्हित करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद भी प्रशासकीय अधिकारियों ने तालाबों पर अतिक्रमण को रोकने में असफल रहे। शहडोल नगर पालिका में ऐसे पार्षद अभी भी हैं और कुछ मर गए हैं जिन्होंने तालाबों को टारगेट करके उस पर सड़क बनाने उसे नष्ट करने अथवा उसे कब्जा करने में पूरी ताकत लगा दी। ताकि किसी के भ्रष्टाचार पर उनका पेट पालता रहे और उनका वोट बैंक उनके आका के लिए जिंदा रहे। इसमें छोट-भैया नेता से लेकर जिला स्तर तक के नेता चाहे वह भाजपा के हो या कांग्रेस के दोनों ने अपनी पूरी भूमिका अदा की थी।

जब जैसिंहनगर क्षेत्र के पूर्व विधायक जय सिंह यह कहते हैं कि बावड़ियों को जिंदा रखना है एक-एक बूंद जल सहेजने के लिए तब किरण टॉकीज के पास प्राचीन बावड़ी को कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष श्रीमती अमिता चपरा के परिवार वालों ने खुलेआम गुंडागर्दी करते हुए न सिर्फ बावड़ी को ढक दिया बल्कि आसपास की पूरी जमीन पर भी कब्जा कर उसे पर खंबे गाढ़ लिए और भारतीय जनता पार्टी के झंडे के रंग अंश भाग का हरा पर्दा लगा दिया। यह दिखाने के लिए की यह चपरा परिवार की प्रॉपर्टीहै।
इस भूमि पर दसकों साल से दुर्गा उत्सव समिति अपना दुर्गा पूजन का कार्यक्रम करती रही और बावड़ी का उपयोग होतारहा। दुर्गा उत्सव समिति और आसपास के नागरिक इस अतिक्रमण को बचा नहीं पाए।जब पानी सर से ऊपर हो गया जेसीबी से बावड़ी को ढक दिया गया तब उन्होंने प्रशासन के समक्ष इस आशंका में गुहार लगाई कि भाजपा के जिला अध्यक्ष श्रीमती चपरा यह कब्जा करवा रही हैं..? राजनीतिक नेता होने के कारण उनके मुर्दाबाद के भी नारे लगाए गए।
श्रीमती चपरा और भाजपा के उनके अनुयायियों को यह बर्दाश्त नहीं हुआ वे क्षेत्रीय विधायक श्रीमती मनीषा सिंह के साथ एक बड़े दल के रूप में कलेक्टर से मिलकर इस पर सफाई दिए कि उसे जमीन से उनका कोई नाता नहीं है और उन्हें बदनाम किया जा रहा है। साथ ही कलेक्टर से उसे जमीन से संबंधित तथाकथित खसरा नंबर 72 शहडोल के पूरे रकबे की पारदर्शी जांच करने की मांग की। कहा तो यह जाता है यह बावड़ी उसे नंबर का हिस्सा नहीं है।
सत्ताधारी पार्टी होने के कारण कलेक्टर ने इस मांग के अनुरूप पारदर्शी तरीके से राजस्व दल के द्वारा जांच करवाई क्योंकि इस जल स्रोत बावड़ी व जमीन को बचाने के लिए स्थानीय नागरिकों का एक दल अपनी पूर्व घोषणा के अनुसार क्रमिक अनशन मौका स्थल पर चालू कर दिया था।भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती श्रीमती चपरा की मांग को और आंदोलनकारी की मांग को एक होने के कारण तत्काल राजस्व दल ने जांच की और बताया जाता है कि यह पाया गया की किरण टॉकीज की बावड़ी और आसपास की जमीन शासकीय है इस प्रकार से अन्य शासकीय जमीनों को भी चिन्हित किया गया। प्रशासन की इस कार्यवाही को आंदोलनकारी ने बेहद सम्मान से देखा तहसीलदार ने भी दो बार आंदोलनकारी को आश्वासन दिया कि वह क्रमिक अनसंन से उठ जाएं और इस पर कार्रवाई की जाएगी।
आंदोलनकारी का लक्ष्य है कि वह जब तक इस किरण टॉकीज की भाटी जा चुकी प्राचीन बावड़ी की जल स्रोत की खुदाई और इस जमीन की अतिक्रमण मुक्त स्थल पर नहीं किया जाता तब तक उनका क्रमिक अनशन जारी रहेगा।22 दिन हो चुके हैं क्रमिक अनशन को, इस दौरान मसाल जुलूस लेकर भी शहर में आंदोलनकारी ने जल स्रोतों की जागरूकता के लिए यात्रा की।
वर्तमान में प्रशासन का जल गंगा संवर्धन अभियान जोर-शोर से चर्चा पर है.. इस अभियान के लिए मुड़ना नदी को साफ सुथरा व जल स्रोतो से भरा होना चाहिए जिसके लिए किरण टॉकीज के पास दबा दी गई बाबडी़ और तालाबों को बरसात केपूर्व सुरक्षित व संरक्षित करने कीजिम्मेदारी प्रशासन पर अभियान की सफलता के लिए आवश्यक है।
आंदोलन कारियों का लक्ष्य प्रशासन के लक्ष्य से एक होने के बावजूद भी अब क्या कारण है की किरण टॉकीज जल स्रोत की बावड़ी को आंदोलन के बावजूद भी नजरअंदाज किया जा रहा है…?क्षेत्रीय विधायक स्वयं इस जल स्रोत के संरक्षण और पारदर्शी जांच के लिए कलेक्टर से मिलकर ज्ञापन का हिस्सा बनी थी. एक महीने होने को आ रहे हैं सब कुछ पारदर्शी और सुरक्षित तथा सुनिश्चित होने के बाद भी अभी तक ना तो अतिक्रमण हटाया गया है और ना ही प्राचीन स्त्रोत जल बावड़ी को खुदाई कर उसे बरसात पूर्व जल स्रोत के लिए कार्य किया गया है।

ऐसे में पूर्व जैसिंहनगर के विधायक जय सिंह की भावना जल सहेजने की ज्यादा प्रबल होती दिखाई दे रही है की बावड़ियों और तालाबों की रक्षा की जानी चाहिए। जो वह अपने विधानसभा क्षेत्र जैतपुर में जोर-शोर से कर रहे हैं।
फिर क्या कारण है कि मुड़ना नदी के किनारे निवासरत विधायक मनीषा सिंह यह जानते हुए भी की भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती अमिता चपरा का किरण टॉकीज की बावड़ी के पास कोई दखल नहीं है वे साथ मिलकर ज्ञापन भी दी थी और स्थिति स्पष्ट है इसके बावजूद भी इस जल स्रोत को बचाने के लिए क्षेत्रीय विधायक आंदोलनकारी से मिलकर उनके साथ कंधा पर कंधा मिलाकर किरण टॉकीज की जल स्रोत को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है…? कुछ लोगों को मानना है क्या क्षेत्रीय विधायक मनीष सिंह अतिक्रमणकारियों के प्रभाव अथवा दबाव में चुप हैं…? स्वाभाविक रूप से यह चिंता होती है की क्या सिलेक्टिव तरीके से की जहां भारतीय जनता पार्टी के लोगों का जरा भी नाम मात्र का हित है वहां पर अतिक्रमण और जल स्रोतों को नष्ट करने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा…? और जहां उनका हित नहीं है वहां पर काम किया जाएगा…
ऐसे में जल गंगा संवर्धन अभियान एक ढकोसला प्रतीत होता है शासकीय औपचारिकता मात्र प्रतीत होती है कि जनता के पैसे से सरकारी धन की होली खेली जा रही है‌। उन्हें मूल स्रोत बचाने के लिए में जहां जल संवर्धन की जरूरत है उस पर काम ना करके जहां पानी है वहां पर थोड़ा बहुत प्रदर्शन दिखाकर काम हो रहा है।बेहतर होता की नदी से गंदा नाला बन चुकी मुड़ना नदी के पास निवासरत क्षेत्रीय विधायक मनीषा सिंह मुड़ना नदी, सोन नदी और गंगा नदी के संवर्धन के लिए मुड़ना नदी को जिंदा करने के लिए तमाम अवरोधों को हटाकर जमीन पर काम करती दिखाई देगी किंतु ऐसा हो नहीं रहा है…?
आश्चर्य की बात यह है कि जब विधायक के नागरिक लोग ही आंदोलन विधायक की मंसा के अनुरूप शासन के हित में कर रहे हैं तब यह आंदोलन आखिर दबाया क्यों जा रहा है..? बजाय आंदोलनकारी को प्रोत्साहित और सम्मानित करने के।इस आंदोलन को प्रोत्साहन देने का मतलब है मध्य प्रदेश शासन जल गंगा संवर्धन अभियान के प्रति जागरूकता पैदा करना ताकि हर तालाब के आसपास ऐसे नागरिक स्व सहायतासमूह गठित हो सके और तालाबों तथा जल स्रोतों, बावड़ियों की रक्षा कर सकें।
शहडोल में देखा गया है तमाम बावड़ियों को निजी व्यक्तियों ने कब्जा कर लिया है और उसे बांट रहे हैं यह सभी प्राचीन बावड़ियों को हमारे पुरखों ने मुड़ना नदी के संरक्षण के लिए बनाया था इन छोटे-छोटे तालाबों और बावड़ियों से मुड़ना नदी संरक्षित होती थी और वर्षभर जल स्रोत का प्रवाह होता था भूजल स्रोत के माध्यम से। उसके नष्ट हो जाने से मुड़ना नदी मात्र गंदा नाला के रूप में आज प्रदर्शित हो रही है। जबकि क्षेत्रीय विधायक श्रीमती मनीषा सिंह मुड़ना नदी के पास रह रही हैं इस बदबूदार हो रहे नाले को सुरक्षित करती नेता के रूप में क्यों नहीं दिखाई दे रही है… यह एक आश्चर्यजनक स्थित है।

आखिर विधायक का धर्म जनता के धर्म से मिलकर लोक धर्म के लिए काम करने का होता है तो यह बात भी प्रमाणित होती है कि प्रशासन भी यहां पर चुप्पी साधे हुए आंदोलनकारी को अनदेखा कर रहा है। आखिर प्रशासन इन नासमझ विधायकों और नेताओं को यह समझा पाने में क्यों असफल हो रहा है.. कि इन्हीं जल स्रोतों से मुड़ना नदी का जल संवर्धन होगा, जो सोन नदी के जल संवर्धन का कारण बनेगा और सोन नदी का जल संवर्धन ही जल गंगा संवर्धन अभियान का प्रमुख अभियान है, वही गंगा को पानी पहुंचाएगा।
इतनी छोटी सी बात ना तो कार्यपालिका, विधायिका को समझा पा रही है और ना ही विधायिका जनता की बात समझना चाहती है। तो क्या राम के नाम पर लूट सके तो लूट के तर्ज पर जल गंगा अभियान के नाम पर सिस्टम भ्रामक तरीके से काम कर रहा है; मुंह में राम बगल में छुरी… इस अंदाज पर आम आदमी को क्या संदेश देना चाहता है यह बड़ा प्रश्न है….?
अखबार भी चाहे वह पत्रिका हो या विजयमत मुड़ना नदी को जागरूकता फैला रहे हैं आखिर हमें लेकर उम्मीद क्यों नहीं करनी चाहिए कि क्षेत्रीय विधायक आंदोलनकारी के साथ मिलकर श्रीमती चपरा के साथ मौका स्थल में जाकर प्राचीन बावड़ी को खुदाई का काम तत्काल प्रारंभ करे। इससे जनप्रतिनिधियों का भी सम्मान होगा और भाजपा जिला अध्यक्ष का भी उनकी निष्पक्षता को लेकर चर्चा होगी।
देखते हैं आगे आगे क्या होता है जो होगा उसे पर चर्चा करेंगे.. करते ही रहेंगे… क्योंकि शहडोल का यह एकमात्र प्राचीन बावड़ी किरण टॉकीज की है जिसमें जनता ने अपनी लोक जन आंदोलन क्रमिक अनशन के जरिए जागरूकता से गंगा नदी को जल पहुंचने का संकल्प लिया है।


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